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नवोदय विद्यालय विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु से कहा- नजरिया बदलें, हर जिले में जमीन चिन्हित करें

by admin@bebak24.com on | 2026-09-17 21:07:24

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नवोदय विद्यालय विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु से कहा- नजरिया बदलें, हर जिले में जमीन चिन्हित करें

चेन्नई | बेबाक24 न्यूज़

तमिलनाडु में नवोदय विद्यालयों की स्थापना को लेकर चल रहा विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद एक बार फिर चर्चा में है। गुरुवार को अदालत ने राज्य सरकार को हर जिले में नवोदय विद्यालय के लिए जरूरी जमीन चिन्हित करने के निर्देश दिए और केंद्र तथा राज्य के बीच सहयोग को संघीय व्यवस्था के लिए जरूरी बताया।

न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने दिसंबर 2025 के अपने आदेश का पालन करने को कहा। अदालत ने राज्य के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि साझा अधिकार वाली सूची में केंद्र की कोई नीति होने पर यदि हर राज्य उसे मानने से इनकार करे, तो संघीय व्यवस्था कैसे चलेगी।

दिसंबर 2025 में क्या आदेश हुआ था

15 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को राज्य के प्रत्येक जिले में नवोदय विद्यालय की स्थापना के लिए जरूरी जमीन तलाशने का निर्देश दिया था। इसके लिए राज्य को 6 सप्ताह का समय दिया गया था।

गुरुवार की सुनवाई में राज्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता ने बताया कि सरकार ने उस आदेश को वापस लेने की मांग करते हुए आवेदन दिया है। अदालत ने आदेश वापस लेने से इनकार करते हुए जमीन चिन्हित करने के लिए अब 3 महीने का अतिरिक्त समय दिया। यह व्यवस्था राज्य की विशेष अनुमति याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी।

हिंदी को लेकर क्या है विवाद

तमिलनाडु सरकार की आपत्ति नवोदय विद्यालयों में लागू तीन-भाषा वाली शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी है। सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि यदि राज्य की आपत्ति का आधार तमिलनाडु की भूमि पर हिंदी पढ़ाया जाना है, तो राज्य को अपने दृष्टिकोण पर पुनर्विचार करना चाहिए।

हालांकि, राज्य की ओर से जयदीप गुप्ता ने कहा कि तमिलनाडु हिंदी की पढ़ाई का पूरी तरह विरोध नहीं करता। उन्होंने बताया कि राज्य में पहले से कई ऐसे विद्यालय हैं, जहां हिंदी पढ़ाई जाती है।

केंद्र ने जमीन देने की बात पर क्या कहा

केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने अदालत को बताया कि राज्य की मुख्य जिम्मेदारी विद्यालय के लिए जमीन उपलब्ध कराने तक सीमित रहेगी। अन्य व्यवस्थाओं का खर्च और जिम्मेदारी केंद्र संभालेगा, जिससे राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।

भाषा नीति से जुड़े मतभेदों पर भी अदालत ने केंद्र और राज्य को आपस में बातचीत कर समाधान निकालने की सलाह दी। पीठ ने कहा कि चेन्नई और दिल्ली को एक-दूसरे से अलग नहीं माना जा सकता और दोनों पक्षों को मिलकर काम करना चाहिए।

मामला सुप्रीम कोर्ट तक कैसे पहुंचा

नवोदय विद्यालयों का यह विवाद पहले मद्रास हाईकोर्ट में पहुंचा था। सितंबर 2017 में हाईकोर्ट ने तमिलनाडु के प्रत्येक जिले में नवोदय विद्यालय स्थापित करने की प्रक्रिया में राज्य को सहयोग करने का निर्देश दिया था।

हाईकोर्ट ने माना था कि विद्यालयों की अनुमति नहीं मिलने से विद्यार्थियों के अपनी पसंद के शिक्षण संस्थान चुनने के अधिकार पर असर पड़ सकता है। अदालत ने इसे 2009 के बच्चों को निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार कानून की भावना के अनुरूप नहीं माना था।

तमिलनाडु सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इसके बाद 11 दिसंबर 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के निर्देश पर रोक लगा दी थी।

बेबाक24 टेक

नवोदय विद्यालय विवाद में फिलहाल अदालत ने दिसंबर 2025 के जमीन चिन्हित करने वाले निर्देश को बरकरार रखा है और राज्य को अतिरिक्त समय दिया है। आगे की स्थिति राज्य की याचिका पर होने वाले निर्णय तथा केंद्र और तमिलनाडु सरकार के बीच बातचीत से स्पष्ट होगी।



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