ब्रेकिंग न्यूज़
सोमनाथ में श्रद्धा और शक्ति का सैलाब: पीएम मोदी ने डमरू बजाकर और त्रिशूल थामकर किया 'शौर्य यात्रा' का शंखनाद
ताजा खबर ताजा खबर

बेखौफ मशीनें, मौन प्रशासन: क्या साहबों की जेबें गरम कर रहा है भगवा का अवैध खनन?

by on | 2026-01-31 21:02:58

Share: Facebook | Twitter | WhatsApp | LinkedIn Visits: 3230


बेखौफ मशीनें, मौन प्रशासन: क्या साहबों की जेबें गरम कर रहा है भगवा का अवैध खनन?

अजय सिंह
​सोनभद्र। कहने को तो सूबे में 'जीरो टॉलरेंस' की सरकार है, लेकिन सोनभद्र की धरती पर खनन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें न कानून का खौफ है और न ही प्रशासन का डर। ताजा मामला ओबरा तहसील के चोपन क्षेत्र स्थित सोन नदी के भगवा बालू साइड का है, जहाँ विकास के नाम पर विनाश का खेल धड़ल्ले से जारी है।
​मशीनों का शोर और 'साहबों' की चुप्पी
​नियम कहते हैं कि नदी का सीना मशीनों से नहीं चीरा जाएगा, लेकिन भगवा बालू साइड पर प्रतिबंधित लिफ्टिंग मशीनें दिन-रात गरज रही हैं। नदी के गर्भ से बालू निकालने का यह काला खेल खुलेआम चल रहा है। चर्चा तो यहाँ तक है कि खनन और वन विभाग के कुछ 'जिम्मेदार' अधिकारियों ने अपनी आँखों पर नोटों की पट्टी बाँध ली है। क्या इन मशीनों की गूंज साहबों के दफ्तर तक नहीं पहुँच रही, या फिर इस चुप्पी की कीमत वसूली जा चुकी है?
​लीज की आड़ में वन क्षेत्र पर डाका
​शिकायत के मुताबिक, पट्टाधारक केवल आवंटित जमीन तक ही सीमित नहीं है। लालच का आलम यह है कि खनन माफिया अब वन क्षेत्र की सीमाओं को भी लांघ चुके हैं। पर्यावरण के रक्षक कहे जाने वाले विभाग आखिर क्यों मौन हैं? क्या यह मिलीभगत का जीता-जागता प्रमाण नहीं है?
​ओवरलोडिंग और नियमों की धज्जियाँ
​भगवा बालू साइड पर न स्कैनिंग की व्यवस्था है और न ही नियमों का पालन। बिना स्कैनिंग के ओवरलोड ट्रक सड़कों पर काल बनकर दौड़ रहे हैं। उप-खनिज परिहार नियमावली और पर्यावरण संरक्षण के नियमों को रद्दी के भाव बेच दिया गया है। जलीय जीवों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है, लेकिन प्रशासन 'जांच' के नाम पर केवल समय काट रहा है।
​मुख्यमंत्री दरबार तक पहुँचा मामला
​भाजपा किसान मोर्चा के जिला सोशल मीडिया प्रभारी कमलेश पांडेय ने अब इस मामले को सीधे मुख्यमंत्री के IGRS (शिकायत संख्या: 40020026001581) पर दर्ज कराया है। शिकायत में स्पष्ट रूप से स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग की गई है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
​बेबाक टिप्पणी:
सोनभद्र की प्राकृतिक संपदा को लूटना कुछ लोगों का पेशा बन गया है। अगर समय रहते इन सफेदपोशों और माफियाओं के गठजोड़ को नहीं तोड़ा गया, तो आने वाली पीढ़ियों को केवल रेत और वीरान पहाड़ ही विरासत में मिलेंगे।



Search
Recent News
Top Trending
Most Popular

Leave a Comment