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झारखंड छात्र आंदोलन खत्म, लेकिन नई मुश्किल शुरू: नौकरी गंवाने वाले अभ्यर्थी धरने पर, हाईकोर्ट पहुंचे

by admin@bebak24.com on | 2026-08-20 15:44:52

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झारखंड छात्र आंदोलन खत्म, लेकिन नई मुश्किल शुरू: नौकरी गंवाने वाले अभ्यर्थी धरने पर, हाईकोर्ट पहुंचे

रांची | बेबाक24 न्यूज़

झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ 25 जुलाई से चल रहा छात्रों का आंदोलन बुधवार, 19 अगस्त को समाप्त हो गया। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में डटे छात्र अपने घर लौट गए। हालांकि, आंदोलन खत्म होते ही मामले का दूसरा पक्ष सामने आ गया है।

सरकार की ओर से कुछ भर्ती परीक्षाओं और उनके परिणाम रद्द किए जाने के बाद पहले से नियुक्त होकर नौकरी कर रहे अभ्यर्थियों ने विरोध शुरू कर दिया है। इन अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है तो दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की जाए, लेकिन ईमानदारी और योग्यता के आधार पर चयनित लोगों की नौकरी एक साथ खत्म करना उचित नहीं है।

छात्रों ने सरकार को 60 दिन का समय दिया

जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा करते हुए इसे फिलहाल स्थगित बताया है। मंच ने सरकार को 60 दिन का समय दिया है।

छात्र नेता रविंद्र पासवान ने कहा कि आंदोलन खत्म करने का अर्थ मांगों से पीछे हटना नहीं है। उनका कहना है कि यदि अगले 60 दिनों में संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई तो छात्र फिर आंदोलन शुरू कर सकते हैं।

बुधवार शाम तक जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम खाली हो गया और लंबे समय से चल रहा धरना समाप्त हो गया।

सरकार के फैसले के बाद नौकरी कर रहे अभ्यर्थियों का विरोध

छात्र आंदोलन के दौरान राज्य सरकार ने JPSC-JSSC से जुड़ी कई परीक्षाओं और उनके परिणामों को रद्द करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस फैसले के बाद मंगलवार शाम बड़ी संख्या में पहले से नियुक्त अभ्यर्थी राज्य सचिवालय परिसर पहुंच गए।

इन अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार को भर्ती प्रक्रिया की जांच करनी चाहिए और यह पता लगाना चाहिए कि किसने कथित अनियमित तरीके से नौकरी हासिल की और किसका चयन पूरी तरह योग्यता के आधार पर हुआ।

‘दोषी को जेल भेजें, लेकिन ईमानदार की नौकरी न छीनें’

प्रदर्शन कर रहे नियुक्त अभ्यर्थियों का तर्क है कि अगर जांच में कोई व्यक्ति पैसे देकर या गलत तरीके से नौकरी हासिल करने का दोषी मिलता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

लेकिन उनका कहना है कि जिन लोगों ने परीक्षा पास कर अपनी योग्यता के आधार पर नियुक्ति हासिल की, उनकी नौकरी केवल पूरी परीक्षा या परिणाम रद्द होने के कारण खत्म नहीं की जानी चाहिए।

एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि पहले व्यक्तिगत स्तर पर जांच होनी चाहिए और दोषी तथा निर्दोष अभ्यर्थियों में अंतर किया जाना चाहिए।

हाईकोर्ट पहुंचे नियुक्त अभ्यर्थी

सरकार के फैसले के खिलाफ नौकरी कर रहे कुछ अभ्यर्थियों ने बुधवार दोपहर हाईकोर्ट का रुख किया है। उनका उद्देश्य अपनी नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले को चुनौती देना और अदालत के सामने अपना पक्ष रखना है।

अब इस पूरे विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू न्यायिक प्रक्रिया भी बन गया है। अदालत में यह सवाल उठ सकता है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता पाई जाती है तो उसका असर उन अभ्यर्थियों पर किस सीमा तक डाला जा सकता है, जिनकी भूमिका कथित गड़बड़ी में नहीं रही।

सीबीआई जांच को लेकर सियासत तेज

झारखंड के मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने भी सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि मामले की जांच राज्य की सीआईडी से कराने का फैसला ही निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े करता है।

मरांडी का कहना है कि जब तक जांच सीबीआई को नहीं सौंपी जाती, उसकी निष्पक्षता को लेकर संदेह बना रहेगा।

यानी एक तरफ छात्र संगठन उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं, दूसरी तरफ नौकरी गंवाने की आशंका वाले अभ्यर्थी अपनी नियुक्तियों को बचाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।

अब मामला दो मोर्चों पर

JPSC-JSSC विवाद अब दो अलग-अलग मोर्चों में बंटता दिखाई दे रहा है।

एक ओर आंदोलनकारी छात्र चाहते हैं कि कथित भर्ती अनियमितताओं की गहराई से जांच हो और दोषियों पर कार्रवाई की जाए। दूसरी ओर पहले से नियुक्त अभ्यर्थी चाहते हैं कि जांच व्यक्तिगत स्तर पर हो और निर्दोष कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित रहे।

अब सरकार के सामने चुनौती है कि वह जांच, जवाबदेही और नियुक्त अभ्यर्थियों के अधिकारों के बीच संतुलन कैसे बनाए।

बेबाक24 का नजरिया

झारखंड में एक छात्र आंदोलन खत्म हुआ है, लेकिन भर्ती विवाद का दूसरा चरण शुरू हो गया है। जिन छात्रों ने कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन किया, उन्हें सरकार के फैसले से राहत मिली है। वहीं, पहले से नौकरी कर रहे अभ्यर्थियों के सामने अपनी नियुक्ति बचाने का संकट खड़ा हो गया है।

बेबाक24 का मानना है कि पूरी भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी का खामियाजा हर चयनित अभ्यर्थी को भुगतना न्यायसंगत नहीं होगा। जांच ऐसी होनी चाहिए जिसमें दोषी और निर्दोष के बीच स्पष्ट अंतर किया जाए। अगर अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो, लेकिन मेहनत से नौकरी पाने वालों को भी उचित कानूनी संरक्षण मिले।



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