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संयुक्त राष्ट्र के नक्शा प्रस्ताव पर भारत-पाकिस्तान में तकरार, कश्मीर पर फिर आमने-सामने दोनों देश

by admin@bebak24.com on | 2026-09-07 15:51:40

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संयुक्त राष्ट्र के नक्शा प्रस्ताव पर भारत-पाकिस्तान में तकरार, कश्मीर पर फिर आमने-सामने दोनों देश

इस्लामाबाद | बेबाक24 न्यूज़

संयुक्त राष्ट्र महासभा में दुनिया का नक्शा अधिक वास्तविक क्षेत्रफल के अनुरूप दिखाने से जुड़े प्रस्ताव के समर्थन में भारत के मतदान के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। भारत ने स्पष्ट किया कि उसका मतदान किसी देश की सीमा या जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दर्जे से जुड़ा नहीं था। इसके बावजूद पाकिस्तान ने कश्मीर का मुद्दा उठाते हुए भारत के रुख को खारिज कर दिया।

भारत ने प्रस्ताव के पक्ष में क्यों दिया वोट?

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 4 सितंबर को ऐसा प्रस्ताव स्वीकार किया, जिसका उद्देश्य दुनिया के नक्शों में महाद्वीपों और क्षेत्रों के आकार को वास्तविक अनुपात के अधिक करीब दिखाने को बढ़ावा देना है।

भारत ने प्रस्ताव का समर्थन किया। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि मतदान का आधार समान क्षेत्रफल वाले नक्शों का सिद्धांत था। भारत के अनुसार इसका किसी अंतरराष्ट्रीय सीमा, विवादित क्षेत्र या किसी देश की क्षेत्रीय स्थिति से संबंध नहीं है।

जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत का क्या रुख?

भारत ने कहा कि प्रस्ताव में न तो किसी विशेष नक्शे को मान्यता दी गई है और न ही अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के राजनीतिक चित्रण पर कोई निर्णय लिया गया है।

विदेश मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर भारत की संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता पर उसका रुख स्पष्ट और अपरिवर्तित है।

पाकिस्तान ने क्यों उठाया कश्मीर का मुद्दा?

भारत के स्पष्टीकरण के अगले दिन पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भारतीय रुख को खारिज कर दिया। पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर को लेकर अपने पुराने दावों को दोहराते हुए कहा कि भारत की एकतरफा कार्रवाई से क्षेत्र की स्थिति नहीं बदल सकती।

पाकिस्तान ने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के लंबित मुद्दों में शामिल बताते हुए वहां के लोगों की इच्छा के आधार पर फैसला किए जाने की बात कही। उसने स्वतंत्र और निष्पक्ष जनमत संग्रह की अपनी पुरानी मांग भी दोहराई।

164 देशों ने किया प्रस्ताव का समर्थन

संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्ताव के पक्ष में 164 देशों ने मतदान किया। एस्टोनिया, जॉर्जिया, लिथुआनिया, मोल्दोवा, सर्बिया और यूक्रेन मतदान से अलग रहे, जबकि अमेरिका ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया

प्रस्ताव टोगो की ओर से पेश किया गया था और 4 सितंबर को इसे स्वीकार किया गया। भारत का कहना है कि उसके मतदान को जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक विवाद से जोड़ना उचित नहीं है।



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