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उफान पर 'माँ गंगा', डुमरी का हरा-भरा संसार जलसमाधि की ओर!

by on | 2026-09-03 07:11:45

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उफान पर 'माँ गंगा', डुमरी का हरा-भरा संसार जलसमाधि की ओर!

वाराणसी ।  केंद्रीय जल आयोग की चेतावनी के साथ गंगा का जलस्तर रौद्र रूप धारण कर चुका है। पानी की हर बढ़ती इंच के साथ तबाही का दायरा बढ़ता जा रहा है। डुमरी क्षेत्र में प्रशासन द्वारा लगाए गए वे लाखों पौधे—जिन पर हरियाली का सपना और सरकारी खजाने का बजट टिका था—आज जलमग्न होकर अपनी ‘इह लीला’ समाप्त कर चुके हैं। कागजों पर लहलहाती हरियाली अब बाढ़ के मटमैले पानी के नीचे दम तोड़ चुकी है।

गाजीपुर से बलिया तक सन्नाटा: किसानों की मेहनत पर फिरा पानी

पूर्वांचल की जीवनरेखा कही जाने वाली सब्जियों की खेती पर बाढ़ ने सीधा प्रहार किया है। गाजीपुर से लेकर बलिया तक के तटीय इलाकों में किसानों के खेतों में पानी भर जाने से हरी सब्जियों की फसल पूरी तरह बर्बाद होने की कगार पर है।

लागत डूब चुकी है।


मंडियों में सन्नाटा पसारने की आशंका है।


किसान अपनी आँखों के सामने साल भर की कमाई को बहते देखने पर मजबूर हैं।


बनारस की गलियाँ बनीं नदियाँ: लाखों का बजट स्वाहा, जनजीवन बेहाल

वाराणसी की पौराणिक गलियों में अब नाव चलने की नौबत आ गई है। कई इलाकों में पानी सीधे लोगों के ड्राइंग रूम और रसोई तक पहुँच चुका है। बदबू, सीवर का ओवरफ्लो और उफनता पानी—बनारसियों का जीना दूभर हो चुका है। प्रशासन का दावा है कि 'मुस्तैदी' पूरी है और राहत कार्यों के नाम पर लाखों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर जनता अब भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रही है।

बाढ़ के बीच जलसा या संवेदनशीलता?

जहाँ एक तरफ आम आदमी अपने घरों से पानी निकालने और रात भर जगकर पहरा देने को मजबूर है, वहीं जनप्रतिनिधियों का रुख भी चर्चा का विषय बना हुआ है। क्षेत्रीय विधायक, मंत्री आराम फरमा रहे मेयर अशोक तिवारी बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करने तो पहुँचे, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि संकट की इस घड़ी में भी नेताओं के चेहरे पर गंभीर चिंता के बजाय केवल 'फोटो-ऑप' की मस्ती नजर आ रही है।

बेबाक सवाल: क्या हर साल आने वाली इस तबाही का इलाज केवल 'लाखों के खर्च का दिखावा' है? या फिर गाजीपुर से बलिया तक के किसान और बनारस के आम शहरी यूँ ही हर मानसून में कुदरत और प्रशासनिक लापरवाही की दोहरी मार झेलते रहेंगे?



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