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नालसार छात्रों के एनरोलमेंट रोकने पर सीजेआई सख्त, बोले- ‘यह छात्रों और मेरे बीच का मामला, बीसीआई कौन होता है?’

by on | 2026-08-14 14:57:26

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नालसार छात्रों के एनरोलमेंट रोकने पर सीजेआई सख्त, बोले- ‘यह छात्रों और मेरे बीच का मामला, बीसीआई कौन होता है?’

नई दिल्ली: नालसार लॉ यूनिवर्सिटी के छात्रों के नामांकन पर रोक लगाने के बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के निर्देश को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कड़ी नाराजगी जताई। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और विरोध करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने सवाल किया कि छात्रों और मुख्य न्यायाधीश से जुड़े किसी विवाद में बीसीआई को हस्तक्षेप करने की जरूरत क्यों पड़ी।

बीसीआई के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने नालसार के छात्रों के खिलाफ जारी निर्देश बाद में वापस ले लिए थे। इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट में इस कार्रवाई की प्रक्रिया और औचित्य पर सवाल उठे।

सीजेआई सूर्यकांत ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अगर छात्रों के पास किसी मुद्दे को लेकर आपत्ति या शिकायत है तो उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का अधिकार है।

उन्होंने कहा कि यदि छात्रों ने उनके खिलाफ कोई बात कही या कोई विरोध किया है, तो यह छात्रों और उनके बीच संवाद का विषय है। बीसीआई को इस मामले में अनावश्यक रूप से दखल नहीं देना चाहिए।

सीजेआई ने कहा कि बीसीआई की कार्रवाई की जरूरत ही नहीं थी और यह कदम पूरी तरह अनावश्यक था।

‘वे गलत भी हों तो विरोध का अधिकार है’

मुख्य न्यायाधीश ने अपने छात्र जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि वह खुद भी छात्र गतिविधियों में हिस्सा लेते रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अगर छात्र कानून के दायरे में रहकर और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा रहे हैं तो उन्हें ऐसा करने दिया जाना चाहिए। यहां तक कि अगर उनकी बात गलत भी हो, तब भी उन्हें अपनी बात रखने और विरोध करने का अधिकार है।

सीजेआई ने सवाल किया कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे छात्रों को आखिर कौन रोक सकता है।

नालसार मामले में क्या हुआ था?

नालसार लॉ यूनिवर्सिटी के कुछ छात्रों ने सीजेआई सूर्यकांत को विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनाए जाने को लेकर विरोध जताया था।

इसके बाद बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा की ओर से छात्रों के नामांकन और अधिवक्ता के रूप में आगे की प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला निर्देश जारी किया गया था।

इस फैसले के सामने आने के बाद विवाद बढ़ गया और बीसीआई की भूमिका पर सवाल उठे। बाद में बीसीआई अध्यक्ष ने अपना निर्देश वापस ले लिया।

कोर्ट में याचिका का उल्लेख

सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर ने बीसीआई के निर्देश के खिलाफ दायर याचिका का उल्लेख किया। उन्होंने अदालत को बताया कि आदेश वापस ले लिए जाने के बावजूद मामले में बीसीआई की कार्रवाई की वैधानिकता और प्रक्रिया पर सवाल बने हुए हैं।

अदालत के सामने बीसीआई की ओर से यह भी बताया गया कि विवादित निर्देश वापस लिया जा चुका है।

छात्र विरोध के अधिकार पर अहम टिप्पणी

सीजेआई सूर्यकांत की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब छात्र संगठनों के शांतिपूर्ण विरोध, विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और नियामक संस्थाओं की शक्तियों को लेकर बहस चल रही है।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का मूल संदेश यह रहा कि कानून के दायरे में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों के विरोध को केवल असहमति के आधार पर नहीं रोका जाना चाहिए।

मामले में बीसीआई की कार्रवाई और उसके अधिकार क्षेत्र से जुड़े सवालों पर आगे की कानूनी कार्यवाही स्थिति को और स्पष्ट कर सकती है।



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