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भू-माफियाओं का 'नंगा नाच', सो रहा प्रशासन: डॉ. धर्मवीर तिवारी ने खोला मोर्चा!

by on | 2026-01-25 00:26:11

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 भू-माफियाओं का 'नंगा नाच', सो रहा प्रशासन: डॉ. धर्मवीर तिवारी ने खोला मोर्चा!

सोनभद्र। जिले में भू-माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब सरकारी सिस्टम और नियम-कानून कागजों तक सिमट कर रह गए हैं। जिला मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज से लेकर ओबरा और घोरावल तक, अवैध प्लाटिंग का धंधा किसी महामारी की तरह फैल चुका है। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष डॉक्टर धर्मवीर तिवारी ने इस 'काले खेल' का पर्दाफाश करते हुए सीधे तौर पर प्रशासनिक मिलीभगत का आरोप जड़ा है।

साहब को 'सबूत' चाहिए, जबकि आँखों के सामने उजड़ रहे नियम!

डॉ. तिवारी ने तंज कसते हुए कहा कि जब तहसील के आला अधिकारियों को अवैध प्लाटिंग की सूचना दी जाती है, तो तहसीलदार और एसडीएम बड़ी मासूमियत से पूछते हैं— "कोई मामला हो तो बताइए।" जबकि हकीकत यह है कि रॉबर्ट्सगंज और ओबरा की सड़कों पर निकलते ही अवैध प्लाटिंग के बोर्ड और कटते प्लॉट चीख-चीख कर अपनी कहानी बयां कर रहे हैं। सर्किट हाउस जैसे वीआईपी इलाके के पास भी बिना परमिशन के काम धड़ल्ले से जारी है।

भ्रष्टाचार का त्रिकोण: तहसीलदार, कानूनगो और लेखपाल!

पूर्व जिलाध्यक्ष ने सीधा हमला बोलते हुए कहा कि रॉबर्ट्सगंज तहसील में भू-माफियाओं को तहसील के अधिकारियों का 'खुला संरक्षण' प्राप्त है। लेखपाल और कानूनगो माफियाओं के लिए बिचौलिए का काम कर रहे हैं। गरीब किसानों की जमीनों को डरा-धमका कर कौड़ियों के दाम पर बिकवाया जा रहा है और बिना नक्शा पास कराए कॉलोनियां काटकर राजस्व को करोड़ों की चपत लगाई जा रही है।

बड़ी मांग: 10 साल के 'खाकी' और 'खादी' के गठजोड़ की हो SIT जांच!

मामले में नया मोड़ देते हुए डॉ. तिवारी ने भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी होने का दावा किया है। उन्होंने मांग की है कि:

 * पिछले 10 वर्षों के दौरान सोनभद्र के चोपन, रॉबर्ट्सगंज, ओबरा और अनपरा में तैनात रहे थानेदारों की नामी और बेनामी संपत्ति की SIT जांच हो।

 * इन थानेदारों के खिलाफ चल रही विभागीय जांचों और उनमें हुए 'रहस्यमयी' फैसलों की फाइलें फिर से खोली जाएं।

 * यदि ईमानदारी से जांच हुई, तो माफिया-अधिकारी गठजोड़ का सारा कच्चा चिट्ठा जनता के सामने आ जाएगा।

दो साल से एक ही कुर्सी पर जमे एसडीएम, उठे सवाल!

 बेबाक की खास पड़ताल में यह भी सामने आया कि ओबरा एसडीएम पिछले दो सालों से एक ही जगह तैनात हैं। डॉ. तिवारी ने सवाल उठाया है कि लंबे समय तक एक ही तहसील में टिके रहने के कारण अधिकारियों और भू-माफियाओं के बीच 'अवैध गठजोड़' मजबूत हो गया है।

मांग: संपत्ति की हो जांच, गिरें भ्रष्ट अधिकारियों के विकेट!

डॉ. तिवारी ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि तत्काल एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स को सक्रिय कर बुलडोजर कार्रवाई की जाए। साथ ही, उन अधिकारियों की निजी संपत्ति की जांच हो जो सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति को पलीता लगा रहे हैं।

 बेबाक टिप्पणी: क्या मुख्यमंत्री के आदेश सोनभद्र की सीमाओं पर आकर दम तोड़ देते हैं? क्या सत्ताधारी दल के ही पूर्व जिलाध्यक्ष की इस चेतावनी के बाद प्रशासन की नींद टूटेगी, या फिर भ्रष्टाचार का यह खेल ऐसे ही 'बेबाक' जारी रहेगा?




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