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रिलीज से पहले विवादों में घिरी 'रामायण', रणबीर-साई पल्लवी पर उठे सवाल

by on | 2026-11-05 12:15:43

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रिलीज से पहले विवादों में घिरी 'रामायण', रणबीर-साई पल्लवी पर उठे सवाल

मुंबई | बेबाक24 न्यूज़

निर्देशक नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'रामायण: राइज ऑफ ए लीजेंड' 5 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी माता सीता और यश रावण की भूमिका में नजर आ रहे हैं। फिल्म में सनी देओल हनुमान और रवि दुबे लक्ष्मण बने हैं। निर्माता कंपनी प्राइम फोकस स्टूडियोज के अनुसार, फिल्म हिंदी सहित 6 भाषाओं में प्रदर्शित हो रही है।

हालांकि, बड़े पर्दे तक पहुंचने से पहले फिल्म को कई विवादों और सवालों का सामना करना पड़ा। संगीत, वेशभूषा, दृश्य प्रभाव, कलाकारों की भूमिका और पुराने बयानों से लेकर फिल्म के अधिकारों तक का मामला चर्चा में रहा। आइए जानते हैं इन विवादों की पूरी कहानी।

1. फिल्म के अधिकारों पर अदालत में विवाद

फिल्म की रिलीज से ठीक पहले इसके अधिकारों को लेकर कानूनी विवाद सामने आया। बॉम्बे हाई कोर्ट ने 3 नवंबर 2026 के आदेश में प्रोजेक्ट रामायण से जुड़े अधिकारों और एक समझौते की शर्तों पर विचार किया।

मई 2024 में अल्लू मंटेना मीडिया वेंचर्स एलएलपी ने सार्वजनिक सूचना जारी कर दावा किया था कि फिल्म की पटकथा और दूसरी सामग्री के अधिकार उसके पास हैं। कंपनी का आरोप था कि तय भुगतान नहीं होने के कारण प्राइम फोकस टेक्नोलॉजीज को अधिकार देने वाला समझौता प्रभावी नहीं हुआ।

हालांकि, अदालत के आदेश में 19 अप्रैल 2024 के समझौते का उल्लेख है, जिसके तहत प्राइम फोकस टेक्नोलॉजीज ने अल्लू मंटेना मीडिया वेंचर्स से प्रोजेक्ट रामायण के अधिकार हासिल किए थे।

इसी मामले में अदालत ने एक शर्त का भी उल्लेख किया, जिसके अनुसार फैंटम स्टूडियोज सहित संबंधित पक्षों को दिवाली 2027 तक राम, सीता, लक्ष्मण, रावण या हनुमान को मुख्य किरदार बनाकर फिल्म अथवा अन्य सामग्री तैयार करने से रोका गया था। फैंटम स्टूडियोज ने इस शर्त से अंतरिम राहत मांगी, लेकिन अदालत ने अनुरोध स्वीकार नहीं किया।

2. पाइरेसी रोकने के लिए अदालत का आदेश

2 नवंबर को बॉम्बे हाई कोर्ट ने फिल्म की बिना अनुमति रिकॉर्डिंग, अपलोडिंग और इंटरनेट पर प्रसारण रोकने के लिए अंतरिम आदेश दिया।

गॉडपावर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड ने अदालत में दावा किया था कि उसके पास फिल्म के प्रतिलिप्याधिकार और इस्तेमाल से जुड़े अधिकार हैं। कंपनी के अनुसार, विशेष कार्यक्रमों में दिखाए गए फिल्म के दृश्य पहले ही बिना अनुमति रिकॉर्ड करके इंटरनेट पर साझा किए जा चुके थे।

अदालत ने इंटरनेट सेवा प्रदाताओं और ऑनलाइन मंचों को ऐसे लिंक की जानकारी मिलने पर उन्हें हटाने या उन तक पहुंच रोकने का निर्देश दिया।

यह फिल्म के कथानक या निर्माण के खिलाफ कोई विवाद नहीं था, बल्कि निर्माताओं की ओर से फिल्म को चोरी से बचाने के लिए उठाया गया कानूनी कदम था।

3. 'मंगल रंग' के संगीत पर उठे सवाल

25 अक्टूबर को फिल्म का गीत 'मंगल रंग' जारी हुआ। एआर रहमान के संगीत से सजे हिंदी संस्करण को अरिजीत सिंह और श्रेया घोषाल ने आवाज दी है। फिल्म के संगीत से एआर रहमान के साथ हैंस जिमर भी जुड़े हैं।

