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दहेज लोभियों को कोर्ट का कड़ा संदेश: बहू की हत्या के आरोपी पति, सास और ससुर को 10-10 साल की जेल

by on | 2026-01-28 21:30:42

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दहेज लोभियों को कोर्ट का कड़ा संदेश: बहू की हत्या के आरोपी पति, सास और ससुर को 10-10 साल की जेल


​सोनभद्र (उत्तर प्रदेश): न्याय की चक्की भले ही धीरे चलती है, लेकिन जब चलती है तो दोषियों का बचना नामुमकिन होता है। करीब साढ़े 6 साल पहले दहेज की आग में झोंकी गई किरन सोनकर उर्फ रेनू को आखिरकार न्याय मिल गया है। सोनभद्र की अदालत ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए मृतका के पति, सास और ससुर को कड़ी सजा से दंडित किया है।
अदालत का सख्त फैसला
​अपर सत्र न्यायाधीश (FTC/CAW) अर्चना रानी की अदालत ने बुधवार को मामले की गंभीरता को देखते हुए तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया। कोर्ट ने निम्न सजा सुनाई:
​कारावास: पति धरम सोनकर, सास लक्षन देवी और ससुर मिश्रीलाल को 10-10 वर्ष का कठोर कारावास।
​अर्थदंड: प्रत्येक दोषी पर 35-35 हजार रुपये का जुर्माना।
​अतिरिक्त सजा: जुर्माना न भरने की स्थिति में 6-6 माह की अतिरिक्त कैद काटनी होगी।
​नोट: दोषियों द्वारा जेल में पहले बिताई गई अवधि को मुख्य सजा में शामिल किया जाएगा।
​ क्या था पूरा मामला?
​यह खौफनाक वारदात 20 मई 2019 की है। चंदौली जिले के चकिया निवासी श्यामलाल सोनकर ने अपनी बेटी किरन की शादी 2015 में चुर्क (सोनभद्र) निवासी धरम सोनकर के साथ की थी।
​प्रताड़ना की इंतहा:
शिकायत के मुताबिक, शादी के कुछ समय बाद ही ससुराल वाले 'चार पहिया गाड़ी' की मांग को लेकर किरन को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने लगे। कई बार पंचायत और सुलह-समझौते हुए, लेकिन लालच की भूख शांत नहीं हुई।
​मौत की खबर और न्याय की लड़ाई:
मई 2019 में पिता को सूचना मिली कि उनकी बेटी 'सीरियस' है, लेकिन जब वे पहुंचे तो किरन की लाश पड़ी थी। शरीर पर चोट के निशान और पैर जलने के जख्म साफ गवाही दे रहे थे कि उसके साथ बर्बरता की गई है। रॉबर्ट्सगंज कोतवाली में दर्ज एफआईआर के बाद पुलिस ने पुख्ता सबूत जुटाए और चार्जशीट दाखिल की।
अभियोजन की दलील
​सरकारी वकील सत्यप्रकाश त्रिपाठी ने अदालत में मजबूती से पक्ष रखते हुए गवाहों और साक्ष्यों को पेश किया। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद यह साबित हुआ कि किरन की मौत सामान्य नहीं बल्कि दहेज के लिए की गई हत्या थी।
बेबाक 24 का नजरिया:  समाज में 'गाड़ी और सोने' के लिए बेटियों की बलि चढ़ाने वाले इन दरिंदों के लिए यह सजा एक सबक है। कानून के हाथ लंबे होते हैं, और आज सोनभद्र कोर्ट ने यह साबित कर दिया।



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