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अतीक के साम्राज्य पर SIT का हंटर तो चल गया, लेकिन मुख्तार गैंग के इस 'फाइनेंशियल किंगपिन' पर कब गिरेगी गाज? पूछता है बेबाक 24!

by on | 2026-06-24 00:52:31

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अतीक के साम्राज्य पर SIT का हंटर तो चल गया, लेकिन मुख्तार गैंग के इस 'फाइनेंशियल किंगपिन' पर कब गिरेगी गाज? पूछता है बेबाक 24!


टावर गार्ड से अरबों का मालिक बने अखंड प्रताप राय की फाइलों पर किसने डाल रखा है पर्दा?


शार्प शूटरों के दम पर 'तेल का खेल' खेलने वाले सिंडिकेट का 'मैनेजमेंट' कब होगा ध्वस्त?


प्रयागराज/गाजीपुर (बेबाक 24 ब्यूरो):

प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद के बेनामी साम्राज्य को नेस्तनाबूद करने के लिए पुलिस और प्रशासन ने संयुक्त मोर्चा खोल दिया है। 5 अफसरों की हाई-पावर SIT ग्राउंड पर उतर चुकी है। चकिया के मदन लाल भारतीया के नाम पर धूमनगंज में छिपाई गई करोड़ों की बेनामी संपत्तियों का पोस्टमार्टम शुरू हो चुका है, हर मंडे प्रोग्रेस रिपोर्ट मांगी गई है और अवैध मिलते ही कुर्की का हथौड़ा चलना तय है। लेकिन... यहाँ कहानी में एक बहुत बड़ा ट्विस्ट है, जिसे दबाने की कोशिश की जा रही है! और यहीं से शुरू होता है बेबाक 24 का सीधा सवाल!

​जब अतीक के करीबियों पर इतनी त्वरित कार्रवाई हो सकती है, तो पूर्वांचल के सबसे खूंखार रहे मुख्तार अंसारी गैंग के उस 'आर्थिक सिंडिकेट' की स्क्रूटनी कब होगी, जिसकी जड़ें दिल्ली से लेकर मुंबई तक फैली हैं? जनता की निगाहें इस 'चोर-सिपाही' के खेल पर टिकी हैं कि आखिर इस दूसरे बड़े मगरमच्छ पर जाल कब फेंका जाएगा?

​ 'टावर गार्ड' से 'अरबों का साम्राज्य'... ये कैसा चमत्कार? पूछता है बेबाक 24!

​प्रशासनिक गलियारों से लेकर लखनऊ के सत्ता के गलियारों तक में यह विमर्श का विषय है कि एक मामूली टावर गार्ड की हैसियत रखने वाला अखंड प्रताप राय आज अरबों के साम्राज्य का कथित स्वामी कैसे बन बैठा?

सवाल नंबर 1: अखंड प्रताप राय की पुरानी जांचों की वर्तमान स्थिति क्या है?


सवाल नंबर 2: क्या पूर्व में कुछ भ्रष्ट अधिकारियों ने मोटी रकम डकार कर इस जांच को ठंडे बस्ते में डालने का पाप किया था?


सवाल नंबर 3: आखिर किसने और किसके इशारे पर अखंड राय की पत्नी को पिस्टल का वीआईपी शस्त्र लाइसेंस जारी करवा दिया?


​ शार्प शूटरों का संरक्षण और बेनामी पेट्रोल पंपों का 'काला सच'

​खुफिया सूत्रों की मानें तो इस पूरे सिंडिकेट को उमेश राय उर्फ गोरा और अंगद राय जैसे खूंखार शार्प शूटरों का सीधा संरक्षण हासिल है। ये वो चेहरे हैं जो कानूनी पेचीदगियों का फायदा उठाकर और अपने रसूख के दम पर हर जांच की धार को मोड़ देते हैं।

बड़ा पर्दाफाश: अखंड प्रताप राय को मुख्तार गैंग के 'तेल के खेल' (इलाके में ईंधन सिंडिकेट) का मुख्य सूत्रधार माना जाता है। आज भी कई राज्यों में टावर कंपनियों के तेल सप्लाई के काम में इसकी बड़ी हिस्सेदारी है। काली कमाई को ठिकाने लगाने के लिए इसने अपने रिश्तेदारों के नाम पर बेनामी पेट्रोल पंप, गैस एजेंसियां, आलीशान होटल, स्कूल और बड़े-बड़े सरकारी ठेके ले रखे हैं।

​ 'फोटो मैनेजमेंट' और रसूख का ढोंग... कब टूटेगा यह भ्रम?

​जांच एजेंसियों की नाक के नीचे एक और शर्मनाक खेल चल रहा है— 'पीआर और इमेज मैनेजमेंट' का खेल! इस सिंडिकेट के गुर्गे लाखों रुपये पानी की तरह बहाकर बड़ी-बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक हस्तियों के साथ तस्वीरें खिंचवाते हैं। फिर इन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर वायरल कर आम जनता और ईमानदार अधिकारियों के दिमाग में यह भ्रम पैदा करते हैं कि 'ऊपर तक सेटिंग है'।
कड़वा सच: अधिकारी चाहे जितना दावा करें कि विधिक कार्रवाई होगी, लेकिन इस गैंग के 'मैनेजर का मैनेजमेंट' हर बार जांच और कार्रवाई पर पानी फेर देता है!
बेबाक बात: अगर कसी जाए नकेल, तो निकलेगा 'काले धन का अजगर'!

​'बेबाक 24' सीधे तौर पर यह मांग करता है कि अतीक अहमद की तरह ही इस सिंडिकेट पर भी बिना किसी 'मैनेजमेंट' के दबाव में आए कड़ी कार्रवाई की जाए। यदि दिल्ली, लखनऊ, गाजीपुर और मुंबई जैसे महानगरों तक फैले अखंड प्रताप राय के इस पूरे नेटवर्क पर कड़ाई से नकेल कसी गई, तो बेनामी संपत्ति और काले धन का एक ऐसा अजगर बाहर आएगा कि कई बड़े चेहरों के नकाब उतर जाएंगे।

​प्रशासन अतीक पर तो गरज रहा है, लेकिन मुख्तार गैंग के इस फाइनेंसर पर कब बरसेगा? जवाब चाहिए... पूछता है बेबाक 24!



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