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इसराइली राजदूत बोले- ईरान पर हमले का फैसला अमेरिका का था

by on | 2026-11-05 12:28:21

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इसराइली राजदूत बोले- ईरान पर हमले का फैसला अमेरिका का था

तेल अवीव | बेबाक24 न्यूज़

अमेरिका के मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की करारी हार के बाद ईरान युद्ध को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है। संयुक्त राष्ट्र में इसराइल के राजदूत डैनी डैनन ने कहा है कि ईरान पर हमला करने का फैसला अमेरिका का था, इसराइल का नहीं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसराइल ने अमेरिकी फैसले का समर्थन किया था और उसे यह कदम सही लगा था।

डैनन ने अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार

चुनावी नतीजे सामने आने के बाद डैनी डैनन ने कहा, "ईरान पर हमला करने का फैसला अमेरिका का था। यह हमारा फैसला नहीं था।"

उन्होंने साथ ही कहा कि इसराइल ने युद्ध का समर्थन किया था और उसे लगता था कि यह सही निर्णय है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद ईरान युद्ध को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों पर सवाल उठ रहे हैं।

अब्दुल अल-सैयद पर भी की टिप्पणी

इसराइली राजदूत ने सीनेट चुनाव जीतने वाले डेमोक्रेटिक नेता अब्दुल अल-सैयद को लेकर भी विवादित टिप्पणी की। एक समाचार चैनल को दिए साक्षात्कार में उन्होंने आरोप लगाया कि अल-सैयद इसराइल का विरोध करेंगे, भले ही गाजा में युद्धविराम हो जाए।

डैनन ने उन्हें यहूदी-विरोधी बताते हुए कहा कि उनके साथ काम करना काफी मुश्किल होगा। यह डैनन का राजनीतिक आरोप है।

डेमोक्रेटिक पार्टी को दी मध्यमार्ग अपनाने की सलाह

डैनन ने आगे कहा कि डेमोक्रेटिक पार्टी को समझना होगा कि नेतृत्व के लिए उसे चरमपंथी रुख के बजाय मध्यमार्ग अपनाना चाहिए।

उनकी यह टिप्पणी अमेरिकी राजनीति में इसराइल के प्रति डेमोक्रेटिक नेताओं के रुख को लेकर चल रही बहस के बीच आई है।

दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक पार्टी को बढ़त

बुधवार को सामने आए चुनावी नतीजों के मुताबिक, डेमोक्रेटिक पार्टी ने सीनेट और प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल किया है। इससे अमेरिकी संसद में सत्ता का संतुलन बदल गया है और ट्रंप प्रशासन के फैसलों पर विपक्ष की निगरानी तथा राजनीतिक चुनौती बढ़ने की संभावना है।

बेबाक24 टेक

डैनी डैनन का बयान ईरान युद्ध की जिम्मेदारी को लेकर अमेरिका और इसराइल के बीच राजनीतिक दूरी का संकेत दे सकता है। वहीं, डेमोक्रेटिक पार्टी की चुनावी सफलता के बाद इसराइल के प्रति अमेरिकी नीति पर भी नई बहस शुरू हो सकती है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिकी संसद में बदला हुआ राजनीतिक समीकरण वॉशिंगटन और तेल अवीव के संबंधों को किस दिशा में ले जाता है।



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