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होर्मुज से राहत: 8.6 लाख मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर भारत लौट रहे 3 भारतीय टैंकर

by admin@bebak24.com on | 2026-06-21 21:05:22

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होर्मुज से राहत: 8.6 लाख मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर भारत लौट रहे 3 भारतीय टैंकर

नई दिल्ली: होर्मुज जलडमरूमध्य में लंबे समय से जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत की ऊर्जा और समुद्री सुरक्षा के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय ध्वज वाले तीन विशाल क्रूड ऑयल टैंकर सफलतापूर्वक होर्मुज जलमार्ग को पार कर सुरक्षित रूप से भारत की ओर बढ़ रहे हैं। ये टैंकर अपने साथ देश के लिए बेहद रणनीतिक महत्व का 8.6 लाख मीट्रिक टन  से अधिक कच्चा तेल लेकर लौट रहे हैं।

केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस बड़ी कामयाबी की जानकारी साझा की और बताया कि इस अभियान में देश के समुद्री हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

94 भारतीय क्रू सदस्य और तीन महाकाय तेल टैंकर

केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, यह सफल ऑपरेशन विभिन्न राष्ट्रीय एजेंसियों के बीच सक्रिय समन्वय का नतीजा है। भारत आ रहे इन तीनों जहाजों की सुरक्षा और समय-सारणी इस प्रकार है:

  • टैंकरों के नाम: इस मिशन में 'देश वैभव', 'देश विभोर' और 'सनमार हेराल्ड' नामक तीन क्रूड ऑयल टैंकर शामिल हैं।

  • क्रू की सुरक्षा: इन जहाजों पर कुल 94 भारतीय नाविक सवार हैं, जो पूरी तरह सुरक्षित हैं।

  • भारतीय बंदरगाहों पर आगमन (24 जून से 1 जुलाई):

    • देश वैभव: यह टैंकर 24 जून को गुजरात के वडीनार बंदरगाह पहुंचेगा।

    • देश विभोर: इसके भी 24 जून को ही गुजरात के सिक्का बंदरगाह पहुंचने की उम्मीद है।

    • सनमार हेराल्ड: इस जहाज ने 20 जून को होर्मुज पार किया था और यह 1 जुलाई को ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पर लंगर डालेगा。

कैसे खुला तेल आपूर्ति का रास्ता? अमेरिका-ईरान समझौता बना वजह

होर्मुज जलमार्ग से जहाजों की यह सुरक्षित आवाजाही हाल ही में बदले वैश्विक घटनाक्रमों के कारण संभव हो सकी है:

  1. अमेरिकी पाबंदियों का हटना: 18 जून को अमेरिका ने प्रारंभिक कूटनीतिक सफलता के बाद होर्मुज मार्ग से समुद्री आवाजाही पर लगी पाबंदियां हटा दी थीं, जिससे महीनों से बाधित पड़ा यह रणनीतिक कॉरिडोर फिर से खुल गया।

  2. ट्रंप-ईरान डील: उसी दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ एक अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत तेहरान अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को कम करने पर सहमत हुआ और बदले में उसे प्रतिबंधों में ढील दी गई। इसी नरमी के बाद ईरानी तेल निर्यात और वैश्विक तेल टैंकरों का रास्ता साफ हुआ।

बेबाक24 टेक

भारत जैसे देश के लिए, जो अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का करीब 80-85% हिस्सा आयात करता है, इन तीन टैंकरों का होर्मुज के चक्रव्यूह से सुरक्षित निकलना किसी बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक जीत से कम नहीं है। महीनों से खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही थीं, जिससे भारत में भी महंगाई का दबाव बढ़ रहा था।

रणनीतिक चश्मे से देखें तो यह ऑपरेशन दिखाता है कि भारत सरकार वैश्विक तनाव के बीच भी अपने 'ऊर्जा गलियारों' को सुरक्षित रखने में पूरी तरह सक्षम है। ट्रंप और ईरान के बीच हुए 18 जून के समझौते ने भारत को अपनी फंसी हुई रसद निकालने का एक बेहतरीन मौका दिया, जिसे भारतीय जहाजरानी मंत्रालय ने समय रहते लपक लिया। हालांकि, यह राहत अस्थायी भी हो सकती है क्योंकि क्षेत्र में इस्राइल और लेबनान के समीकरण पल-पल बदल रहे हैं। फिलहाल, इन टैंकरों के भारतीय तट पर पहुंचने से घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता आने और आम जनता को महंगाई से बड़ी राहत मिलने की पूरी उम्मीद है।



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