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कचहरी में गर्जना: BHU से कलेक्ट्रेट तक UGC-2026 के खिलाफ सवर्णों का 'हल्ला बोल', वाराणसी की सड़कों पर उतरा जनसैलाब!

by on | 2026-01-27 17:10:24

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कचहरी में गर्जना: BHU से कलेक्ट्रेट तक UGC-2026 के खिलाफ सवर्णों का 'हल्ला बोल', वाराणसी की सड़कों पर उतरा जनसैलाब!


वाराणसी |  शिक्षा जगत में प्रस्तावित UGC-2026 के खिलाफ अब बनारस की गलियों से क्रांति का बिगुल फूँक दिया गया है। मंगलवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के छात्र अधिष्ठाता कार्यालय से लेकर कलेक्ट्रेट के दरवाजों तक सिर्फ और सिर्फ आक्रोश का धुआं नजर आया। सवर्ण समाज के छात्रों ने साफ कर दिया है कि वे हक की लड़ाई में पीछे हटने वाले नहीं हैं।

BHU से कलेक्ट्रेट: जब नारों से थर्रा उठी शिव की नगरी

प्रदर्शन की शुरुआत BHU परिसर से हुई, जो धीरे-धीरे एक विशाल जनसमूह में तब्दील हो गया। हाथों में पोस्टर, जुबां पर सरकार विरोधी नारे और आंखों में अपने भविष्य को बचाने की जिद लिए सैकड़ों छात्र दैत्रा वीर मंदिर और सर्किट हाउस होते हुए कलेक्ट्रेट गेट पहुंचे। सड़क पर उतरे इस हुजूम ने प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए।

"शिक्षा का गला घोंटना बंद करो" – कृष्णानंद पांडेय का तीखा वार

आंदोलन की कमान संभाल रहे छात्र नेता कृष्णानंद पांडेय ने हुंकार भरते हुए कहा: "UGC-2026 के ये नियम नहीं, बल्कि सवर्ण मेधावियों के भविष्य पर सीधा हमला हैं। शिक्षा में समानता की बात करने वाली सरकार आखिर क्यों ऐसे नियम ला रही है जिससे असमानता की खाई और चौड़ी हो जाए? हम झुकेंगे नहीं, हम रुकेंगे नहीं।"


क्यों भड़का है सवर्ण समाज?

प्रदर्शनकारियों का सीधा आरोप है कि UGC के प्रस्तावित बदलाव 'प्रतिभा' की बलि चढ़ाकर शैक्षणिक अवसरों को सीमित करने की साजिश हैं। छात्रों के मुताबिक:

 * अवसरों की कटौती: नए नियमों से सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के रास्ते कठिन हो जाएंगे।

 * नीतिगत भेदभाव: छात्रों ने इसे सवर्णों के साथ अन्याय करार दिया है।

 * भविष्य पर संकट: शोध और प्राध्यापकी की राह में आने वाली बाधाओं को लेकर गहरा डर व्याप्त है।

आंदोलन की अगली राह: थमने वाला नहीं यह सैलाब!

कचहरी परिसर के सामने घंटों चले इस धरने ने स्पष्ट कर दिया है कि वाराणसी सिर्फ शुरुआत है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इन 'काले नियमों' में संशोधन नहीं किया, तो यह चिंगारी काशी से निकलकर पूरे देश में दावानल बन जाएगी।

बेबाक राय: जब छात्र सड़कों पर उतरता है, तो सत्ता के सिंहासन डोलने लगते हैं। क्या सरकार इस आक्रोश को सुनकर नियमों पर पुनर्विचार करेगी या फिर यह टकराव और भीषण रूप लेगा?




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