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चीन की नई समुद्री तैयारी: ड्रोन पनडुब्बियों के लिए बन रही विशाल मदरशिप

by admin@bebak24.com on | 2026-09-17 21:08:54

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चीन की नई समुद्री तैयारी: ड्रोन पनडुब्बियों के लिए बन रही विशाल मदरशिप

बीजिंग | बेबाक24 न्यूज़

चीन समुद्र के भीतर अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक नई व्यवस्था तैयार कर रहा है। शंघाई स्थित हुडोंग-झोंगहुआ शिपयार्ड में एक ऐसी विशाल पोत का निर्माण किया जा रहा है, जिसे बड़ी मानवरहित पनडुब्बियों को समुद्र तक पहुंचाने और वहां तैनात करने के लिए तैयार किया जा रहा है। उपग्रह चित्रों के आधार पर इस पोत को अपनी तरह की शुरुआती विशेष क्षमता वाले जहाज के रूप में देखा जा रहा है।

रक्षा विशेषज्ञों के आकलन के मुताबिक यह मदरशिप एक साथ कम से कम 4 विशाल मानवरहित पनडुब्बियां ले जा सकती है। इन पनडुब्बियों का इस्तेमाल चालक दल के बिना लंबे समय तक समुद्र के भीतर निगरानी और दूसरे सैन्य अभियानों के लिए किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

मदरशिप में क्या है खास

उपग्रह चित्रों में निर्माणाधीन पोत का आकार और ढांचा खास ध्यान खींचता है। इसमें एक बड़ा आंतरिक हैंगर दिखाई देता है, जहां विशाल मानवरहित पनडुब्बियों को रखा जा सकता है। जरूरत पड़ने पर इन्हीं पनडुब्बियों को समुद्र में उतारकर अलग-अलग अभियानों के लिए भेजा जा सकता है।

पोत के आगे की तरफ एक अलग हैंगर भी दिखाई देता है। इसका इस्तेमाल हेलिकॉप्टरों के लिए किए जाने की संभावना जताई गई है। इस तरह यह केवल परिवहन पोत न रहकर समुद्र में मानवरहित पनडुब्बियों की तैनाती के लिए चलित केंद्र की भूमिका निभा सकता है।

चीन की ड्रोन पनडुब्बियां कितनी बड़ी

चीन की जिन मानवरहित पनडुब्बियों की चर्चा हो रही है, उन्हें अत्यंत बड़े आकार के मानवरहित समुद्री वाहन की श्रेणी में रखा जा रहा है। अभी तक ऐसी 2 पनडुब्बियों के सामने आने की जानकारी है।

आकलनों के अनुसार इनमें एक की लंबाई करीब 115 फीट और दूसरी की करीब 148 फीट है। तुलना के लिए अमेरिकी ओर्का मानवरहित पनडुब्बी की लंबाई करीब 51 फीट बताई गई है। इस आधार पर चीन की नई पनडुब्बियां आकार में उससे कई गुना बड़ी हो सकती हैं।

इनमें से ऐसी पनडुब्बियों के दक्षिण चीन सागर में हैनान द्वीप के पास परीक्षण किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।

क्या हजारों किलोमीटर तक जा सकती हैं

इन मानवरहित पनडुब्बियों की वास्तविक क्षमता को लेकर पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं है। हालांकि रक्षा विशेषज्ञ एचआई सटन के आकलन के अनुसार, इनके बड़े आकार के कारण इनमें भारी हथियारों या दूसरे सैन्य उपकरणों के लिए पर्याप्त स्थान हो सकता है।

स्रोत में इनकी संभावित परिचालन दूरी 10000 समुद्री मील से अधिक बताई गई है। इतनी लंबी दूरी की क्षमता होने पर ये वाहन लंबे समय तक बिना चालक दल के समुद्र के भीतर दूर-दराज के इलाकों में काम कर सकते हैं।

हालांकि इनके वास्तविक हथियार विन्यास, मारक क्षमता और युद्धक उपयोग की आधिकारिक जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। इसलिए इन क्षमताओं को फिलहाल संभावित आकलन के रूप में ही देखा जा रहा है।

अमेरिका और ब्रिटेन से कैसी तुलना

अमेरिका की ओर्का श्रेणी की मानवरहित पनडुब्बी को लंबी दूरी के गुप्त समुद्री अभियानों के लिए विकसित किया गया है। इसकी संभावित परिचालन दूरी करीब 6500 समुद्री मील बताई गई है।

ब्रिटेन भी अत्यंत बड़ी मानवरहित पनडुब्बी विकसित कर रहा है, जिसे एक्सकैलिबर परियोजना के नाम से जाना जा रहा है। इसकी लंबाई करीब 39 फीट और संभावित दूरी लगभग 1000 मील बताई गई है। जुलाई में इसके समुद्री परीक्षण शुरू होने और 2028 तक परिचालन में आने की उम्मीद जताई गई है।

इस तुलना से चीन की नई पनडुब्बियों के आकार और संभावित लंबी दूरी की क्षमता का अंदाजा लगाया जा सकता है। हालांकि विभिन्न देशों की परियोजनाओं की भूमिका और तकनीकी संरचना अलग-अलग है।

चीन की समुद्री ताकत से किन क्षेत्रों पर नजर

चीन लंबे समय से अपनी समुद्री सैन्य क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है। उसके जहाज निर्माण और युद्धपोत बेड़े का आकार भी इस रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

इसका प्रभाव विशेष रूप से ताइवान और दक्षिण चीन सागर से जुड़े सुरक्षा समीकरणों पर देखा जाता है। चीन ताइवान पर अपना दावा करता है और बल प्रयोग की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं करता। दूसरी ओर ताइवान चीन के दावे को स्वीकार नहीं करता।

दक्षिण चीन सागर में भी चीन कई द्वीपों, चट्टानों और समुद्री क्षेत्रों पर अपना दावा करता है, जिसका फिलीपींस, वियतनाम, ब्रुनेई और ताइवान विरोध करते हैं। ऐसे में दूर समुद्री क्षेत्रों में लंबे समय तक काम करने वाली मानवरहित पनडुब्बियां भविष्य की समुद्री रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

नई तकनीक के पीछे रणनीतिक संदेश

चीन की बढ़ती समुद्री क्षमता को केवल सैन्य तकनीक के विकास के रूप में ही नहीं देखा जा रहा है। चीन के शियांगशान मंच में करीब 100 देशों की भागीदारी के बीच उसके रक्षा मंत्री डोंग जून ने वर्चस्ववाद और सैन्यवाद से जुड़े मुद्दों पर भी बात की।

जापान और चीन के बीच पहले से चल रहे राजनयिक तनाव तथा दोनों देशों द्वारा अपनी रक्षा क्षमताएं बढ़ाने की कोशिशों के बीच चीन की नई समुद्री परियोजनाएं रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

बेबाक24 टेक

चीन की प्रस्तावित मदरशिप और विशाल मानवरहित पनडुब्बियां समुद्र के भीतर लंबी दूरी तक चालक दल के बिना अभियान चलाने की दिशा में उसकी बढ़ती रुचि दिखाती हैं। हालांकि इन वाहनों की वास्तविक सैन्य भूमिका और हथियार क्षमता अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, इसलिए फिलहाल सामने आए अधिकांश आंकड़ों को विशेषज्ञों के आकलन के रूप में ही देखना उचित होगा।



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