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यूएनएससी में भारत का सख्त रुख: ‘सदस्यता का इस्तेमाल आतंकियों को वैध ठहराने के लिए नहीं होना चाहिए’

by admin@bebak24.com on | 2026-08-20 16:12:04

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यूएनएससी में भारत का सख्त रुख: ‘सदस्यता का इस्तेमाल आतंकियों को वैध ठहराने के लिए नहीं होना चाहिए’

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में आतंकवाद के मुद्दे पर भारत ने सख्त रुख अपनाया है। भारत ने कहा कि सुरक्षा परिषद की सदस्यता का इस्तेमाल किसी आतंकवादी या आतंकी संगठन को वैधता दिलाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। भारत ने यह भी कहा कि केवल राजनीतिक हितों के आधार पर किसी संगठन को आतंकी घोषित करना या किसी आतंकवादी का नाम प्रतिबंध सूची से हटाने की कोशिश उचित नहीं है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि की प्रभारी और राजदूत योजना पटेल ने बुधवार को सुरक्षा परिषद के कामकाज के तौर-तरीकों पर हुई खुली बहस में यह बात रखी।

आतंकी सूची में शामिल करने और हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी हो

योजना पटेल ने कहा कि आतंकवादियों और आतंकी संगठनों को प्रतिबंध सूची में शामिल करने या उससे हटाने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और स्पष्ट मानदंडों पर आधारित होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति या संगठन के खिलाफ कार्रवाई ठोस दस्तावेजी साक्ष्यों और तय मानकों के आधार पर होनी चाहिए, न कि राजनीतिक परिस्थितियों या किसी देश के सीमित हितों के आधार पर।

‘सुरक्षा परिषद की सदस्यता बड़ी जिम्मेदारी’

भारत ने कहा कि सुरक्षा परिषद में किसी देश की सदस्यता अपने साथ बड़ी जिम्मेदारी लेकर आती है। इसका इस्तेमाल किसी सीमित राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

भारत के मुताबिक, यदि किसी आतंकवादी को प्रतिबंध सूची से हटाने या किसी संगठन को सूची में शामिल करने की प्रक्रिया राजनीतिक प्रभाव से प्रभावित होती है तो इससे अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद रोधी व्यवस्था की विश्वसनीयता कमजोर होती है।

भारत लंबे समय से उठाता रहा है सवाल

भारत पहले भी संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध समितियों में आतंकवादियों और आतंकी संगठनों की सूची से जुड़े फैसलों में कथित अपारदर्शिता पर सवाल उठाता रहा है।

नई दिल्ली का जोर इस बात पर रहा है कि आतंकवाद से जुड़ी कार्रवाई के लिए स्पष्ट नियम, प्रमाण और समान प्रक्रिया होनी चाहिए, ताकि किसी भी देश को राजनीतिक कारणों से व्यवस्था का दुरुपयोग करने का अवसर न मिले।

आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर जोर

भारत ने अपने बयान में आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक प्रयासों में निष्पक्षता और विश्वसनीयता को महत्वपूर्ण बताया। नई दिल्ली का तर्क है कि आतंकवाद से जुड़े मामलों में दोहरे मानदंड नहीं होने चाहिए और प्रतिबंध व्यवस्था का इस्तेमाल राजनीतिक सौदेबाजी के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

भारत का यह रुख ऐसे समय में सामने आया है जब सुरक्षा परिषद में आतंकवादियों और आतंकी संगठनों को प्रतिबंध सूची में शामिल करने को लेकर देशों के बीच मतभेद समय-समय पर सामने आते रहे हैं।

बेबाक24 का नजरिया

आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था तभी प्रभावी हो सकती है, जब उसके नियम सभी देशों पर समान रूप से लागू हों और फैसले ठोस साक्ष्यों पर आधारित हों।

बेबाक24 का मानना है कि सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध व्यवस्था में पारदर्शिता और समान मानदंड जरूरी हैं। किसी आतंकवादी को राजनीतिक कारणों से राहत मिलती है या किसी संगठन पर बिना पर्याप्त प्रमाण कार्रवाई होती है, दोनों ही स्थितियां वैश्विक आतंकवाद रोधी व्यवस्था के लिए नुकसानदेह हैं।



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