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कल विधानसभा का विशेष सत्र: भाजपा लाएगी 'निंदा प्रस्ताव', विपक्ष की 'साजिश' पर होगा प्रहार; सपा ने परिसीमन के नाम पर घेरा

by admin@bebak24.com on | 2026-04-29 21:56:35

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कल विधानसभा का विशेष सत्र: भाजपा लाएगी 'निंदा प्रस्ताव', विपक्ष की 'साजिश' पर होगा प्रहार; सपा ने परिसीमन के नाम पर घेरा

लखनऊ | उत्तर प्रदेश विधानमंडल का विशेष सत्र कल, 30 अप्रैल को सुबह 11 बजे से शुरू होगा। यह सत्र पूरी तरह से 'महिला आरक्षण' और 'नारी शक्ति' के इर्द-गिर्द केंद्रित रहेगा। संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना सदन में निंदा प्रस्ताव रखेंगे, जिसके जरिए भाजपा सरकार विपक्ष (सपा-कांग्रेस) पर महिला आरक्षण विधेयक को रोकने का आरोप लगाएगी।

​विशेष सत्र की 5 बड़ी बातें

​निंदा प्रस्ताव: सरकार का तर्क है कि विपक्ष ने जानबूझकर महिला आरक्षण में अड़ंगे लगाए। इसके विरोध में भाजपा सदन में निंदा प्रस्ताव पारित करेगी।

​प्रश्नकाल नहीं: इस एक दिवसीय सत्र में कोई प्रश्नकाल नहीं होगा। पूरा समय चर्चा और विधायी कार्यों के लिए सुरक्षित रखा गया है।

​आधी आबादी की आवाज: सदन में महिला विधायकों को बोलने का विशेष अवसर दिया जाएगा। देर शाम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का समापन संबोधन होगा।

​अध्यादेशों की बाढ़: सत्र के दौरान 6 महत्वपूर्ण अध्यादेश (राजस्व संहिता, निजी विश्वविद्यालय, और दंड विधि संशोधन आदि) सदन के पटल पर रखे जाएंगे।

​सुरक्षा और अधिकार: चर्चा में केवल आरक्षण ही नहीं, बल्कि महिला सुरक्षा, शिक्षा और सामाजिक भागीदारी जैसे मुद्दों को भी शामिल किया गया है।

​ विपक्ष का 'काउंटर अटैक': सपा का अतिनिंदा प्रस्ताव

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा के दांव का जवाब 'अतिनिंदा प्रस्ताव' से दिया है:

​परिसीमन की साजिश: सपा का आरोप है कि भाजपा महिला आरक्षण के बहाने परिसीमन और जनगणना की लंबी प्रक्रिया में महिलाओं को उलझा रही है।

​आरक्षण के भीतर आरक्षण: सपा और कांग्रेस 'पिछड़ा और दलित' महिलाओं के लिए अलग से कोटा तय करने की मांग पर अड़ी हैं।

4. सदन में रखे जाने वाले प्रमुख अध्यादेश:

• उप्र राजस्व संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2026

• उप्र निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) अध्यादेश, 2026

• उप्र लोक सेवा (अधिकरण) (संशोधन) अध्यादेश, 2026

• उप्र दंड विधि (संशोधन) अध्यादेश, 2026

चुनावी बिसात पर महिला कार्ड

यूपी में महिला वोटर्स की बढ़ती साइलेंट पॉवर को देखते हुए भाजपा और सपा दोनों ही इस वर्ग को अपना बनाने की होड़ में हैं। भाजपा जहाँ इसे 'ऐतिहासिक अधिकार' के रूप में पेश कर रही है, वहीं सपा इसे 'चुनावी छलावा' बताकर पिछड़े वर्ग की महिलाओं को साधने की कोशिश में है। कल का सत्र केवल विधायी कार्य नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए एक बड़ा 'पॉलिटिकल नैरेटिव' सेट करेगा।



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