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शंखों की गूंज और 'ब्राह्मण कार्ड' के साथ सपा का चुनावी शंखनाद

by on | 2026-01-27 21:02:14

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 शंखों की गूंज और 'ब्राह्मण कार्ड' के साथ सपा का चुनावी शंखनाद

सोनभद्र। राजनीति में जब नारों से काम नहीं चलता, तो प्रतीकों का सहारा लिया जाता है। राबर्ट्सगंज में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कुछ ऐसा ही किया। मुद्दा वही पुराना है—महंगाई और बेरोजगारी—लेकिन अंदाज बिल्कुल नया। स्वर्ण जयंती चौक पर सपा कार्यकर्ताओं ने एक साथ 27 शंख बजाकर न केवल शोर मचाया, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा की 'विदाई' का संकल्प भी लिया।

टीका, शंख और हिंदुत्व की नई बिसात

सपा कार्यकर्ताओं का यह प्रदर्शन केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं था। कार्यकर्ताओं ने माथे पर तिलक लगाकर और शंख फूंककर भाजपा के कोर वोट बैंक (ब्राह्मणों और संतों) में सेंध लगाने की पुरजोर कोशिश की। सपा नेताओं का सीधा आरोप है कि भाजपा अब "सनातन विरोधी" हो चुकी है।

सरकार पर तीखे प्रहार: प्रमुख बिंदु

सपा जिला सचिव प्रमोद यादव और मनीष त्रिपाठी ने सरकार को घेरते हुए कई गंभीर आरोप लगाए:

 * संतों का अपमान: सपा नेताओं ने दावा किया कि माघ मेले में साधु-संतों का अपमान किया गया, जो भाजपा के असली चेहरे को उजागर करता है।

 * प्रयागराज की घटना: प्रयागराज में बटुकों (छोटे ब्राह्मण शिष्यों) की पिटाई को इतिहास का 'काला अध्याय' बताया गया।

 * बांटो और राज करो: सरकार पर आरोप लगा कि पहले हिंदू-मुसलमान को लड़ाया गया और अब 'हिंदू को हिंदू से' (जातिवार) लड़ाकर सत्ता हथियाने का खेल चल रहा है।

 * विफलता का जाल: महंगाई, बेरोजगारी और महिला अपराध को लेकर सरकार को पूरी तरह 'फेल' करार दिया गया।

 "यह सरकार समाज में जहर घोल रही है। यूजीसी कानून हो या जाति को जाति से लड़ाना, इनका एकमात्र मकसद सत्ता में बने रहना है। ऐसी सरकार को सत्ता में रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।"

 — प्रमोद यादव, जिला सचिव (सपा)

 

2027 की तैयारी या महज दिखावा?

इस विरोध प्रदर्शन में सुरेश अग्रहरी, कमलेश यादव और गोपाल गुप्ता जैसे स्थानीय नेताओं की मौजूदगी रही। सवाल यह है कि क्या शंख बजाने और तिलक लगाने से सपा उस ब्राह्मण समाज को अपने पाले में ला पाएगी, जिसे वह भाजपा का आधार मानती रही है? खैर, 27 शंखों की ये गूंज 2027 तक कितनी प्रभावी रहेगी, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन सोनभद्र की सड़कों पर सपा ने चुनावी बिसात जरूर बिछा दी है।

बेबाक राय: मुद्दों की राजनीति जब धार्मिक प्रतीकों का चोला पहनती है, तो समझ लीजिए कि चुनाव करीब हैं। भाजपा को 'सनातन विरोधी' बताकर सपा उसी के हथियार से उसे मात देने की तैयारी में दिख रही है।




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