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चुनावी नतीजों का बाजार पर असर, कच्चा तेल 100 डॉलर से नीचे

by on | 2026-11-05 12:28:07

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चुनावी नतीजों का बाजार पर असर, कच्चा तेल 100 डॉलर से नीचे

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

अमेरिका के मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत और रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद वैश्विक बाजारों में तेजी देखने को मिली। कच्चे तेल की कीमतों में 8 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे पहुंच गया। दूसरी ओर, अमेरिका और भारत के शेयर बाजारों में भी जोरदार उछाल दर्ज किया गया।

ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा

बुधवार दोपहर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का प्रमुख मानक ब्रेंट क्रूड 8 प्रतिशत से अधिक टूटकर करीब 95 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। यह पिछले 2 महीनों में इसका सबसे निचला स्तर था।

तेल की कीमतों में यह गिरावट अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ युद्ध को रिपब्लिकन पार्टी की चुनावी हार की प्रमुख वजह बताया था।

युद्ध का खतरा घटने की उम्मीद से निवेशकों को राहत

वेंस के बयान के बाद निवेशकों ने मध्य पूर्व में संघर्ष बढ़ने की आशंका का नए सिरे से आकलन किया। बाजार में यह उम्मीद बनी कि अमेरिकी प्रशासन युद्ध समाप्त करने, महंगाई और जीवन-यापन की लागत पर ध्यान देने तथा इसराइल के साथ संबंधों की समीक्षा करने की दिशा में कदम उठा सकता है।

मध्य पूर्व में तनाव कम होने की संभावना को बाजार ने सकारात्मक संकेत के रूप में लिया। इसका असर कच्चे तेल की कीमतों के साथ शेयर बाजारों पर भी दिखाई दिया।

अमेरिकी शेयर बाजार में भी तेजी

बुधवार को अमेरिका के प्रमुख शेयर सूचकांकों में बढ़त दर्ज की गई।

  • डाउ जोन्स औद्योगिक सूचकांक में 3 प्रतिशत की तेजी आई।

  • एसएंडपी 500 में 1.6 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई।

  • नैस्डैक कंपोजिट 1.4 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ।

भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स 1,388 अंक चढ़ा

अमेरिकी चुनावी नतीजों और वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा। बुधवार को सेंसेक्स 1,388.43 अंक यानी 1.8 प्रतिशत उछल गया।

वहीं, निफ्टी में 382.15 अंकों यानी 1.59 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

बेबाक24 टेक

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए राहत का संकेत हो सकती है। इससे आयात खर्च और महंगाई के दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें केवल अमेरिकी चुनावी नतीजों पर निर्भर नहीं करतीं। मध्य पूर्व की स्थिति, तेल की आपूर्ति और वैश्विक मांग भी आगे कीमतों की दिशा तय करेंगे।



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