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युद्ध के बादलों के बीच राहत! ईरान ने अमेरिकी नागरिक डेना करारी को किया रिहा; ट्रंप बोले— 'सद्भावना का कदम', लेकिन तनाव अब भी बरकरार

by on | 2026-07-16 18:54:51

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युद्ध के बादलों के बीच राहत! ईरान ने अमेरिकी नागरिक डेना करारी को किया रिहा; ट्रंप बोले— 'सद्भावना का कदम', लेकिन तनाव अब भी बरकरार

वाशिंगटन/तेहरान (बेबाक24): पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भारी सैन्य तनाव और हालिया अमेरिकी हवाई हमलों के बीच एक अप्रत्याशित कूटनीतिक राहत की खबर सामने आई है। ईरान ने दिसंबर 2024 से बंधक बनाकर रखी गई अमेरिकी-ईरानी दोहरी नागरिकता वाली डेना करारी को आखिरकार देश छोड़ने की अनुमति दे दी है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस रिहाई की पुष्टि करते हुए इसे ईरान की तरफ से एक "सद्भावना का कदम"  बताया है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस रिहाई के बावजूद दोनों देशों के बीच युद्ध का खतरा टला नहीं है।

'ट्रुथ सोशल' पर ट्रंप का बयान: बाइडन कार्यकाल का किया जिक्र

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' (Truth Social) पर एक पोस्ट के जरिए इस बड़े घटनाक्रम की जानकारी साझा की:

  • ट्रंप की प्रतिक्रिया: ट्रंप ने लिखा, "ईरान ने एक अमेरिकी नागरिक को देश छोड़ने की अनुमति दे दी है, जिसे दिसंबर 2024 में तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल के दौरान गलत तरीके से हिरासत में लिया गया था।"

  • सराहना: उन्होंने आगे कहा, "वह अब सुरक्षित रूप से ईरान से बाहर है और उसकी स्थिति अच्छी है। संयुक्त राज्य अमेरिका ईरान के इस सद्भावनापूर्ण कदम की सराहना करता है।"

कौन हैं डेना करारी और क्यों लगाया गया था 'एग्जिट बैन'?

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार वकील जेरेड गेंसर, जो इस मामले में डेना करारी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, ने सोशल मीडिया पर इस रिहाई की पूरी इनसाइड स्टोरी साझा की है:

  • क्यों गई थीं ईरान? डेना करारी दिसंबर 2024 में ईरान के शिराज शहर में अपने परिवार से मिलने गई थीं। लेकिन जब वे वापस लौटने लगीं, तो ईरानी अधिकारियों ने उनके पासपोर्ट जब्त कर उन पर 'एग्जिट बैन' (देश छोड़ने पर प्रतिबंध) लगा दिया।

  • लगे थे जासूसी के आरोप: अमेरिकी टेक सेक्टर में काम करने के साथ-साथ डेना करारी 'चिल्ड्रन ऑफ मेहर फाउंडेशन' (Children of Mehr Foundation) नाम का एक एनजीओ (NGO) चलाती हैं, जो ईरान के गरीब बच्चों की मदद करता है। ईरानी खुफिया एजेंसी (MOIS) ने इसी चैरिटी को आधार बनाकर उन पर 'जासूसी' और 'दुश्मन देश के साथ सांठगांठ' करने के फर्जी आरोप लगाए थे।

  • शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना: वकील जेरेड गेंसर के मुताबिक, डेना को कभी जेल की कोठरी में बंद नहीं किया गया, लेकिन उन पर एक साल से ज्यादा समय तक कड़ा प्रतिबंध था और खुफिया एजेंसियों ने उनसे दर्जनों बार कड़ी पूछताछ की, जिसके कारण वे गंभीर मानसिक और शारीरिक तनाव से गुजरीं। 8 जुलाई को उन्हें दिल का दौरा भी पड़ा था।

डेना करारी की रिहाई: मुख्य फैक्ट फाइल

मुख्य बिंदुविवरण
नागरिकताअमेरिकी-ईरानी (Dual Citizen)
प्रतिबंध की अवधिदिसंबर 2024 से जुलाई 2026 तक (~19 महीने)
ईरान का आरोपजासूसी और शत्रु देश (अमेरिका) के साथ सहयोग करना।
बचाव पक्ष का तर्कवे केवल बच्चों के लिए चैरिटी फाउंडेशन (Children of Mehr) चलाती थीं।
वर्तमान स्थितिईरान से सुरक्षित बाहर, अमेरिका के लिए रवाना।

तनाव के चरम पर होने के बीच क्यों झुका ईरान?

यह रिहाई बेहद चौंकाने वाले समय पर हुई है। अभी बुधवार को ही अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने होर्मुज स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के नाम पर ईरान के कई सैन्य कमांड सेंटर्स और एयर डिफेंस ठिकानों पर भीषण बमबारी की थी।

  • बार्गेनिंग चिप (सौदेबाजी का मोहरा): अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि ईरान अक्सर पश्चिमी देशों के नागरिकों को बंधक बनाकर कूटनीतिक सौदेबाजी करता है।

  • शांति वार्ता की जमीन: राष्ट्रपति ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर ईरान अगले हफ्ते शांति वार्ता में शामिल नहीं होता, तो उसके पावर प्लांट्स और बुनियादी ढांचे को नष्ट कर दिया जाएगा। ऐसे में इस अमेरिकी महिला को रिहा कर ईरान यह दिखाना चाहता है कि वह बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं करना चाहता और ट्रंप प्रशासन के साथ किसी समझौते की गुंजाइश तलाश रहा है।

बेबाक24 टेक

डेना करारी की सुरक्षित रिहाई यकीनन ट्रंप प्रशासन की एक बड़ी कूटनीतिक जीत है और मानवाधिकारों के लिहाज से एक बड़ी राहत भी। लेकिन इसे अमेरिका-ईरान के बीच दोस्ती या शांति की शुरुआत मानना एक बड़ी भूल होगी। ईरान में अब भी कई अमेरिकी और पश्चिमी देशों के नागरिक (जैसे पत्रकार रजा वलीजादेह और कामरान हिकमती) एविन जेल में बंद हैं, जिन्हें छुड़ाना अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती है।

बेबाक24 का मानना है कि ईरान का यह कदम केवल एक रणनीतिक 'ढाल' है। एक तरफ अमेरिका ने ईरान पर हवाई हमले तेज कर दिए हैं और उसकी आर्थिक नाकेबंदी कर दी है, तो दूसरी तरफ ईरान ने इस महिला को रिहा कर वाशिंगटन के भीतर मौजूद युद्ध-विरोधी लॉबी को एक संदेश दिया है। ट्रंप भले ही इसे 'सद्भावना' कह रहे हों, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट में दोनों सेनाओं की बंदूकें अभी भी एक-दूसरे पर तनी हुई हैं। असली परीक्षा अगले हफ्ते होने वाली शांति वार्ता में होगी, जहां यह तय होगा कि मिडिल ईस्ट शांति की ओर बढ़ेगा या एक विनाशकारी पूर्ण-युद्ध की ओर।



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