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बारूद के ढेर पर कोचिंग: लखनऊ में अवैध बिल्डिंग और लाचार सिस्टम ने ली 15 मासूमों की जान

by on | 2026-06-22 21:12:49

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बारूद के ढेर पर कोचिंग: लखनऊ में अवैध बिल्डिंग और लाचार सिस्टम ने ली 15 मासूमों की जान

लखनऊ | उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में एक अवैध कमर्शियल बिल्डिंग में एयर कंडीशनर (AC) का कंप्रेसर फटने से भीषण आग लग गई. इस दर्दनाक हादसे में कोचिंग पढ़ने और थ्री-डी (3D) एनिमेशन का कोर्स करने वाले 15 बच्चों की जलकर मौत हो गई. जान बचाने के लिए दूसरी और तीसरी मंजिल से नीचे कूदे चार-पांच छात्र ग्राउंड फ्लोर पर लगी लोहे की नुकीली ग्रिल पर जा गिरे, जिससे सरिया उनके पेट में धंस गई. कई अन्य गंभीर रूप से झुलसे बच्चों का अस्पताल में इलाज चल रहा है.

हादसे की मुख्य वजहें: क्यों 'मौत का कुआं' साबित हुई बिल्डिंग?

  • बारूद के ढेर पर कोचिंग: इस अवैध इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर पेट शॉप और पहली मंजिल पर उसका वेयरहाउस (गोदाम) था, जबकि उसके ठीक ऊपर बच्चों का कोचिंग सेंटर और एनिमेशन इंस्टीट्यूट चल रहा था.

  • धमाका और सीढ़ियों का ब्लॉक होना: दोपहर करीब 2:30 बजे पहली मंजिल के वेयरहाउस में शॉर्ट सर्किट के बाद एसी का कंप्रेसर फट गया. गोदाम में रखे सामान के कारण आग इतनी तेजी से फैली कि एकमात्र सीढ़ी धुएं और लपटों से घिर गई.

  • कोई इमरजेंसी एग्जिट नहीं: बिल्डिंग के तीनों तरफ अन्य इमारतें खड़ी थीं और बाहर निकलने का कोई दूसरा रास्ता या आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) नहीं था. बिना फायर एनओसी (NOC) के चल रही इस अवैध तीन मंजिला इमारत में बच्चे पूरी तरह ट्रैप हो गए.

40 मिनट लेट पहुंची दमकल, अलीगढ़ से तुरंत लौटे सीएम योगी

  • प्रशासन के खिलाफ आक्रोश: स्थानीय लोगों का आरोप है कि तुरंत सूचना देने के बाद भी दमकल (फायर ब्रिगेड) की गाड़ी करीब 40 मिनट देरी से पहुंची. बाद में पुलिस, दमकल और एसडीआरएफ (SDRF) ने 2 घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद शवों को बाहर निकाला.

  • सीएम का दौरा रद्द: हादसे के वक्त मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलीगढ़ में थे. सूचना मिलते ही वे जनसभा छोड़कर तुरंत लखनऊ लौटे और घटनास्थल का मुआयना किया.

  • मुआवजे का एलान: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है. स्थानीय सांसद व रक्षामंत्री राजनाथ सिंह भी दिल्ली से लखनऊ के लिए रवाना हो गए हैं.

बेबाक24 टेक

लखनऊ का यह अग्निकांड कोई सामान्य हादसा नहीं, बल्कि सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही और अवैध निर्माण को बढ़ावा देने वाले भ्रष्टाचार की 'संस्थागत हत्या' है. सूरत और दिल्ली के हादसों से सबक न लेते हुए, रिहायशी इलाकों में मौत के ये चैंबर आज भी धड़ल्ले से चल रहे हैं. एक कमर्शियल गोदाम के ऊपर सैकड़ों बच्चों की कोचिंग चलाना ही बारूद के ढेर पर बैठने जैसा था. राजधानी के मुख्य इलाके में फायर ब्रिगेड का 40 मिनट देरी से पहुंचना हमारे लाचार आपदा प्रबंधन ढांचे को उजागर करता है. जब तक ऐसी अवैध इमारतों को सील करने और उन्हें शह देने वाले अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज नहीं होगा, तब तक मासूमों के जीवन को ऐसे ही 'लीला' जाता रहेगा.



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