गाजियाबाद | बेबाक24 न्यूज़
गाजियाबाद के लोनी में भाजपा के भीतर चल रहा विवाद अब सड़क से निकलकर महापंचायतों तक पहुंच गया है। रविवार को विधायक नंदकिशोर गुर्जर के समर्थन और भाजपा नेता अनिल कसाना के पक्ष में अलग-अलग महापंचायतें आयोजित की गईं। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए, जिसके बाद इलाके में राजनीतिक और सामाजिक तनाव बढ़ गया। पुलिस ने एहतियातन निगरानी बढ़ाते हुए करीब 1000 लोगों को शांति व्यवस्था के लिए पाबंद किया है।
विधायक के समर्थन में 36 बिरादरियों की पंचायत
सिरौली गांव के एक स्कूल में नंदकिशोर गुर्जर के समर्थन में आयोजित महापंचायत में आसपास के कई गांवों के लोग शामिल हुए। आयोजकों ने इसे 36 बिरादरियों की हिंदू महापंचायत बताया।
बैठक में तीन प्रस्ताव रखे गए। इनमें विधायक के समर्थन, उनके विरोध में सक्रिय भाजपा नेताओं की भूमिका की जांच और सामाजिक विवादों के समाधान के लिए 51 सदस्यीय समिति गठित करने का फैसला शामिल है।
विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने कहा कि वह हिंदुत्व और गौरक्षा के मुद्दों पर अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने क्षेत्र की शांति बिगाड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
अनिल कसाना के समर्थन में 12 गांवों के लोग जुटे
दूसरी ओर, रिस्तल गांव में भाजपा नेता अनिल कसाना के समर्थन में महापंचायत हुई। इसमें कोतवालपुर, राजपुर, भूपखेड़ी, धारीपुर, सिरोरा, रेवड़ी, गढ़ी कलजरी, जावली, रिस्तल, महमूदपुर, शकलपुर और सीती समेत 12 गांवों के लोगों के शामिल होने की बात कही गई।
महापंचायत में वक्ताओं ने विधायक पर समाज के लोगों के साथ अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया। उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करने और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से कार्रवाई की मांग भी की गई।
अनिल कसाना ने कहा कि यह मामला चुनावी राजनीति का नहीं, बल्कि समाज के सम्मान का है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में जनता इसका जवाब देगी।
5 सितंबर की प्रेसवार्ता के बाद बढ़ा विवाद
विवाद की शुरुआत 5 सितंबर को हुई प्रेसवार्ता के बाद हुई थी। लोनी के दो नंबर क्षेत्र स्थित एक रेस्टोरेंट में भाजपा नेता अनिल कसाना ने एक हिंदू युवक के साथ कथित मारपीट के बाद बिगड़े माहौल को लेकर प्रेसवार्ता की थी। इसमें पूर्व विधायक और सपा नेता जाकिर अली समेत कुछ अन्य लोग भी मौजूद थे।
प्रेसवार्ता के बाद विधायक नंदकिशोर गुर्जर वहां पहुंचे और कसाना के साथ उनकी तीखी बहस हो गई। इस घटनाक्रम का एक कथित वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें विधायक पर आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया। विधायक ने बाद में गाली देने से इनकार किया।
इसके बाद भाजपा के भीतर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज होते गए और मामला महापंचायत तक पहुंच गया।
1000 लोगों को किया गया पाबंद
इलाके में तनाव को देखते हुए पुलिस ने करीब 1000 लोगों को शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पाबंद किया है। डीसीपी देहात सुरेंद्र नाथ तिवारी के अनुसार, ऐसे लोगों पर भी नजर रखी जा रही है, जिनसे क्षेत्र का माहौल प्रभावित होने की आशंका है।
पुलिस के मुताबिक, दोनों महापंचायतों के लिए अलग से बड़ी संख्या में बल तैनात नहीं किया गया था, लेकिन स्थानीय पुलिस लगातार निगरानी कर रही है।
भाजपा जिलाध्यक्ष चैनपाल सिंह ने पूरे विवाद को दोनों पक्षों का आपसी मामला बताया है। उनका कहना है कि इसे पार्टी का आधिकारिक विवाद नहीं माना जा रहा, हालांकि इसकी जानकारी शीर्ष नेतृत्व को दे दी गई है।
बेबाक24 टेक: लोनी का विवाद फिलहाल किसी एक प्रेसवार्ता या बयान से आगे निकल चुका है। भाजपा के भीतर दो खेमों का खुलकर शक्ति प्रदर्शन और अलग-अलग बिरादरियों का लामबंद होना बताता है कि स्थानीय स्तर पर राजनीतिक खींचतान गहरी हो चुकी है। अब पार्टी नेतृत्व और प्रशासन—दोनों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि राजनीतिक विरोध सामाजिक तनाव में न बदले।