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पैकेज्ड फूड पर चेतावनी लेबल को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, एफएसएसएआई से पूछा- आदेश पर अब तक क्या किया?

by on | 2026-08-14 14:44:28

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पैकेज्ड फूड पर चेतावनी लेबल को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, एफएसएसएआई से पूछा- आदेश पर अब तक क्या किया?

नई दिल्ली: ज्यादा चीनी, नमक और संतृप्त वसा वाले पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर सामने की ओर स्पष्ट चेतावनी लेबल लगाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई के रुख पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने सवाल किया कि पहले दिए गए निर्देश के बावजूद चेतावनी लेबल की व्यवस्था लागू करने में इतनी हिचकिचाहट क्यों दिखाई जा रही है।

न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। अदालत ने एफएसएसएआई से यह भी पूछा कि उसके पहले के निर्देश के बाद अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और क्या चेतावनी लेबल लागू करने के लिए उसे खुद पहल करनी होगी या अदालत को फिर आदेश देना पड़ेगा।

कोर्ट ने कॉरपोरेट दबाव पर उठाया सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने एफएसएसएआई की एक बैठक के कार्यवृत्त का हवाला दिया और उसकी ओर से दिखाई जा रही कथित अनिच्छा पर सवाल उठाया।

अदालत ने पूछा कि क्या एफएसएसएआई पर बड़े खाद्य उत्पाद निर्माताओं और कॉरपोरेट कंपनियों का दबाव है।

पीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि क्या अदालत के आदेश को मजाक समझा जा रहा है और क्या प्राधिकरण कॉरपोरेट दबाव के आगे झुक रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य जनहित और लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा करना है।

चेतावनी लेबल क्यों जरूरी मान रहा है कोर्ट?

सुप्रीम कोर्ट का जोर ऐसे खाद्य पदार्थों के बारे में उपभोक्ताओं को खरीदारी के समय ही स्पष्ट जानकारी देने पर है, जिनमें चीनी, नमक या संतृप्त वसा की मात्रा अधिक हो सकती है।

अदालत का मानना है कि पैकेज के सामने स्पष्ट चेतावनी होने से उपभोक्ताओं को किसी उत्पाद के पोषण संबंधी जोखिम समझने में आसानी हो सकती है और वे अधिक जागरूक होकर फैसला ले सकते हैं।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी विशेष खाद्य उत्पाद के खिलाफ नहीं है। उसका उद्देश्य केवल लोगों को जानकारी उपलब्ध कराना और जनस्वास्थ्य के हित में जागरूकता बढ़ाना है।

नमकीन पर एफएसएसएआई की दलील से कोर्ट संतुष्ट नहीं

सुनवाई के दौरान एफएसएसएआई की ओर से यह दलील दी गई कि अगर इस तरह के चेतावनी लेबल लागू किए गए तो नमकीन जैसे कई पारंपरिक भारतीय खाद्य पदार्थ भी अधिक वसा, चीनी या नमक वाले उत्पादों की श्रेणी में आ सकते हैं।

अदालत इस तर्क से संतुष्ट नहीं हुई।

पीठ ने सवाल किया कि क्या देश के लोगों को स्वस्थ नहीं रहना चाहिए, खासकर बढ़ते हुए बच्चों को।

कोर्ट ने मांगा अब तक की कार्रवाई का ब्योरा

सुप्रीम कोर्ट ने एफएसएसएआई से यह बताने को कहा कि उसके पहले के निर्देश के बाद चेतावनी लेबल को लेकर क्या कदम उठाए गए हैं।

अदालत यह भी जानना चाहती है कि इस व्यवस्था को लागू करने के लिए नियामक की ओर से कोई ठोस पहल हुई है या नहीं।

मामले में आगे की कार्यवाही के दौरान एफएसएसएआई की ओर से उठाए गए कदमों और प्रस्तावित चेतावनी व्यवस्था पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

बेबाक24 न्यूज़: पैकेज्ड खाद्य पदार्थों में अधिक चीनी, नमक और संतृप्त वसा को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती ने खाद्य नियमन और उपभोक्ता जागरूकता के मुद्दे को फिर केंद्र में ला दिया है। अदालत का जोर फिलहाल किसी एक उत्पाद पर प्रतिबंध लगाने के बजाय उपभोक्ताओं को स्पष्ट और उपयोगी जानकारी देने पर है।



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