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चुनावी दहलीज पर पासी स्वाभिमान की हुंकार! राजा कंसा किले से हटेगा 'अवैध' कब्जा, 31 जिलों में आंदोलन का बिगुल

by on | 2026-06-04 21:21:52

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चुनावी दहलीज पर पासी स्वाभिमान की हुंकार! राजा कंसा किले से हटेगा 'अवैध' कब्जा, 31 जिलों में आंदोलन का बिगुल


​विशेष ब्यूरो, लखनऊ:

उत्तर प्रदेश के चुनावी समर से ठीक पहले अवध की ऐतिहासिक धरती से एक बार फिर पासी समाज ने अपने गौरव और उपेक्षित इतिहास को पुनर्स्थापित करने के लिए आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। मलिहाबाद के कसमंडी कलां में सदियों से दफन राजा कंसा पासी की विरासत और उसके भीतर कैद प्राचीन शिव मंदिर की मुक्ति के लिए 'लाखन आर्मी' ने सूबे के 31 जिलों में एक महा-आंदोलन का शंखनाद कर दिया है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पासी ने बेबाकी से एलान किया है कि अब पासी समाज अपने इतिहास के साथ हो रहे खिलवाड़ को और बर्दाश्त नहीं करेगा।

​9 जून से हरदोई से शुरू होगा 'स्वाभिमान का रथ'

ग्रेगोरियन और ब्रिटिश गजेटियरों के पन्नों को पलटते हुए लाखन आर्मी ने साफ कर दिया है कि 11वीं सदी में सालार मसूद गाजी के सेनापतियों (हातिम और खातिम) को धूल चटाने वाले राजा कंसा के किले पर आज 'मजार और मस्जिद' का चोला ओढ़ा दिया गया है। इस ऐतिहासिक अन्याय के खिलाफ 9 जून से हरदोई की धरती से "पासी स्वाभिमान यात्रा" का आगाज होने जा रहा है। एक महीने तक 31 जिलों में सोए हुए समाज को जगाने के बाद यह यात्रा 9 जुलाई को लखनऊ में एक महासम्मेलन के रूप में तब्दील होगी।

​सांसदों की चुप्पी और एएसआई के भ्रामक दावों पर प्रहार

सूरज पासी ने मोहनलालगंज के सांसद आर.के. चौधरी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जब समाज के प्रतिनिधि ही अपनी विरासत पर मौन साध लें, तो जनता को सड़कों पर उतरना ही पड़ता है। यही नहीं, एएसआई (ASI) के तथाकथित पुराने सर्वे और भ्रामक दस्तावेजों को कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी पूरी हो चुकी है। लाखन आर्मी का यह कदम सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि पासी समाज के वजूद, पहचान और अस्मिता की बहाली का आंदोलन है, जिसे चुनावी मौसम में कोई भी राजनीतिक दल नजरअंदाज नहीं कर पाएगा।



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