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हिंदी किसी भाषा की प्रतिद्वंद्वी नहीं, संवाद की कड़ी है: अमित शाह; बोले- दुनिया की भाषाएं सीखें, मातृभाषा न छोड़ें

by admin@bebak24.com on | 2026-09-14 12:43:37

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हिंदी किसी भाषा की प्रतिद्वंद्वी नहीं, संवाद की कड़ी है: अमित शाह; बोले- दुनिया की भाषाएं सीखें, मातृभाषा न छोड़ें

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

हिंदी दिवस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारतीय भाषाओं की विविधता को देश की ताकत बताते हुए कहा कि हिंदी किसी दूसरी भाषा की प्रतिद्वंद्वी नहीं है। उन्होंने कहा कि हिंदी भारतीय भाषाओं के बीच संवाद और राष्ट्रीय एकता की महत्वपूर्ण कड़ी है। शाह ने युवाओं से दुनिया की भाषाएं सीखने के साथ अपनी मातृभाषा से जुड़े रहने की अपील की।

शाह ने कहा कि भारत की हर भाषा अपने साथ इतिहास, लोक परंपरा और संस्कृति की विरासत लेकर चलती है। भाषाई विविधता देश की कमजोरी नहीं, बल्कि ‘विविधता में एकता’ की भावना को मजबूत करने वाली ताकत है।

‘हिंदी का उद्देश्य प्रतिस्पर्धा नहीं, संवाद बढ़ाना’

गृह मंत्री ने कहा कि हिंदी का उद्देश्य दूसरी भारतीय भाषाओं को पीछे छोड़ना नहीं है। उन्होंने कहा कि देश में अलग-अलग मातृभाषाओं से जुड़े लोगों ने हिंदी को व्यापक संवाद की भाषा बनाने में योगदान दिया है। उनके मुताबिक, हिंदी और दूसरी भारतीय भाषाएं एक-दूसरे की प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि परस्पर सहयोगी हैं।

‘मातृभाषा बोलने में हीन भावना न रखें’

अमित शाह ने अभिभावकों से बच्चों के साथ अपनी मातृभाषा में संवाद करने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं को दुनिया की अधिक से अधिक भाषाएं सीखनी चाहिए, लेकिन इसके साथ अपनी मातृभाषा को कभी नहीं छोड़ना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भाषा व्यक्ति को उसकी मां, मिट्टी, इतिहास और संस्कृति से जोड़ती है। मातृभाषा बोलने में किसी तरह की हीन भावना नहीं होनी चाहिए।

गुजराती मातृभाषा, हिंदी से आम लोगों से जुड़ाव

अपनी मातृभाषा का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि उनकी मातृभाषा गुजराती है, लेकिन देश के अलग-अलग हिस्सों में आम लोगों से सीधे जुड़ने में हिंदी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद भारतीय भाषाओं ने राष्ट्र निर्माण, प्रशासन और विकास की प्रक्रिया को आम लोगों तक पहुंचाने में अहम योगदान दिया।

उन्होंने 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किए जाने का भी उल्लेख किया।

दयानंद से सुभाष चंद्र बोस तक उदाहरण

शाह ने स्वामी दयानंद सरस्वती का उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी मातृभाषा गुजराती थी, लेकिन उन्होंने ‘सत्यार्थ प्रकाश’ हिंदी में लिखा। इसी तरह महात्मा गांधी द्वारा 1918 में मद्रास में दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा की स्थापना का जिक्र किया।

उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस का उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी मातृभाषा बंगाली थी, फिर भी उन्होंने आजाद हिंद फौज में संवाद के लिए हिंदी को अपनाया और ‘जय हिंद’ जैसा नारा दिया।

‘भाषाओं का सम्मान, देश के आत्मगौरव का सम्मान’

अमित शाह ने कहा कि भारतीय भाषाओं का सम्मान केवल भाषा का विषय नहीं है, बल्कि यह देश की संस्कृति, इतिहास और आत्मगौरव से जुड़ा हुआ है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति’ के आह्वान के संदर्भ में भी भाषा की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

बेबाक24 टेक: हिंदी को आगे बढ़ाने की बहस तब ज्यादा सार्थक होगी, जब उसे दूसरी भारतीय भाषाओं के सामने खड़ा करने के बजाय उनके साथ संवाद और सहयोग की भाषा के रूप में देखा जाए। भारत की भाषाई विविधता उसकी पहचान है और मातृभाषा के साथ बहुभाषिकता अपनाना इस विविधता को और मजबूत कर सकता है।



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