गीत सामने आने के बाद सामाजिक माध्यमों पर कुछ लोगों ने इसकी धुन को कव्वाली जैसा बताया। कुछ श्रोताओं ने सवाल उठाया कि राम और सीता की कहानी पर आधारित फिल्म में इस तरह का संगीत कितना उपयुक्त है। कुछ लोगों ने इसकी तुलना रहमान के पुराने लोकप्रिय गीतों से भी की।

हालांकि, गीत को कव्वाली बताना कुछ श्रोताओं की व्यक्तिगत राय थी। इसे संगीत की आधिकारिक शैली का निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।

4. रणबीर कपूर की जुबान फिसलने पर विवाद

20 अक्टूबर को कोलकाता में दशहरे से जुड़े एक कार्यक्रम के दौरान रणबीर कपूर अच्छाई और सच्चाई की जीत की बात कर रहे थे। इसी दौरान उनके मुंह से 'जीत' की जगह 'अंत' शब्द निकल गया।

इसका वीडियो सामाजिक माध्यमों पर प्रसारित हुआ और उनकी आलोचना शुरू हो गई। अगले दिन चेन्नई में फिल्म के एक कार्यक्रम के दौरान रणबीर ने स्पष्ट किया कि यह बोलने में हुई गलती थी। उन्होंने इसके लिए माफी भी मांगी।

5. राम की भूमिका में रणबीर को लेने पर आपत्ति

8 सितंबर 2026 को रामानंद सागर के पोते शिव सागर ने रणबीर कपूर को भगवान राम की भूमिका में लिए जाने पर सवाल उठाए थे।

उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि फिल्म 'एनिमल' देखने के बाद उनके लिए रणबीर को राम के रूप में स्वीकार करना व्यक्तिगत तौर पर कठिन है। उनका मानना था कि इस भूमिका के लिए किसी नए चेहरे को चुना जा सकता था।

हालांकि, उन्होंने रणबीर को अच्छा अभिनेता भी बताया और फिल्म के अन्य कलाकारों के चयन की सराहना की।

6. सीता और कैकेयी की वेशभूषा पर आलोचना

30 जुलाई को फिल्म का आधिकारिक दृश्य-प्रचार सामने आने के बाद कुछ दर्शकों ने कलाकारों की वेशभूषा और सजावट पर सवाल उठाए। विशेष रूप से साई पल्लवी की सीता और लारा दत्ता की कैकेयी के रूप की आलोचना हुई।

इसके बाद वेशभूषा तैयार करने वाले रिंपल और हरप्रीत नरूला ने अपने फैसलों का आधार बताया। रिंपल के अनुसार, सीता के कपड़ों की कल्पना करते समय उद्देश्य उस काल की वेशभूषा की हूबहू नकल करना नहीं था, बल्कि आस्था में मौजूद देवी की छवि को सामने रखना था।

डिजाइनरों ने मंदिरों, कैलेंडर चित्रों और अन्य कलाकृतियों से प्रेरणा लेने की बात कही। कैकेयी के कपड़ों में हरे और गहरे लाल रंग के इस्तेमाल को भी उन्होंने उनके चरित्र के अलग-अलग पहलुओं से जोड़ा।

7. रामलीला महासंघ ने पहले फिल्म दिखाने की मांग की

2 अगस्त 2026 को दिल्ली के श्री रामलीला महासंघ ने फिल्म निर्माताओं से प्रदर्शन से पहले विशेष स्क्रीनिंग कराने की मांग की थी।

महासंघ के अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने निर्देशक नितेश तिवारी और निर्माण कंपनी को पत्र लिखकर कहा था कि संगठन के प्रतिनिधियों को फिल्म पहले दिखाई जाए, ताकि यह देखा जा सके कि उसमें कोई ऐसा दृश्य तो नहीं है जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हों।

महासंघ ने मांग पूरी नहीं होने पर प्रदर्शन की चेतावनी भी दी थी। पत्र में फिल्म 'आदिपुरुष' को लेकर हुए विवाद का उदाहरण दिया गया था। हालांकि, इस मांग से यह साबित नहीं होता कि 'रामायण' में कोई आपत्तिजनक दृश्य था।

8. दृश्य प्रभावों को लेकर भी हुई आलोचना

2 अप्रैल 2026 को फिल्म की पहली झलक सामने आने के बाद कंप्यूटर से तैयार किए गए दृश्यों यानी दृश्य प्रभावों पर सवाल उठे। कुछ दर्शकों ने दृश्यों की बनावट और कलाकारों के रूप की आलोचना की। कुछ ने इन्हें कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार किए जाने जैसा बताया।

