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स्टारलिंक पर फिर बोले एलन मस्क: गांवों और दूरदराज इलाकों में दूर हो सकती है इंटरनेट की कमी

by on | 2026-08-21 15:38:11

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स्टारलिंक पर फिर बोले एलन मस्क: गांवों और दूरदराज इलाकों में दूर हो सकती है इंटरनेट की कमी

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

भारत में स्टारलिंक की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू होने का इंतजार अभी जारी है, लेकिन इसके प्रमुख एलन मस्क ने एक बार फिर देश के ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में बेहतर इंटरनेट पहुंचाने में इस तकनीक की संभावनाओं पर जोर दिया है। मस्क का कहना है कि जहां पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क पहुंचाना मुश्किल है, वहां उपग्रह आधारित इंटरनेट कनेक्टिविटी की बड़ी कमी को दूर करने में मदद कर सकता है।

मस्क ने सामाजिक माध्यम पर एक पोस्ट को साझा करते हुए कहा कि स्टारलिंक भारत के उन इलाकों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है, जहां आज भी इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध नहीं है।

11 हजार से ज्यादा गांवों में 4जी की पहुंच नहीं

मस्क ने जिस जानकारी को साझा किया, उसमें दावा किया गया है कि मई 2026 तक देश के 11 हजार से अधिक गांवों में 4जी नेटवर्क की बुनियादी सुविधा नहीं पहुंच पाई थी।

यह आंकड़ा ऐसे समय में सामने आया है जब भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। मार्च 2026 तक देश में 100 करोड़ से अधिक इंटरनेट ग्राहक होने की बात कही गई है।

इनमें करीब 44 करोड़ उपयोगकर्ता ग्रामीण इलाकों से जुड़े हैं। इसके बावजूद गांवों और शहरों के बीच इंटरनेट पहुंच में बड़ा अंतर बना हुआ है।

शहरों और गांवों के बीच इंटरनेट का बड़ा अंतर

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, शहरी इलाकों में प्रति 100 लोगों पर इंटरनेट घनत्व 126 से अधिक है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह करीब 48 के आसपास है।

यानी देश में इंटरनेट का विस्तार तेजी से हुआ है, लेकिन उसकी पहुंच अभी भी सभी क्षेत्रों में एक जैसी नहीं है। पहाड़ी, वन क्षेत्र, द्वीप और बेहद दुर्गम इलाकों में पारंपरिक ढांचा तैयार करना आज भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

भारतनेट से भी बढ़ी कनेक्टिविटी

ग्रामीण इंटरनेट सुविधा बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार भारतनेट योजना के तहत बड़े पैमाने पर प्रकाशीय रेशा बिछाने का काम कर रही है।

इसके जरिए बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतों को इंटरनेट से जोड़ने की कोशिश की गई है। हालांकि, मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों वाले इलाकों में हर जगह मोबाइल टावर और पारंपरिक संचार ढांचा खड़ा करना आसान नहीं है।

यही वह क्षेत्र है जहां स्टारलिंक जैसी उपग्रह आधारित सेवा को संभावित विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है।

सीधे उपकरण तक पहुंच सकती है उपग्रह सेवा

स्टारलिंक की तकनीक को लेकर एक महत्वपूर्ण चर्चा सीधे उपकरण तक संपर्क की है। इस व्यवस्था में उपग्रह के जरिए दूरदराज इलाकों में संचार सुविधा उपलब्ध कराने की कोशिश की जाती है, जहां सामान्य मोबाइल टावर या जमीन आधारित नेटवर्क सीमित हैं।

ऐसी तकनीक पहाड़ी इलाकों, दूरस्थ द्वीपों और प्राकृतिक आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है।

भारत में सेवा शुरू करने के लिए अभी मंजूरियों का इंतजार

भारत में स्टारलिंक की व्यावसायिक सेवा शुरू होने के लिए अभी नियामकीय प्रक्रिया पूरी होना बाकी है। उपग्रह आधारित संचार सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन और अन्य आवश्यक मंजूरियां महत्वपूर्ण चरण हैं।

स्टारलिंक की ओर से भारत में सेवा शुरू करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा करने की कोशिश जारी है। इसलिए फिलहाल सेवा शुरू होने की निश्चित तारीख स्पष्ट नहीं है।

कंपनी ने मंजूरी रुकने की खबरों को बताया गलत

स्टारलिंक की भारत में शुरुआत को लेकर हाल के दिनों में कई तरह की खबरें सामने आई थीं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण परियोजना की मंजूरियां रोक दी गई हैं।

लेकिन स्टारलिंक की व्यापार संचालन संबंधी वरिष्ठ अधिकारी लॉरेन ड्रेयर ने इन दावों को भ्रामक और निराधार बताया।

उन्होंने कहा कि कंपनी भारत सरकार के साथ अपनी व्यावसायिक उपग्रह इंटरनेट सेवा जल्द शुरू करने को लेकर लगातार और सकारात्मक बातचीत कर रही है।

गांवों की डिजिटल खाई पाटने की उम्मीद

अगर स्टारलिंक को भारत में आवश्यक मंजूरियां मिलती हैं और सेवा व्यावसायिक रूप से शुरू होती है, तो इसका सबसे बड़ा संभावित लाभ उन इलाकों को मिल सकता है जहां जमीन आधारित नेटवर्क पहुंचाना महंगा या तकनीकी रूप से कठिन है।

हालांकि, सेवा की कीमत, उपकरण की उपलब्धता, उपग्रह क्षमता और नियामकीय शर्तें यह तय करेंगी कि इसका लाभ ग्रामीण भारत के आम उपभोक्ताओं तक कितनी व्यापकता से पहुंच पाता है।

बेबाक24 का नजरिया

भारत में डिजिटल विस्तार के बावजूद ग्रामीण और दुर्गम इलाकों की इंटरनेट कमी अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। ऐसे में उपग्रह आधारित इंटरनेट एक उपयोगी अतिरिक्त विकल्प बन सकता है।

बेबाक24 का मानना है कि स्टारलिंक जैसी तकनीक को केवल शहरों के तेज इंटरनेट के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि उन इलाकों तक डिजिटल पहुंच बढ़ाने के साधन के रूप में देखा जाना चाहिए जहां पारंपरिक नेटवर्क पहुंचाना कठिन है। लेकिन असली सफलता तभी मानी जाएगी जब यह सेवा ग्रामीण भारत के लिए किफायती, सुरक्षित और व्यापक रूप से उपलब्ध हो।



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