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सवर्णों के सब्र का बांध टूटा! आशुतोष कुमार की ललकार— "काले कानून वापस लो या सवर्णिस्तान की मांग के लिए तैयार रहो"

by on | 2026-01-27 20:48:36

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सवर्णों के सब्र का बांध टूटा! आशुतोष कुमार की ललकार— "काले कानून वापस लो या सवर्णिस्तान की मांग के लिए तैयार रहो"

पटना/दिल्ली: बिहार के चर्चित भूमिहार ब्राह्मण नेता और भाजपा कार्यकर्ता आशुतोष कुमार के एक हालिया फेसबुक पोस्ट ने सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया है। आशुतोष कुमार ने सीधे तौर पर अपनी ही सरकार की नीतियों को कटघरे में खड़ा करते हुए सवर्ण समाज की अनदेखी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सवर्णों के खिलाफ बन रहे 'काले कानूनों' पर रोक नहीं लगी, तो देश 'गृह युद्ध' की ओर बढ़ सकता है।

"संसद में बैठे सवर्ण सांसद नपुंसक"

​आशुतोष कुमार ने अपने पोस्ट में संसद में बैठे सवर्ण सांसदों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने लिखा कि जब SC/ST Act पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलटा गया और अब जब UGC में संशोधनों के जरिए सवर्ण छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है, तब संसद में बैठे सैकड़ों सवर्ण सांसद 'नपुंसकों' की तरह मौन रहकर तालियां बजा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे सांसदों का क्या फायदा जो अपने ही समाज का गला घोंटे जाने पर हस्ताक्षर कर देते हैं?

धर्मगुरुओं और प्रवक्ताओं पर भी साधा निशाना

​इस आक्रोश से कोई अछूता नहीं रहा। आशुतोष ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य और बागेश्वर बाबा (धीरेंद्र शास्त्री) पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा:

​"जो खुद को पीएम का दोस्त बताते हैं या हिंदू राष्ट्र की बात करते हैं, सवर्णों के मुद्दे पर उनका ज्ञान 'घास चरने' चला गया है। क्या सवर्णों को मिटाकर हिंदू राष्ट्र बनेगा?"


​यही नहीं, उन्होंने भाजपा के प्रखर प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी की चुप्पी पर भी हैरानी जताई है।

"सवर्णिस्तान" की मांग और गृह युद्ध की चेतावनी

​पोस्ट का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा वह है जहाँ आशुतोष कुमार ने 'सवर्णिस्तान' शब्द का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 16 वर्ष की उम्र में सेना में भर्ती होने वाला उनके जैसा देशभक्त भी आज सरकार की गलत नीतियों से तंग आ चुका है। उन्होंने एलान किया है कि वे एक फॉर्मेट ड्राफ्ट कर रहे हैं, जिसे देश के सवर्ण प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को भेजेंगे। इस ड्राफ्ट में दो ही विकल्प होंगे:

  1. ​सवर्णों के खिलाफ बने 'काले कानून' वापस हों।
  2. ​या फिर सवर्णों के लिए अलग देश 'सवर्णिस्तान' की मांग को स्वीकार किया जाए।

त्याग का हवाला और दोयम दर्जे का नागरिक

​आशुतोष कुमार ने याद दिलाया कि सवर्ण समाज ने ही दलितों को बसाने के लिए लाखों एकड़ जमीनें दान दीं और मुगलों से धर्म की रक्षा की। लेकिन आज वोट बैंक की राजनीति के कारण उसी समाज को अपने ही देश में 'दोयम दर्जे का नागरिक' बना दिया गया है।

बेबाक टिप्पणी:

आशुतोष कुमार का यह बयान केवल एक फेसबुक पोस्ट नहीं, बल्कि सवर्ण राजनीति के भीतर सुलग रही उस चिंगारी का प्रमाण है जो अब ज्वाला बनने को बेताब है। अपनी ही सरकार के खिलाफ बगावती तेवर दिखाने वाले आशुतोष ने अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में डाल दी है।



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