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जंगीपुर सीट का सियासी पारा 2027: टिकट पाएंगे पप्पू तो बढ़ेगा मुकाबला

by on | 2026-09-15 21:18:20

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जंगीपुर सीट का सियासी पारा 2027: टिकट पाएंगे पप्पू तो बढ़ेगा मुकाबला

 गाजीपुर । विधानसभा चुनाव 2027 में भले ही अभी समय शेष हो, लेकिन गाजीपुर की हाईप्रोफाइल जंगीपुर विधानसभा सीट पर राजनीतिक बिसात बिछनी शुरू हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खेमे में पूर्व प्रत्याशी कुंवर रमेश सिंह 'पप्पू' की दावेदारी को लेकर सरगर्मियां तेज हैं। समर्थक जहाँ उनके पुराने जनाधार और निष्ठा को मुख्य आधार बनाकर पैरवी कर रहे हैं, वहीं राजनीतिक विश्लेषक इसे नए सामाजिक व संगठनात्मक समीकरणों की कसौटी पर कसकर देख रहे हैं।

दावेदारी का आधार: समर्थकों का गणित

​पप्पू सिंह के समर्थकों का सबसे बड़ा तर्क वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव और 2016 के उपचुनाव में उन्हें मिले 63,000 से अधिक मत हैं। समर्थकों का कहना है कि 2016 के सहानुभूति लहर वाले उपचुनाव में—जब प्रदेश में सपा की सरकार थी और भाजपा का कैडर सीमित था—तब इतना बड़ा जनसमर्थन हासिल करना उनकी व्यक्तिगत क्षमता को दर्शाता है।

​जंगीपुर का चुनावी समीकरण मुख्य रूप से पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं पर केंद्रित है। पार्टी कार्यकर्ताओं का दावा है कि क्षेत्र के पिछड़े समाज के बीच पप्पू सिंह का लगातार संवाद और व्यक्तिगत जुड़ाव उनकी दावेदारी को मजबूती देता है।

​चुनाव न लड़ने के दौरान भी क्षेत्रीय जनसमस्याओं को लेकर धरना-प्रदर्शन करना और जनता के बीच बने रहना उनकी छवि को जननेता के रूप में प्रस्तुत करता है। वहीं, 2017 और 2022 में टिकट न मिलने के बावजूद पार्टी प्रत्याशी के समर्थन में निष्ठापूर्वक कार्य करना संगठन में उनके अंक बढ़ाता है।

जमीनी हकीकत: राह में खड़ी चुनौतियां

​समर्थकों के दावों के बीच कड़वा सच यह भी है कि पप्पू सिंह दोनों बार सीट निकालने में असफल रहे। चुनावी राजनीति में लगातार दो चुनावों में हार का रिकॉर्ड अक्सर टिकट की दौड़ में राह कठिन कर देता है।

​2016 के बाद से भाजपा के टिकट वितरण का तरीका पूरी तरह बदल चुका है। अब केवल पुराना रिकॉर्ड या निष्ठा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पार्टी आंतरिक सर्वे, 'विनैबिलिटी' (जीतने की क्षमता) और सूक्ष्म सोशल इंजीनियरिंग को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।

​जंगीपुर सीट परंपरागत रूप से समाजवादी पार्टी का गढ़ मानी जाती है। ऐसे में भाजपा आलाकमान किसी ऐसे चेहरे की तलाश में होगा जो सपा के मजबूत वोट बैंक में सीधी सेंध लगा सके।

​बेबाक 24 की दृष्टि (निष्कर्ष)

​कुंवर रमेश सिंह 'पप्पू' की दावेदारी जंगीपुर के राजनीतिक परिदृश्य में एक ऐसे विकल्प के रूप में मौजूद है, जिसे नजरअंदाज करना आसान नहीं है। उनके पास कार्यकर्ता नेटवर्क और संघर्ष का लंबा अनुभव है।

​तथापि, 2027 की चुनावी लड़ाई में भाजपा का फैसला केवल अतीत के आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा। अंतिम मोहर इस बात पर लगेगी कि आलाकमान के गुप्त सर्वे में जंगीपुर का सामाजिक गणित किसके पक्ष में बैठता है। फिलहाल पप्पू सिंह रेस में मजबूती से बने हुए हैं, लेकिन टिकट की चाबी भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के पास ही सुरक्षित है।



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