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एयर इंडिया पायलट का कैनाबिस टेस्ट: क्या उड़ान सुरक्षा पर उठेंगे बड़े सवाल?

by admin@bebak24.com on | 2026-08-16 12:36:10

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एयर इंडिया पायलट का कैनाबिस टेस्ट: क्या उड़ान सुरक्षा पर उठेंगे बड़े सवाल?

नई दिल्ली: एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली उड़ान के दौरान विमान की ऊंचाई अचानक करीब 300 फीट कम होने की घटना के बाद पायलट के कथित कैनाबिस टेस्ट पॉजिटिव होने की खबर ने विमानन सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। हालांकि, पायलट की कैनाबिस जांच रिपोर्ट की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और उपलब्ध जानकारी के आधार पर इस कथित जांच परिणाम को विमान की घटना से जोड़ना भी जल्दबाजी होगी।

4 अगस्त 2026 को एयर इंडिया का एयरबस ए320 फुकेत से दिल्ली के रास्ते में अचानक करीब 91 मीटर नीचे आया था। इस घटना में 13 यात्री और 4 क्रू सदस्य घायल हुए थे। विमान में 137 यात्री और 8 क्रू सदस्य सवार थे और इसे दिल्ली में सुरक्षित उतार लिया गया था।

पायलटों को जांच के बाद उड़ान से हटाया गया

घटना के बाद विमानन मंत्रालय ने बताया कि दोनों पायलटों की उड़ान के बाद साइकोएक्टिव पदार्थों की नियमित जांच की गई थी।

मंत्रालय के अनुसार, कैप्टन की शुरुआती जांच का परिणाम ऐसा था जिसके लिए पुष्टिकरण जांच जरूरी थी। रिपोर्ट आने तक दोनों पायलटों को उड़ान ड्यूटी से हटा दिया गया।

बाद की मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि पुष्टिकरण जांच में कैप्टन का कैनाबिस परीक्षण पॉजिटिव आया। हालांकि, एयर इंडिया ने इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

सबसे बड़ा सवाल- क्या कैनाबिस की वजह से विमान नीचे आया?

फिलहाल इसका कोई आधिकारिक जवाब नहीं है।

विमान की अचानक ऊंचाई कम होने की वजह जानने के लिए तकनीकी, परिचालन, चिकित्सकीय और मानवीय पहलुओं से जांच की जा रही है। अभी ऐसा कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है जिसमें पायलट की कथित कैनाबिस रिपोर्ट और विमान की ऊंचाई कम होने के बीच सीधा संबंध स्थापित किया गया हो।

यही इस पूरे मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात है—किसी टेस्ट का पॉजिटिव आना और उड़ान के दौरान पायलट के नशे के प्रभाव में होना, दोनों एक ही बात नहीं हैं।

कैनाबिस का पायलट की क्षमता पर क्या असर पड़ सकता है?

वैज्ञानिक शोधों में पाया गया है कि कैनाबिस ध्यान, प्रतिक्रिया क्षमता, मोटर नियंत्रण, निर्णय लेने और जटिल कार्यों के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है।

पुराने फ्लाइट-सिम्युलेटर अध्ययनों में कैनाबिस के सेवन के बाद कुछ पायलटों की ऊंचाई, दिशा और नेविगेशन से जुड़ी गलतियां बढ़ी थीं। कुछ अध्ययनों में यह भी पाया गया कि प्रदर्शन प्रभावित होने के बावजूद पायलटों को खुद अपनी क्षमता में आई कमी का पूरा अंदाजा नहीं था।

हालांकि, इन अध्ययनों का नमूना छोटा था और उनमें आधुनिक वाणिज्यिक विमान के बजाय सिम्युलेटर का इस्तेमाल किया गया था। इसलिए इन नतीजों से एयर इंडिया की मौजूदा घटना के बारे में सीधा निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

