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तेहरान में उमड़ा जनसैलाब: सुप्रीम लीडर अली ख़ामेनेई की विदाई में बेकाबू हुई भीड़, मोसल्ला मस्जिद के उत्तरी दरवाज़े भी खोले गए

by on | 2026-07-04 13:04:52

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तेहरान में उमड़ा जनसैलाब: सुप्रीम लीडर अली ख़ामेनेई की विदाई में बेकाबू हुई भीड़, मोसल्ला मस्जिद के उत्तरी दरवाज़े भी खोले गए

इंटरनेशनल डेस्क (बेबाक24): ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई को अंतिम विदाई देने के लिए राजधानी तेहरान की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा है। इसराइल और अमेरिका के भीषण हवाई हमले में मारे गए सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार समारोह के पहले दिन शनिवार (4 जुलाई 2026) को उम्मीद से कहीं ज्यादा भीड़ जुटने के कारण तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला (मस्जिद) परिसर में अभूतपूर्व सुरक्षा चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

बीबीसी फ़ारसी सेवा के मुताबिक, ईरानी आधिकारिक मीडिया ने रिपोर्ट किया है कि मुख्य मोसल्ला मस्जिद के भीतर और बाहर उमड़े लाखों लोगों के भारी दबाव और बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन को आनन-फानन में समारोह स्थल के उत्तरी दरवाज़े (Northern Gates) भी आम जनता के लिए खोलने पड़े हैं, ताकि किसी भी तरह की भगदड़ की स्थिति से बचा जा सके।

1. ईरान से इराक तक 6 दिवसीय महा-समारोह; 2 करोड़ लोगों के जुटने का अनुमान

ईरानी सैन्य और प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह आयोजन देश के इतिहास के सबसे बड़े विदाई समारोहों में से एक बन चुका है। प्रशासन ने इस पूरे महा-शेड्यूल को लेकर बड़े आंकड़े साझा किए हैं:

  • ऐतिहासिक जनसैलाब: अधिकारियों का अनुमान है कि ईरान और पड़ोसी देश इराक के विभिन्न पवित्र शिया शहरों में आयोजित होने वाले इस छह दिवसीय विस्तृत समारोह में कुल 1.5 करोड़ (डेढ़ करोड़) से लेकर 2 करोड़ (दो करोड़) लोग शामिल होंगे।

  • बगदाद में बुधवार को पूर्ण लॉकडाउन: इस बीच, इराक के आधिकारिक समाचार सूत्रों के हवाले से खबर है कि आगामी बुधवार (8 जुलाई 2026) को जब अली ख़ामेनेई का ताबूत और अंतिम संस्कार यात्रा इराक की राजधानी बगदाद पहुंचेगी, तो वहां सुरक्षा और राजकीय शोक के मद्देनजर पूर्ण सार्वजनिक अवकाश (बगदाद बंद) रहेगा।

2. गुरुवार को गृह नगर मशहद में सुपुर्द-ए-ख़ाक़; ऐसा है अंतिम यात्रा का रूट

घोषित कूटनीतिक और धार्मिक योजना के मुताबिक, सर्वोच्च नेता की यह अंतिम यात्रा कई चरणों और शहरों से होकर गुजरेगी:

  • पवित्र शहरों की यात्रा: तेहरान में राजकीय सम्मान और विदेशी मेहमानों की श्रद्धांजलि के बाद, ताबूत को पवित्र शिया नगरों (क़ोम, नजफ़ और कर्बला) ले जाया जाएगा।

  • मशहद में अंतिम विश्राम: ख़ामेनेई का यह छह दिवसीय विदाई और अंतिम संस्कार समारोह अगले गुरुवार (9 जुलाई 2026) को उनके गृह नगर मशहद में जाकर समाप्त होगा। वहां इमाम रज़ा के पवित्र रौज़े में उन्हें उनके परिवार के चार अन्य सदस्यों के साथ सुपुर्द-ए-ख़ाक़ (दफ़्न) किया जाएगा।

बेबाक24 टेक

तेहरान की मोसल्ला मस्जिद के उत्तरी दरवाज़ों को समय से पहले खोलना और इराक की राजधानी बगदाद में बुधवार को पूर्ण बंदी का एलान होना यह साफ बयां करता है कि अली ख़ामेनेई की मौत ने पूरे 'एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस' (Axis of Resistance) और शिया जगत को किस कदर हिलाकर रख दिया है। अमेरिका और इसराइल ने जिस सुप्रीम लीडर को ख़त्म कर ईरान के मनोबल को तोड़ने की कोशिश की थी, आज उसकी विदाई में उमड़ा यह 2 करोड़ का जनसैलाब वाशिंगटन और तेल अवीव के लिए एक बहुत बड़ी मनोवैज्ञानिक और कूटनीतिक चुनौती है।

'बेबाक24' का मानना है कि ईरान और इराक, दोनों देशों की सरकारों द्वारा इस छह दिवसीय आयोजन को एक 'स्टेट-स्पॉन्सर्ड कूटनीतिक शक्ति प्रदर्शन' में बदल दिया गया है। इराक का खुलकर इस विदाई यात्रा में शामिल होना और बगदाद को बंद रखना यह साबित करता है कि अमेरिकी दबाव के बावजूद बगदाद और तेहरान के रणनीतिक रिश्ते बेहद अटूट हैं। गुरुवार को मशहद में दफ़्न होने से पहले, सड़कों पर उमड़ी यह बेकाबू और आक्रोशित भीड़ आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया में अमेरिका विरोधी और इसराइल विरोधी सेंटिमेंट को एक नए और हिंसक मोड़ पर ले जा सकती है। ईरान का यह आंतरिक महा-शोक अब एक वैश्विक कूटनीतिक नैरेटिव वॉर बन चुका है।



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