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एससीओ में मोदी-जिनपिंग साथ, शरीफ ने पुतिन का थामा हाथ

by admin@bebak24.com on | 2026-09-01 12:28:32

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एससीओ में मोदी-जिनपिंग साथ, शरीफ ने पुतिन का थामा हाथ

किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच गर्मजोशी दिखाई दी। वहीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की कुछ क्षणों में अनदेखी होती नजर आई। सम्मेलन से जुड़े सामने आए दृश्यों ने दक्षिण एशिया की कूटनीतिक तस्वीर को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

मोदी-जिनपिंग की हुई अनौपचारिक बातचीत

सम्मेलन में राष्ट्राध्यक्षों की सामूहिक तस्वीर के लिए सभी नेता एक साथ खड़े हुए। तस्वीर खिंचने से पहले शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और उनसे हाथ मिलाया। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भी मोदी से बातचीत की।

सामूहिक तस्वीर के बाद मोदी और जिनपिंग कुछ देर साथ चलते और बातचीत करते दिखाई दिए। इसी दौरान शहबाज शरीफ पास में मौजूद होने के बावजूद दोनों नेताओं की बातचीत में शामिल नहीं हुए।

पुतिन से संपर्क बनाने की कोशिश करते दिखे शरीफ

सम्मेलन से जुड़े एक अन्य दृश्य में शहबाज शरीफ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के पास खड़े नजर आए। तस्वीर के बाद पुतिन मंच से बाहर की ओर बढ़ने लगे। इसी दौरान शरीफ आगे बढ़े और उनका हाथ पकड़कर बातचीत शुरू की। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच संक्षिप्त संवाद हुआ।

इन दृश्यों को पाकिस्तान के लिए कूटनीतिक असहजता के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि किसी नेता की ओर से इस घटनाक्रम को लेकर आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है।

एक दिन पहले मोदी-पुतिन की अहम मुलाकात

एससीओ सम्मेलन से एक दिन पहले प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच अलग से बातचीत हुई थी। वार्ता में रूस-यूक्रेन युद्ध का मुद्दा प्रमुख रहा। मोदी ने युद्ध समाप्त करने और बातचीत के जरिए शांति का रास्ता तलाशने की आवश्यकता पर जोर दिया।

दोनों नेताओं के बीच हुई मुलाकात को भारत-रूस संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मोदी ने पुतिन को भारत आने का निमंत्रण भी दिया।

भारत-चीन रिश्तों में भी संवाद बढ़ा

भारत और चीन के संबंध वर्ष 2020 की गलवान घाटी हिंसा के बाद लंबे समय तक तनावपूर्ण रहे हैं। सीमा विवाद के कारण दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई है।

ऐसे माहौल में बिश्केक में मोदी और जिनपिंग की अनौपचारिक बातचीत को दोनों देशों के बीच संवाद की दिशा में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, सीमा विवाद और अन्य लंबित मुद्दों का समाधान अभी भी द्विपक्षीय संबंधों की सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।

एससीओ में भारत का रुख

शिखर सम्मेलन में भारत ने क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, संपर्क, व्यापार और विकास से जुड़े मुद्दों पर अपना पक्ष रखा। सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच आपसी सहयोग बढ़ाने और क्षेत्रीय स्थिरता मजबूत करने पर भी चर्चा हो रही है।



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