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डीएम की दो-टूक: फाइलें नहीं, फील्ड पर दिखना चाहिए समाधान!

by on | 2026-02-07 20:26:11

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डीएम की दो-टूक: फाइलें नहीं, फील्ड पर दिखना चाहिए समाधान!

राजातालाब में 'संपूर्ण समाधान दिवस' पर जिलाधिकारी का सख्त तेवर, 231 शिकायतों में से सिर्फ 12 का मौके पर निस्तारण

वाराणसी | जनता की परेशानियों को ठंडे बस्ते में डालने वाले अफसरों के लिए शनिवार का दिन चेतावनी भरा रहा। राजातालाब तहसील में आयोजित 'संपूर्ण समाधान दिवस' के दौरान जिलाधिकारी सत्येन्द्र कुमार ने साफ कर दिया कि शिकायतों के निस्तारण में अब 'खानापूर्ति' और 'लापरवाही' का दौर खत्म हो चुका है। डीएम ने कड़े लहजे में कहा कि जनता की समस्या पर कुंडली मारकर बैठने वाले अफसरों को बख्शा नहीं जाएगा।

फाइलों के जाल से बाहर निकलें अफसर

अक्सर देखा जाता है कि अफसर दफ्तरों में बैठकर फाइलों पर समाधान लिख देते हैं, लेकिन जमीन पर स्थिति जस की तस रहती है। डीएम ने इस पर नकेल कसते हुए निर्देश दिया कि:

 * शिकायतकर्ता को बुलाकर उसका पक्ष सुना जाए।

 * मौके पर जाकर स्थलीय निरीक्षण अनिवार्य है।

 * समाधान ऐसा हो कि शिकायतकर्ता को दोबारा उसी समस्या के लिए भटकना न पड़े।

 "केवल फाइलों का पेट न भरें, मैदान में जाकर जनता का दर्द सुनें। अगर कोई शिकायत बार-बार लौटकर आई, तो संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई तय है।" — सत्येन्द्र कुमार, जिलाधिकारी

भूमि विवाद: लेखपाल और पुलिस को 'ऑन द स्पॉट' अल्टीमेटम

समाधान दिवस में सबसे ज्यादा मामले भूमि विवाद और अवैध अतिक्रमण के आए। डीएम ने राजस्व निरीक्षकों और लेखपालों को पुलिस बल के साथ मौके पर जाकर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए। चेतावनी दी गई कि अगर शिकायतों के निस्तारण में पक्षपात या ढिलाई मिली, तो गाज गिरना तय है।

आंकड़ों की हकीकत: 231 में से सिर्फ 12 का तुरंत हल

शनिवार को राजातालाब में शिकायतों का अंबार लगा रहा। दिनभर की सुनवाई का लेखा-जोखा कुछ ऐसा रहा:

कुल प्राप्त प्रार्थना पत्र *231 

 मौके पर निस्तारित मामले *12 

लंबित मामले : (1 हफ्ते का समय) * 219 

डीएम ने शेष 219 मामलों को संबंधित विभागों को सौंपते हुए एक सप्ताह की डेडलाइन तय की है। पारदर्शिता और निष्पक्षता को सर्वोपरि रखते हुए जिलाधिकारी ने अधिकारियों को हिदायत दी कि "समयबद्धता" का पालन करना ही होगा।




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