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मुख्तार गैंग पर कानून का शिकंजा और कसा: फर्जी पते पर शस्त्र लाइसेंस हथियाने के खेल का भंडाफोड़, सिंडिकेट के 'सिपहसालार' और पुलिस-राजस्व अफसरों पर शिकंजा!

by on | 2026-07-24 23:43:25

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मुख्तार गैंग पर कानून का शिकंजा और कसा: फर्जी पते पर शस्त्र लाइसेंस हथियाने के खेल का भंडाफोड़, सिंडिकेट के 'सिपहसालार' और पुलिस-राजस्व अफसरों पर शिकंजा!

​गाजीपुर। पूर्वांचल में कभी खौफ का दूसरा नाम रहे आईएस-191 (मुख्तार अंसारी गिरोह) के आर्थिक और बारूदी साम्राज्य की चूलें हिलाने में जुटी गाजीपुर पुलिस ने एक और बड़ा धमाका किया है। बाहुबली मुख्तार अंसारी (मृत) के खास सिपहसालार और सिंडिकेट के कारिंदे मो. शाहिद सहित तत्कालीन थाना प्रभारी (मुहम्मदाबाद) और क्षेत्रीय लेखपाल के खिलाफ जालसाजी, साजिश और आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा ठोक दिया गया है।

​सिस्टम को जेब में रखकर किस तरह फर्जीवाड़े की बुनियाद पर असलहों का जखीरा खड़ा किया गया था, यह कार्रवाई उसी काले सच की परतें उघाड़ रही है।

​फर्जी पते का 'खेल' और सिस्टम की शह

​जांच में साफ हुआ है कि मो. शाहिद (पुत्र कुर्बान अली) असल में अब्दुल हमीद नगर, थाना सैदपुर का निवासी था। लेकिन असलहा लाइसेंस ऐंठने के लिए उसने खुद को मुहम्मदाबाद का स्थायी निवासी दिखाया। वर्ष 1999 से 2015 तक किराये के मकान में रहकर उसने 2001 में एसबीबीएल गन (SBBL Gun) का लाइसेंस बनवा लिया।

​सबसे बड़ा सवाल यह कि पुलिस और राजस्व महकमा क्या सो रहा था?

​बिल्कुल नहीं! तत्कालीन थाना प्रभारी मुहम्मदाबाद और क्षेत्रीय लेखपाल ने आंखें मूंदकर फर्जी पते पर अपनी 'मुहर' लगाई और लाइसेंस जारी करने की संस्तुति भेज दी। खाकी और कलम की इसी साठगांठ ने एक अपराधी को कानूनन 'शस्त्रधारी' बना दिया।

​कौन है मो. शाहिद? सिंडिकेट का असली 'मास्टरमाइंड'

​पुलिस सूत्रों और स्थानीय इनपुट्स की मानें तो मो. शाहिद महज एक नाम नहीं, बल्कि मुख्तार गैंग की आर्थिक रीढ़ था:

​टेंडर सिंडिकेट का 'बॉस': डॉन के पीडब्ल्यूडी (PWD) के सारे ठेके-पट्टे शाहिद और मसूद के इशारे पर तय होते थे। उसकी रजामंदी के बिना कोई टेंडर नहीं बंटता था।

​पारिवारिक तार: शाहिद, अफजाल अंसारी का रिश्तेदार बताया जाता है।
अन्य आपराधिक तार: शाहिद का नाम पूर्व में बाराबंकी के चर्चित फर्जी एंबुलेंस प्रकरण और मनोज राय हत्याकांड में भी आ चुका है, जिसमें वह पुलिस की जांच और कार्रवाई के दायरे में रहा है।

​अपराधियों के कुनबे को असलहे: सिर्फ शाहिद ही नहीं, गिरोह के शार्प शूटर उमेश राय 'गोरा' और अंगद राय के करीबी अखंड प्रताप राय (मैनेजर) की पत्नी एकता राय के नाम पर भी पिस्टल का लाइसेंस जारी कराया गया है। गौरतलब है कि एकता राय के पति पर अपहरण समेत कई संगीन मामले दर्ज हैं।

​24 जुलाई 2026: मुहम्मदाबाद थाने में 'स्ट्राइक'

​वाराणसी परिक्षेत्र के डीआईजी के कड़े निर्देशों के बाद गाजीपुर पुलिस आईएस-191 गैंग से जुड़े 51 शस्त्र लाइसेंसों का भौतिक सत्यापन कर रही है। एएसपी सिटी और रूरल के नेतृत्व में बनी विशेष टीमों की जांच के बाद 24 जुलाई 2026 को थाना मुहम्मदाबाद में मु.अ.सं. 230/2026 दर्ज किया गया।

​इन धाराओं में कसा शिकंजा:

​धारा 417, 420, 120-बी BNS (भारतीय न्याय संहिता)

​आर्म्स एक्ट की सुसंगत धाराएं

​बेबाक टेक (Bebak 24):

​यह महज एक एफआईआर नहीं, बल्कि खाकी, खादी और अपराध के उस पुराने गठजोड़ पर करारा प्रहार है जिसने दशकों तक पूर्वांचल को बंधक बनाए रखा। गाजीपुर पुलिस का संदेश साफ है—कागज पुराने हो सकते हैं, लेकिन गुनाह का हिसाब नया होगा। जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में कई और खाकी-खादी वाले बेनकाब होंगे!



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