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बक्सर में भू-माफियाओं का 'Game Over'? छड़ माफिया धिरेंद्र पांडेय और प्रदीप राय गैंग में मची खलबली!

by on | 2026-01-25 20:38:09

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बक्सर में भू-माफियाओं का 'Game Over'? छड़ माफिया धिरेंद्र पांडेय और प्रदीप राय गैंग में मची खलबली!

बक्सर। शहर के ज्योति चौक पर आज सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं हुई, बल्कि भू-माफियाओं के ताबूत में आखिरी कील ठोकने का संकल्प लिया गया। भाकपा माले के पूर्व विधायक डॉ. अजित कुशवाहा और कांग्रेस के पूर्व विधायक मुन्ना तिवारी ने एक साथ हुंकार भरते हुए साफ कर दिया है कि बक्सर की जमीन पर अब लुटेरों का राज नहीं चलेगा। इस साझा हमले ने जहाँ प्रदीप राय गैंग के सिंडिकेट की नींद उड़ा दी है, वहीं डरे-सहमे पीड़ितों को अपनी जमीन वापस पाने की नई उम्मीद दी है।

ज्योति चौक से माफियाराज के अंत का ऐलान

डॉ. अजित कुशवाहा ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि जनता की लूटी गई एक-एक इंच जमीन का हिसाब लिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सफेदपोशों की गोद में बैठकर भू-माफिया गरीबों और किसानों का खून चूस रहे हैं।

 * बड़ा दावा: अब माफियाओं का डर खत्म हो रहा है। पीड़ित जनता खुद ढाल बनकर सामने आ रही है, जो इस साम्राज्य के ढहने का पहला संकेत है।

 * सरकार की नीयत पर सवाल: नेताओं ने पूछा कि नीतीश सरकार का 'सुशासन' बक्सर के इन माफियाओं के सामने नतमस्तक क्यों है?

धिरेंद्र पांडेय: 'लोहे' का काला धंधा और जमीन पर 'कब्जा'

बक्सर गोलम्बर और मेले की जमीन को लेकर एक सनसनीखेज मामला सुर्खियों में है। सीधे तौर पर धिरेंद्र पांडेय का नाम लेकर लोग प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर रहे है। बता दें कि धिरेंद्र पांडेय का 'छड़ माफिया' के रूप में लोहे का काला कारोबार उत्तर प्रदेश की सीमाओं तक फैला हुआ है।

 बेबाक आरोप: आरोप है कि पिछले एक साल से यह कथित छड़ माफिया, प्रशासन की नाक के नीचे किसान की रैयती (निजी) मेले वाली जमीन को हड़पने का खेल खेल रहा है। ताज्जुब की बात यह है कि प्रशासन को 'सब कुछ' पता है, फिर भी किसान की जमीन सरकारी फाइलों मे है और मौके से 'लापता' बनी हुई है।


 बेबाक सवाल: क्या सो रहा है प्रशासन?

 * आखिर किसके दबाव में बक्सर प्रशासन ने आँखों पर पट्टी बाँध रखी है?

 * क्या 'खाकी' और 'खादी' का ऐसा गठजोड़ है जिसने माफियाओं को खुलेआम लूट की छूट दे रखी है?

 * गोलम्बर की कीमती जमीन पर जब खुलेआम कब्जा हो रहा है, तो बुलडोजर का रुख उधर क्यों नहीं मुड़ता? क्या लोहे के व्यापारियों का रसूख कानून से ऊपर है?

खलबली और कार्रवाई की आहट

ज्योति चौक पर हुए इस खुलासे के बाद कथित 'प्रदीप राय गैंग' और धिरेंद्र पांडेय के गुर्गों में बेचैनी का माहौल है। जो लोग अब तक चुपचाप जुल्म सह रहे थे, वे भी अब अपनी शिकायतों के साथ बाहर आने लगे हैं। माले और कांग्रेस के नेताओं के इस साझा मंच ने बक्सर के इस 'अंडरग्राउंड' खेल को सड़क के बीचों-बीच नंगा कर दिया है।

निष्कर्ष: अब गेंद प्रशासन के पाले में है। क्या बक्सर का सिस्टम इन बाहुबली भू-माफियाओं और लोहे के काले कारोबारियों पर शिकंजा कसेगा, या फिर 'सुशासन' का दावा इन रसूखदारों की तिजोरियों में ही दफन होकर रह जाएगा?





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