टेस्ट पॉजिटिव होने से सेवन का समय पता नहीं चलता

कैनाबिस जांच का सबसे जटिल पहलू यही है।

शरीर में टीएचसी या उसके अवशेष मिल जाने से यह जरूरी नहीं है कि व्यक्ति ने हाल ही में इसका सेवन किया हो। कुछ लोगों में इसके अवशेष सेवन के काफी समय बाद तक पाए जा सकते हैं, खासकर नियमित इस्तेमाल करने वालों में।

रक्त में टीएचसी की मात्रा और उस समय व्यक्ति की कार्यक्षमता के बीच भी शराब जैसी सीधी और विश्वसनीय कड़ी नहीं मानी जाती।

इसलिए किसी पायलट की जांच रिपोर्ट का अर्थ समझने के लिए सिर्फ ‘पॉजिटिव’ शब्द पर्याप्त नहीं है।

जांचकर्ताओं को किन सवालों के जवाब खोजने होंगे?

इस मामले में जांच के लिए कई अहम सवाल होंगे। किस नमूने की जांच की गई, उसमें टीएचसी या उसका कोई मेटाबोलाइट मिला, उसकी मात्रा कितनी थी, नमूना कब लिया गया और उससे संभावित सेवन का समय कितना पीछे तक माना जा सकता है—इन सभी बातों का महत्व होगा।

इसके साथ यह भी देखना होगा कि उड़ान के दौरान पायलट की वास्तविक कार्यक्षमता कैसी थी और विमान की ऊंचाई कम होने की घटना के अन्य तकनीकी या मानवीय कारण क्या हो सकते हैं।

दुनिया में नियम कितने सख्त हैं?

कैनाबिस और विमानन सुरक्षा को लेकर कई देशों ने सख्त नियम बनाए हैं। उदाहरण के लिए, कनाडा में उड़ान दल और फ्लाइट कंट्रोलर्स के लिए ड्यूटी से पहले लंबे समय तक कैनाबिस से दूर रहने का नियम लागू है।

इस तरह के नियमों के पीछे मुख्य वजह यही है कि मौजूदा जांच तकनीक हमेशा यह निश्चित रूप से नहीं बता पाती कि किसी व्यक्ति पर कैनाबिस का सक्रिय प्रभाव किस समय तक रहा।

एयर इंडिया ने जांच बढ़ाने का फैसला किया

घटना के बाद एयर इंडिया अपने पायलटों की प्रतिबंधित पदार्थों को लेकर जांच व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में कदम उठा रही है। मौजूदा व्यवस्था में भी पायलटों की एक निश्चित संख्या की आकस्मिक जांच की जाती है।

यह पूरा घटनाक्रम विमानन क्षेत्र में एक बड़े सवाल की ओर इशारा करता है—क्या सिर्फ पदार्थ की मौजूदगी पता करने वाला टेस्ट पर्याप्त है, या पायलट की तत्काल कार्यक्षमता का आकलन करने वाली अधिक सटीक व्यवस्था की जरूरत है?

तीन सवालों के जवाब तय करेंगे असली तस्वीर

एयर इंडिया मामले में जांचकर्ताओं के सामने मूल रूप से 3 सवाल हैं—क्या पायलट ने कैनाबिस का सेवन किया था? क्या उड़ान के दौरान उसका असर उसकी कार्यक्षमता पर था? और क्या उस असर की विमान की ऊंचाई अचानक कम होने की घटना में कोई भूमिका थी?

पहले सवाल का जवाब जांच रिपोर्ट से मिल सकता है। लेकिन दूसरे और तीसरे सवाल का जवाब वैज्ञानिक, चिकित्सकीय और तकनीकी साक्ष्यों को एक साथ देखने के बाद ही सामने आएगा।

बेबाक24 टेक : एयर इंडिया के इस मामले में पायलट के कथित कैनाबिस टेस्ट ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल जरूर खड़े किए हैं, लेकिन अभी तक यह कहना सही नहीं होगा कि विमान की ऊंचाई अचानक कम होने की वजह कैनाबिस थी। जांच के अंतिम निष्कर्ष से ही यह स्पष्ट होगा कि दोनों घटनाओं के बीच वास्तव में कोई संबंध था या नहीं।



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