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बरेली में सिस्टम का 'कॉकटेल'! सिटी मजिस्ट्रेट ने खोला मोर्चा, डीएम पर बंधक बनाने का संगीन आरोप

by on | 2026-01-27 08:53:10

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बरेली में सिस्टम का 'कॉकटेल'! सिटी मजिस्ट्रेट ने खोला मोर्चा, डीएम पर बंधक बनाने का संगीन आरोप

बरेली। यूपी की नौकरशाही में आज वो भूचाल आया है जिसकी गूंज लखनऊ के गलियारों तक सुनाई दे रही है। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपनी ही सरकार और सिस्टम के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया है। मामला सिर्फ इस्तीफे तक नहीं थमा, बल्कि बात अब 'बंधक' बनाने, 'गाली-गलौज' और 'जान के खतरे' तक पहुँच गई है।

"साला पंडित पागल हो गया है!" – वो एक फोन कॉल और हंगामा

​अलंकार अग्निहोत्री का सबसे सनसनीखेज आरोप डीएम आवास के भीतर के ड्रामे को लेकर है। अग्निहोत्री का दावा है कि जब वे इस्तीफा देने के बाद डीएम अविनाश सिंह से मिलने पहुंचे, तो उन्हें 45 मिनट तक बंधक बना लिया गया।

​अग्निहोत्री ने कैमरे के सामने बेबाकी से कहा:

"डीएम साहब के पास लखनऊ से किसी बड़े साहब का फोन आया। फोन पर कहा गया— 'साला पंडित पागल हो गया है, इसे रात भर यहीं रखो।' मुझे डराया गया, धमकाया गया और अभद्र व्यवहार किया गया। मुझे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है!"


2 घंटे का 'अल्टीमेटम' और रात का सन्नाटा

​सिस्टम की बेरुखी यहीं नहीं रुकी। आरोप है कि सिटी मजिस्ट्रेट को 2 घंटे के भीतर सरकारी आवास खाली करने का फरमान सुना दिया गया। रात के अंधेरे में अपना सामान समेटते हुए अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि उन्हें डर है कि अगर वे वहां से नहीं निकले, तो उन्हें फिर से बंधक बनाया जा सकता है।

इस्तीफे के पीछे का 'धार्मिक और सामाजिक' एंगल

​2019 बैच के पीसीएस अधिकारी ने अपने 5 पन्नों के इस्तीफे में जो लिखा, उसने नई बहस छेड़ दी है:

  • UGC नियम 2026: अग्निहोत्री ने नए यूजीसी नियमों को 'काला कानून' और 'सवर्ण विरोधी' करार दिया है।
  • शंकराचार्य का अपमान: प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ हुई बदसलूकी और 'शिखा' खींचे जाने को उन्होंने अपनी अंतरात्मा पर चोट बताया।

डीएम का पलटवार: "सब अफवाह है"

​इधर, बरेली के डीएम अविनाश सिंह इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि अग्निहोत्री को बंधक नहीं बनाया गया, बल्कि एसएसपी और एडीएम की मौजूदगी में उन्हें समझाने-बुझाने की कोशिश की जा रही थी। डीएम ने आरोपों को 'भ्रामक' और 'बेबुनियाद' करार दिया है।

मैदान में उतरा ब्राह्मण समाज

​यह मामला अब प्रशासनिक कम और जातीय-धार्मिक ज्यादा होता जा रहा है। सिटी मजिस्ट्रेट के समर्थन में ब्राह्मण समाज के लोग सड़क पर उतर आए हैं। नारेबाजी हो रही है और माहौल तनावपूर्ण है।

बेबाक राय: एक पीसीएस अधिकारी का इस तरह सरेआम सिस्टम पर आरोप लगाना और बंधक बनाए जाने की बात कहना बताता है कि 'ऑल इज नॉट वेल'। क्या यह वाकई अंतरात्मा की आवाज है या फिर नौकरशाही के भीतर चल रही किसी गहरी गुटबाजी का नतीजा?



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