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हाई अलर्ट पर भारत: पश्चिम एशिया में छिड़े युद्ध के बीच राजनाथ सिंह ने की रक्षा तैयारियों की बड़ी समीक्षा; तीनों सेना प्रमुखों के साथ हुई हाई-लेवल बैठक

by admin@bebak24.com on | 2026-03-24 15:37:21

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हाई अलर्ट पर भारत: पश्चिम एशिया में छिड़े युद्ध के बीच राजनाथ सिंह ने की रक्षा तैयारियों की बड़ी समीक्षा; तीनों सेना प्रमुखों के साथ हुई हाई-लेवल बैठक

नई दिल्ली| दुनिया के कई हिस्सों, विशेषकर पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते तनाव और युद्ध की स्थितियों को देखते हुए भारत सरकार ने देश की सुरक्षा व्यवस्था को 'हाई अलर्ट' पर रखा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को नई दिल्ली में एक उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें भारत की सैन्य तैयारियों और रणनीतिक स्थिति की गहन समीक्षा की गई।

बैठक में कौन-कौन हुआ शामिल?

राजधानी में हुई इस महत्वपूर्ण चर्चा में देश का शीर्ष सैन्य नेतृत्व मौजूद रहा:

 - सीडीएस (CDS): जनरल अनिल चौहान

 - थल सेना प्रमुख: जनरल उपेंद्र द्विवेदी

 - वायु सेना प्रमुख: एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह

 - नौसेना प्रमुख: एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी

 - DRDO चेयरमैन: समीर कामत और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी।

समीक्षा के मुख्य बिंदु: क्यों बढ़ी चिंता?

बैठक के दौरान रक्षा मंत्री को मौजूदा वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य और भारत की सीमाओं पर इसके संभावित प्रभाव के बारे में विस्तृत ब्रीफिंग दी गई।

 - ईरान-इजराइल-अमेरिका संघर्ष: पिछले 25 दिनों से जारी इस युद्ध ने वैश्विक स्तर पर अस्थिरता पैदा की है। विशेष रूप से 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) के पास बढ़ते तनाव ने भारत की चिंता बढ़ाई है।

 - ऊर्जा और व्यापार सुरक्षा: भारत अपनी कच्चा तेल और गैस की जरूरतों के लिए इसी क्षेत्र पर निर्भर है। नौसेना को भारतीय मर्चेंट जहाजों की सुरक्षा के लिए 'ऑपरेशन संकल्प' के तहत निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

 - उत्तरी और पश्चिमी सीमा: चीन और पाकिस्तान से लगी सीमाओं पर भी सेना को निरंतर सतर्क रहने और किसी भी 'हाइब्रिड खतरे' (ड्रोन या मिसाइल हमले) का सामना करने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

पीएम मोदी ने भी जताई चिंता

इससे पहले सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद (लोकसभा) में पश्चिम एशिया की स्थिति को "चिंताजनक" बताया था। उन्होंने कहा कि यह संकट न केवल आर्थिक और सुरक्षा की दृष्टि से बल्कि मानवीय दृष्टि से भी एक बड़ी चुनौती है। सरकार का मुख्य ध्यान घरों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने और ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने पर है।

 रक्षा मंत्री का संदेश: "भारत शांति का पक्षधर है और कूटनीति के माध्यम से समाधान चाहता है, लेकिन हमारी सेनाएँ किसी भी प्रकार की आकस्मिक स्थिति या चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह सक्षम और तैयार हैं।"



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