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सम्राट चौधरी की कैबिनेट में 'सोशल इंजीनियरिंग' की चुनौती: विजय सिन्हा प्रकरण से भूमिहारों की नाराजगी और 'बंगाल कनेक्शन' ने रोका विस्तार

by admin@bebak24.com on | 2026-04-29 21:50:09

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सम्राट चौधरी की कैबिनेट में 'सोशल इंजीनियरिंग' की चुनौती: विजय सिन्हा प्रकरण से भूमिहारों की नाराजगी और 'बंगाल कनेक्शन' ने रोका विस्तार

पटना | बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली भाजपा-जदयू सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में हो रही देरी अब चर्चा का विषय बन गई है। सूत्रों की मानें तो भाजपा आलाकमान बंगाल चुनाव के नतीजों और आंतरिक सामाजिक समीकरणों को सुलझाने के बाद ही अंतिम सूची पर मुहर लगाएगा।

विजय सिन्हा और 'पगड़ी' वाली सियासत

बिहार की राजनीति में इस समय सबसे बड़ा सवाल पूर्व डिप्टी सीएम विजय सिन्हा की भूमिका को लेकर है:

भूमिहार समाज की नाराजगी: विजय सिन्हा के करीबी अधिकारियों (सीके अनिल और गोपाल मीणा) के तबादले और मंत्रिमंडल में सिन्हा की कथित अनदेखी से भूमिहार समाज में भाजपा के प्रति असंतोष बढ़ रहा है।

तेजस्वी का तंज: विधानसभा में तेजस्वी यादव ने इस मुद्दे पर घी डालने का काम किया है। उन्होंने कहा कि विजय सिन्हा की नजर सम्राट चौधरी की पगड़ी पर है, जिससे भाजपा के भीतर 'पावर स्ट्रगल' के संकेत मिल रहे हैं।

बंगाल चुनाव बना विस्तार में 'ब्रेक'

कैबिनेट विस्तार टलने की एक बड़ी वजह पश्चिम बंगाल चुनाव है:

लॉबिंग और ड्यूटी: भाजपा के कई विधायक और एमएलसी बंगाल में चुनावी ड्यूटी पर हैं। विस्तार होने की स्थिति में मंत्री पद न मिलने वाले नेताओं की नाराजगी बंगाल के चुनावी माहौल पर असर डाल सकती है।

रणनीति: पार्टी चाहती है कि 4 मई को बंगाल के नतीजे आने के बाद ही बिहार में नई टीम की घोषणा की जाए।

 'नई विकास टीम' में सोशल इंजीनियरिंग

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एक ऐसी टीम चाहते हैं जो 'न्यू बिहार' के विजन को आगे बढ़ा सके:

युवा और महिलाएं: सम्राट चौधरी का फोकस युवाओं और महिलाओं को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने पर है।

पुराने चेहरों पर संकट: प्रमोद कुमार, जनक राम और दिलीप जायसवाल जैसे कई दिग्गजों का एमएलसी कार्यकाल सीमित बचा है। ऐसे में पार्टी उन्हें दोबारा मौका देगी या नए चेहरों को लाएगी, यह बड़ा सवाल है।

क्या सम्राट साध पाएंगे संतुलन?

सम्राट चौधरी के सामने सबसे बड़ी चुनौती भाजपा के पारंपरिक कोर वोटर (सवर्ण) और अपने नए 'लव-कुश' व अतिपिछड़ा समीकरण के बीच संतुलन बनाने की है। विजय सिन्हा को 'किनारे' करने का संदेश अगर भूमिहार समाज तक गया, तो यह आगामी लोकसभा चुनावों में भाजपा के लिए महंगा साबित हो सकता है।



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