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बक्सर में 'कथित' भू-माफियाओं का तांडव, प्रशासन नतमस्तक

by on | 2026-02-07 22:32:58

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बक्सर में 'कथित' भू-माफियाओं का तांडव, प्रशासन नतमस्तक

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नहर की जमीन के बाद अब 'पशु मेला' मैदान पर नजर! क्या पूरे बक्सर को निगल जाएंगे ये सफेदपोश? डीएम के आदेश की उड़ी धज्जियां!

​बक्सर (ब्यूरो रिपोर्ट): बक्सर में इन दिनों कानून का राज है या रसूखदारों का? यह सवाल इसलिए क्योंकि यहाँ सरकारी तंत्र का दोहरा मापदंड पूरी तरह नंगा हो चुका है। शहर के बाईपास रोड पर सोन नहर की कीमती जमीन पर कब्जे की पटकथा के बाद अब बक्सर गोलम्बर स्थित 52 बीघा पशु मेले की जमीन को भी निगलने की तैयारी है। आरोप सीधे तौर पर कथित भू-माफिया प्रदीप राय और उनके बेहद करीबी धीरेंद्र पांडेय पर लग रहे हैं, जिनके आगे जिला प्रशासन 'नगण्य' यानी शून्य साबित हो रहा है।
​गरीबों का आशियाना उजाड़ कर माफिया के लिए तैयार की 'जमीन'!
​एक साल पहले का वो खौफनाक मंजर याद कीजिए, जब इसी नहर के किनारे दशकों से तिरपाल डालकर रह रहे बेसहारा गरीबों पर प्रशासन का बुलडोजर चला था। तब अधिकारियों ने 'नहर के जीर्णोद्धार' का राग अलापा था। लेकिन आज हकीकत सामने है— गरीबों को बेघर करना तो सिर्फ एक बहाना था, असली मकसद इस बेशकीमती भू-खंड को कथित भू-माफिया की गोद में डालना था। आज वहां रातों-रात पेवर ब्लॉक बिछा दिए गए और विभाग 'धृतराष्ट्र' बना बैठा है।
​DM का आदेश 'ठेंगे' पर: कौन है वो 'अदृश्य शक्ति'?
​जिले के DM ने सख्त निर्देश दिया था कि दोषियों को चिह्नित कर 48 घंटे के भीतर FIR दर्ज की जाए। लेकिन 48 घंटे बीत गए, डीएम का आदेश अधिकारियों के लिए जैसे रद्दी का टुकड़ा बन गया। अब तक प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं हुई?
​क्या सोन नहर विभाग के अधिकारी कथित भू-माफिया के रसूख के आगे डर गए हैं?
​या फिर 'नीचे से ऊपर तक' बंदरबांट का खेल सेट हो चुका है?
​पशु मेला मैदान पर भी 'कब्जा' चालू: धीरेंद्र पांडेय का 'मिशन 52 बीघा'?
​कथित भू-माफियाओं का दुस्साहस यहीं नहीं थमा। सूत्रों की मानें तो प्रदीप राय के खास सिपहसालार धीरेंद्र पांडेय ने बक्सर गोलम्बर स्थित 52 बीघा पशु मेले की जमीन पर भी पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। यहाँ भी प्रशासन की भूमिका संदिग्ध और नगण्य है। ऐसा लगता है मानो प्रशासन ने इन कथित भू-माफियाओं को पूरे बक्सर की सरकारी जमीन 'लीज' पर दे दी है।
​अधिकारियों का 'कॉमेडी शो': "हमें नहीं पता किसने कब्जा किया!"
​होटल द वैष्णवी के सामने 10 डिसमिल जमीन पर कब्जा हो गया, पेवर ब्लॉक बिछ गए, और जब विभाग की टीम पहुंची तो उनका बयान हास्यास्पद था— "हमें नहीं पता ये काम किसने कराया।"
​बेबाक सवाल: शहर के बीचों-बीच दिन-दहाड़े ट्रक से माल उतरता है, मजदूर काम करते हैं और विभाग कहता है 'अंधेरा' था? साहब, चश्मा उतारिए, जनता सब देख रही है!
​'बेबाक 24' के तीखे सवाल:
​गरीबों की झोपड़ी पर बुलडोजर चलाने वाले अधिकारी, कथित माफिया के सामने 'भीगी बिल्ली' क्यों बने हैं?
​52 बीघा पशु मेले की जमीन पर धीरेंद्र पांडेय के कब्जे के प्रयासों पर प्रशासन मौन क्यों है?
​क्या बक्सर का कानून सिर्फ आम आदमी के लिए है, कथित भू-माफियाओं के लिए नहीं?
​बक्सर की जनता जवाब मांग रही है! 'बेबाक 24' इस जमीन की लूट के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद रखेगा।



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