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DM का औचक एक्शन: बाढ़ की आहट से पहले 'ग्राउंड जीरो' पर पहुंचे अनुपम शुक्ला, बोले- "कोताही मिली तो खैर नहीं!"

by on | 2026-05-07 18:12:39

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DM का औचक एक्शन: बाढ़ की आहट से पहले 'ग्राउंड जीरो' पर पहुंचे अनुपम शुक्ला, बोले- "कोताही मिली तो खैर नहीं!"


मुहम्मदाबाद (गाजीपुर): मानसून की दस्तक और गंगा की लहरों के रौद्र रूप दिखाने से पहले ही प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है। जनपद में संभावित बाढ़ और कटान के खतरे को भांपते हुए जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने खुद कमान संभाल ली है। डीएम ने आज निर्माणाधीन कटानरोधी परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण कर अधिकारियों और ठेकेदारों की क्लास लगा दी।

शेरपुर और मुबारकपुर में 'सर्जिकल स्ट्राइक' लेवल का निरीक्षण

​जिलाधिकारी का काफिला तहसील मुहम्मदाबाद के संवेदनशील ग्राम शेरपुर और मुबारकपुर पहुंचा। यहाँ कटान रोकने के लिए बोल्डर पैचिंग का काम चल रहा है। डीएम ने धूप और धूल की परवाह किए बिना मौके पर चल रहे कार्यों की गुणवत्ता को खुद परखा।

बड़ी बात: डीएम ने साफ कर दिया कि फाइलों पर विकास नहीं, जमीन पर सुरक्षा दिखनी चाहिए। उन्होंने कार्यदायी संस्था और ठेकेदार को दो टूक चेतावनी दी कि लेबर और मशीनें बढ़ाएं, क्योंकि प्रकृति किसी का इंतजार नहीं करेगी।

डीएम के कड़े निर्देश: काम में ढील यानी सीधे 'एक्शन'

​निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने सख्त लहजे में कहा:

डेडलाइन का पालन: हर हाल में निर्धारित समयावधि के भीतर बोल्डर पैचिंग और कटानरोधी कार्य पूर्ण होने चाहिए।


कोई समझौता नहीं: गुणवत्ता में जरा भी कमी मिली या समय पर काम पूरा नहीं हुआ, तो संबंधित अधिकारी और ठेकेदार पर कड़ी कार्रवाई होगी।


संसाधनों की बढ़ोतरी: मौके पर मजदूरों और उपकरणों की संख्या तुरंत बढ़ाई जाए ताकि बाढ़ आने से पहले सुरक्षा कवच तैयार हो सके।


मौके पर मौजूद रहा प्रशासनिक अमला

​निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक हलके में हड़कंप की स्थिति रही। इस दौरान मौके पर:

उपजिलाधिकारी (SDM), मुहम्मदाबाद


अधिशासी अभियन्ता, देवकली पम्प नहर ...समेत अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद रहे, जिन्हें डीएम ने स्पष्ट निर्देश दिए कि वे नियमित रूप से कार्यों की निगरानी करें।


बेबाक 24 का नजरिया:

बाढ़ आने पर राहत बांटने से बेहतर है बाढ़ आने से पहले की गई यह तैयारी। जिलाधिकारी का यह रुख बताता है कि इस बार प्रशासन 'रिएक्टिव' नहीं बल्कि 'प्रो-एक्टिव' मोड में है। अब देखना यह है कि साहब की इस सख्ती के बाद ठेकेदार कितनी रफ्तार पकड़ते हैं।



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