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सामना का शिंदे-फडणवीस पर तीखा हमला, जनता के मुद्दों की अनदेखी का आरोप

by on | 2026-06-23 23:08:25

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सामना का शिंदे-फडणवीस पर तीखा हमला, जनता के मुद्दों की अनदेखी का आरोप

मुंबई | शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने के बाद महाराष्ट्र की सियासी जंग अब और तेज हो गई है. शिवसेना (यूबीटी) ने अपने मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में सत्ताधारी महायुति सरकार, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर तीखा हमला बोला है. पार्टी ने आरोप लगाया है कि जब राज्य पानी के गंभीर संकट, किसानों की बदहाली और नीट पेपर लीक जैसे बड़े मुद्दों से जूझ रहा है, तब सत्ताधारी नेता राजनीतिक दलबदल और धोखेबाजी का जश्न मनाने में व्यस्त हैं.

​'ऑपरेशन टाइगर' पर बरसे उद्धव; फडणवीस के बयान की आलोचना

​संपादकीय में सोमवार को छह सांसदों के पाला बदलने और उसे 'ऑपरेशन टाइगर' का नाम दिए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया गया है:

धोखे का जश्न: 'सामना' में लिखा गया है कि महाराष्ट्र की गंभीर समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय देवेंद्र फडणवीस 'गद्दारों' की तारीफ कर रहे हैं और कह रहे हैं कि 'ऑपरेशन सफल रहा और मरीज ठीक है'.

प्रतिष्ठा को ठेस: ठाकरे गुट ने अफसोस जताते हुए कहा कि जिस महाराष्ट्र में कभी छत्रपति शिवाजी महाराज का नाम सुनते ही गद्दारों के मन में डर पैदा हो जाता था, वहां का मौजूदा नेतृत्व सक्रिय रूप से दलबदल को बढ़ावा देकर महाराष्ट्र की छवि खराब कर रहा है.

शिंदे-फडणवीस के रिश्तों पर तंज: संपादकीय में दावा किया गया कि शिंदे की अहंकारी और पैसे वाली राजनीति का यह तरीका अंततः फडणवीस के लिए ही नुकसानदेह साबित होगा. साथ ही, दिल्ली में भाजपा नेतृत्व का एक गुट खुद शिंदे के अधिकार को चुनौती देने के लिए पर्दे के पीछे से खेल कर रहा है.

प्रशासनिक लापरवाही और गंभीर मुद्दों को उठाने की मांग

​ठाकरे गुट ने पूरे राज्य में प्रशासनिक विफलता का आरोप लगाते हुए कई महत्वपूर्ण आंकड़े और मुद्दे सामने रखे हैं:

​पानी का खतरनाक संकट: ग्रामीण महाराष्ट्र में बारिश में देरी के कारण पानी की भारी किल्लत है, जिससे मवेशियों के चारे का संकट और पलायन का खतरा बढ़ गया है. वहीं, मुंबई को पानी सप्लाई करने वाले सात प्रमुख बांधों में पानी का स्तर गिरकर खतरनाक रूप से 8.5 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जिसके चलते पानी की कटौती करनी पड़ रही है.

नीट-यूजी 2026 घोटाला: 'सामना' ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र नीट-यूजी पेपर लीक घोटाले का केंद्र बन चुका है. गिरफ्तार किए गए आरोपियों के तार सीधे तौर पर भाजपा परिवार से जुड़े हुए हैं, जिससे राज्य के लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर लग गया है.

​किसानों की उपेक्षा: संपादकीय में सरकार की कृषि नीतियों की भी तीखी आलोचना की गई है. सरकार पर सवाल उठाते हुए पूछा गया कि जब किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और फसल बीमा का लाभ नहीं मिल रहा और आत्महत्याएं जारी हैं, तो सरकार उन्हें सशक्त कैसे बनाएगी?

सामना संपादकीय की बड़ी बात:

​"सत्ताधारी गठबंधन का दावा है कि उनके पास परेशान और कर्जदार किसानों को देने के लिए पैसे नहीं हैं, लेकिन विपक्षी राजनेताओं और सांसदों को खरीदने के लिए उनके पास फंड की कोई कमी नहीं है."

विधानसभा सत्र स्थगित करने की मांग

​शिवसेना (यूबीटी) ने कड़ा रुख अपनाते हुए मांग की है कि जब तक उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और सरकार विपक्ष द्वारा उठाए गए इन बुनियादी और गंभीर मुद्दों का स्पष्ट जवाब नहीं दे देते, तब तक आगामी विधानसभा सत्र को स्थगित कर दिया जाना चाहिए.

बेबाक24 टेक

​'सामना' का यह संपादकीय सीधे तौर पर बगावत के बाद बैकफुट पर आई शिवसेना (यूबीटी) का एक मजबूत नैरेटिव सेट करने का प्रयास है। जब छह सांसद एक साथ पार्टी छोड़ते हैं, तो संगठन के कैडर में हताशा आना स्वाभाविक है। ऐसे में उद्धव ठाकरे गुट ने अपनी कमजोरी को छिपाने के लिए जनता से जुड़े संवेदनशील मुद्दों—जैसे मुंबई में पानी की किल्लत, नीट पेपर लीक और किसानों की खुदकुशी—को ढाल बनाया है।

​रणनीतिक रूप से यह कदम सरकार को घेरने के लिए बिल्कुल सटीक है। जनता के बीच यह संदेश देना कि "नेताओं को खरीदने के लिए करोड़ों रुपये हैं, लेकिन किसानों और पानी के संकट के लिए बजट नहीं है", महायुति सरकार के लिए आगामी विधानसभा चुनाव में भारी पड़ सकता है। हालांकि, ठाकरे गुट के लिए चुनौती केवल तीखे संपादकीय लिखने की नहीं, बल्कि जमीन पर बिखरते हुए अपने इस कुनबे को थामने की भी है।



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