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गाजीपुर का 'कटारिया कांड': पुलिस के दावे बनाम सपा की सियासत, अब अखिलेश खुद संभालेंगे मोर्चा!

by on | 2026-04-24 18:57:34

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गाजीपुर का 'कटारिया कांड': पुलिस के दावे बनाम सपा की सियासत, अब अखिलेश खुद संभालेंगे मोर्चा!


वाराणसी/गाजीपुर। जनपद के करण्डा थाना क्षेत्र का कटारिया गांव इस वक्त सियासी अखाड़ा बन चुका है। एक युवती की गंगा नदी में हुई संदिग्ध मौत ने जिले का पारा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। जहां एक तरफ पुलिस इसे आत्महत्या बता रही है, वहीं समाजवादी पार्टी इसे बड़ा मुद्दा बनाने पर आमादा है। अब खबर है कि खुद सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव 29 अप्रैल को कटारिया गांव पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात करेंगे।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस के चौंकाने वाले खुलासे

​इस पूरे मामले में पुलिस का पक्ष बेहद मजबूत और तकनीकी नजर आ रहा है। बेबाक 24 को मिली जानकारी के अनुसार:

  • रेप की पुष्टि नहीं: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतिका के साथ दुष्कर्म जैसी किसी भी बात की पुष्टि नहीं हुई है।
  • पिता की खुद की कॉल: घटना के बाद मृतिका के पिता ने खुद 112 नंबर पर सूचना दी थी कि उनकी बेटी ने आत्महत्या कर ली है।
  • सीडीआर का पेच: पुलिस की जांच और सीडीआर (CDR) रिपोर्ट में लड़की की अपने पिता से बातचीत संदिग्ध पाई गई है, जिसमें वह कुछ 'बड़ा' करने की धमकी देती सुनाई दे रही है।
  • गिरफ्तारी: पुलिस ने इस मामले में नामजद आरोपियों को पहले ही सलाखों के पीछे भेज दिया है।

सपाई खेमे में बेचैनी या बड़ी रणनीति?

​22 तारीख को ग्रामीणों और सपाइयों के बीच हुए भीषण बवाल के बाद से ही गांव छावनी में तब्दील है। पहले चर्चा थी कि सांसद अफजाल अंसारी के नेतृत्व में 15 सदस्यीय डेलिगेशन गांव जाएगा, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस सूचना के बावजूद कोई नहीं पहुंचा। अब अचानक सीधे 'हाईकमान' यानी अखिलेश यादव का गाजीपुर दौरा प्रशासन और विपक्ष दोनों के कान खड़े कर रहा है।

प्रशासनिक अमला अलर्ट, Z+ सुरक्षा के निर्देश

​अखिलेश यादव के 29 अप्रैल को दोपहर 01:00 बजे प्रस्तावित दौरे को लेकर सपा कार्यालय ने पत्र जारी कर दिया है। Z+ सुरक्षा और उनके B-Positive ब्लड ग्रुप का हवाला देते हुए प्रशासन को तत्काल पुख्ता इंतजाम करने को कहा गया है।

बेबाक टिप्पणी

​जब पुलिस के पास पिता की खुद की कॉल रिकॉर्डिंग है, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रेप की बात नहीं है और आरोपी जेल में हैं, तो फिर समाजवादी पार्टी इतनी बेचैन क्यों है? क्या यह वाकई इंसाफ की लड़ाई है या फिर आगामी सियासी बिसात पर मोहरों की सेटिंग? बेबाक 24 सवाल पूछता है कि क्या पुलिस के दावों को दरकिनार कर सपा इस मामले को नया मोड़ देने की कोशिश कर रही है?



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