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सोनभद्र में 'वोट चोरी' की बड़ी साजिश? सपा ने कहा- BJP करवा रही विपक्ष के नाम साफ!

by on | 2026-02-06 21:17:11

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सोनभद्र में 'वोट चोरी' की बड़ी साजिश? सपा ने कहा- BJP करवा रही विपक्ष के नाम साफ!


सोनभद्र। लोकतंत्र के सबसे बड़े उत्सव 'चुनाव' से पहले ही उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में सियासी घमासान छिड़ गया है। समाजवादी पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी पर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। सपा नेताओं का दावा है कि भाजपा हार के डर से अब 'वोट चोरी' के गंदे खेल पर उतर आई है। पूर्व विधायक अविनाश कुशवाहा के नेतृत्व में सपाइयों ने उपजिलाधिकारी (SDM) को ज्ञापन सौंपकर इस पूरी साजिश को बेनकाब करने की मांग की है।

 क्या है पूरा मामला? सपा के बड़े आरोप:

सपा नेताओं के मुताबिक, मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) के दौरान भाजपा पदाधिकारी और रसूखदार लोग BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) पर नाजायज दबाव बना रहे हैं। आरोप है कि:

 * फर्जी नाम से शिकायतें: विपक्ष के समर्थकों के नाम कटवाने के लिए पहले से छपे हुए फॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है।

 * जिंदा को बता दिया 'मुर्दा': हद तो तब हो गई जब जीवित मतदाताओं को कागजों पर मृत दिखाकर उनके घरों पर नोटिस भिजवा दिए गए।

 * सत्ता का हंटर: आरोप है कि BLO को डरा-धमकाकर उन पर जबरन नाम काटने का दबाव बनाया जा रहा है।

 "हार के डर से भाजपा की मानसिकता गिर गई" – अविनाश कुशवाहा

सपा के पूर्व विधायक अविनाश कुशवाहा ने दो टूक शब्दों में कहा:

> "महंगाई, भ्रष्टाचार और किसानों के साथ हुए धोखे से जनता का भरोसा भाजपा से उठ चुका है। अब ये लोग निष्पक्ष चुनाव से डर रहे हैं, इसीलिए सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर विपक्ष के वोट कटवा रहे हैं। यह सीधे तौर पर लोकतंत्र की हत्या है।"

 सपा का अल्टीमेटम: "बूथ-बूथ होगा संघर्ष"

समाजवादी पार्टी ने चेतावनी दी है कि वे इस मुद्दे को सिर्फ ज्ञापन तक सीमित नहीं रखेंगे। जिस तरह राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लोकसभा में वोट चोरी के मुद्दे को गरमाया था, ठीक उसी तर्ज पर अब विधानसभा स्तर पर बूथ-बूथ जाकर संघर्ष किया जाएगा। सपा ने मांग की है कि फर्जी सूचना देने वाले भाजपाई गुर्गों पर तत्काल FIR दर्ज की जाए।

 बेबाक का सीधा सवाल:

अगर सत्ता पक्ष को अपने काम पर भरोसा है, तो फिर मतदाता सूची में इस तरह की 'सर्जिकल स्ट्राइक' की जरूरत क्यों पड़ रही है? क्या चुनाव आयोग इन गंभीर शिकायतों पर कोई सख्त एक्शन लेगा या प्रशासन सत्ता के दबाव में मौन रहेगा?




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