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'नई पीढ़ी सवाल पूछती है, उसे तर्क देना पड़ता है'— जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के बीच आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान

by on | 2026-07-25 14:16:45

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'नई पीढ़ी सवाल पूछती है, उसे तर्क देना पड़ता है'— जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के बीच आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान

नई दिल्ली: नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर देशभर के छात्रों और युवाओं का प्रदर्शन जारी है। इसी बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत का युवाओं की सोच और पारिवारिक संवाद को लेकर दिया गया एक बयान चर्चा में आ गया है।

शुक्रवार को दिल्ली में आयोजित 'विश्व मंगल्य सभा' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि आज का युवा हर बात पर सवाल पूछता है और उसे आदेश देने के बजाय तर्क से समझाना पड़ता है।

'बेबाक24' की विशेष वैचारिक रिपोर्ट:

"चुप यानी चुप का जमाना गया, युवाओं को तर्क देना होगा"

मोहन भागवत ने अपनी बात रखते हुए अतीत और वर्तमान की पीढ़ियों के बीच के बदलाव को रेखांकित किया।

मोहन भागवत (सरसंघचालक, RSS):

"हम जब छोटे थे, तब माता-पिता जो कहते थे, उस पर कोई बहस नहीं करते थे। चुप यानी चुप। लेकिन अब ऐसा नहीं है, नई पीढ़ी सवाल पूछती है, उसे तर्क बताना पड़ता है।"

"मोबाइल संस्कृति में पारिवारिक संवाद घटा, युवाओं को चाहिए अपनापन"

आज के पारिवारिक ढांचे और डिजिटल जीवनशैली पर संघ प्रमुख ने कहा:

  • संवादहीनता पर चिंता: "आजकल परिवारों के अंदर बातचीत बंद हो रही है। सब लोग मोबाइल में ही व्यस्त रहते हैं। नई पीढ़ी को केवल निर्देश देने के बजाय अधिक अपनापन देने की जरूरत है, उनके साथ समय बिताना होगा और उनसे लगातार बात करनी होगी।"

जंतर-मंतर आंदोलन के संदर्भ में क्यों अहम है यह बयान?

मोहन भागवत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब:

  • छात्रों की तार्किक मांगें: नीट पेपर लीक और शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर हजारों युवा सड़कों पर हैं।

  • प्रशासनिक बंदिशों पर सवाल: दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) और जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) द्वारा छात्रों को जंतर-मंतर जाने पर कार्रवाई की चेतावनी दिए जाने के बाद इस बयान को युवाओं के लोकतांत्रिक व तार्किक अधिकारों की स्वीकार्यता के रूप में भी देखा जा रहा है।

बेबाक24 टेक

संघ प्रमुख का यह बयान इस बात का बड़ा संकेत है कि बदलते दौर में युवाओं को केवल शासन, प्रशासन या परिवार द्वारा 'चुप रहने' की हिदायत नहीं दी जा सकती। चाहे घर का माहौल हो या देश की शिक्षा व्यवस्था, जब युवा सवाल उठाएं तो उन्हें दबाने के बजाय पारदर्शी उत्तर और तर्क देना ही एकमात्र लोकतांत्रिक रास्ता है।



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