7 अप्रैल को निर्माता नमित मल्होत्रा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि फिल्म की टीम लोगों की प्रतिक्रियाओं को गंभीरता से ले रही है और काम लगातार जारी है। उन्होंने उस समय दिखाए गए दृश्यों को केवल शुरुआत बताया।

अभिनेता ऋतिक रोशन ने भी कहा कि दृश्य प्रभावों का मूल्यांकन करते समय केवल यह नहीं देखना चाहिए कि कोई दृश्य वास्तविक लगता है या नहीं, बल्कि उसकी शैली और उद्देश्य को भी समझना चाहिए।

9. साई पल्लवी के सेना संबंधी पुराने बयान पर विवाद

अक्टूबर 2024 में साई पल्लवी के जनवरी 2022 के एक साक्षात्कार का छोटा हिस्सा सामाजिक माध्यमों पर साझा किया गया था। इसमें वह भारत और पाकिस्तान में सेनाओं तथा हिंसा को देखने के अलग-अलग नजरियों पर बात कर रही थीं।

उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान में कुछ लोग भारतीय सेना को जिस नजर से देखते हैं, भारत में लोग पाकिस्तानी सेना को उसी नजर से देखते हैं। उनका व्यापक तर्क था कि संघर्ष को दोनों पक्ष अलग-अलग दृष्टिकोण से देखते हैं और वह हिंसा को समझ नहीं पातीं।

इस बयान के बाद आलोचना हुई। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि उन्होंने भारतीय सेना को अपनी ओर से आतंकवादी कहा था। द न्यूज मिनट की रिपोर्ट के अनुसार, सामाजिक माध्यमों पर साझा किया गया वीडियो उनके लंबे साक्षात्कार का काटा हुआ हिस्सा था।

10. रणबीर के महाकाल मंदिर जाने का हुआ था विरोध

सितंबर 2022 में फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' के प्रचार के दौरान रणबीर कपूर और आलिया भट्ट उज्जैन के महाकाल मंदिर पहुंचे थे। वहां बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने रणबीर के पुराने खानपान संबंधी बयान का हवाला देते हुए उनके मंदिर में प्रवेश का विरोध किया था।

इस विरोध के कारण दोनों कलाकार मंदिर में दर्शन नहीं कर सके। यह घटना 'रामायण' से संबंधित नहीं थी, लेकिन बाद में रणबीर को भगवान राम की भूमिका दिए जाने पर उनका पुराना बयान फिर चर्चा में आ गया।

11. साई पल्लवी के कश्मीरी पंडितों पर बयान से उठा विवाद

जून 2022 में फिल्म 'विराट पर्वम' के प्रचार के दौरान साई पल्लवी ने कश्मीरी पंडितों के साथ हुई हिंसा और गोहत्या के संदेह में एक मुस्लिम व्यक्ति की भीड़ द्वारा हत्या का उदाहरण दिया था।

उनकी टिप्पणी पर कुछ लोगों ने आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि उन्होंने दोनों घटनाओं की तुलना की है। इसके बाद अभिनेत्री ने एक वीडियो जारी कर सफाई दी।

उन्होंने कहा कि उनकी बात को संदर्भ से अलग करके पेश किया गया। उनका उद्देश्य कश्मीरी पंडितों की पीड़ा को कम करके दिखाना नहीं था। उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडितों के साथ हुई त्रासदी और भीड़ की हिंसा, दोनों घटनाओं ने उन्हें परेशान किया था। उनके मुताबिक, धर्म के नाम पर किसी भी तरह की हिंसा गलत है।

12. रणबीर का 2011 का पुराना बयान फिर चर्चा में आया

साल 2011 में खानपान पर आधारित एक कार्यक्रम में रणबीर कपूर ने अपनी पसंद के बारे में बात करते हुए कहा था कि उनका परिवार पेशावर से आया है और उन्हें मटन, पाया तथा बीफ पसंद है।

उस समय इस बयान को लेकर कोई बड़ा विवाद नहीं हुआ था। लेकिन बाद के वर्षों में इसका एक हिस्सा बार-बार सामाजिक माध्यमों पर साझा किया गया।

रणबीर को भगवान राम की भूमिका में लिए जाने के बाद यह पुराना बयान फिर चर्चा में आ गया। कार्यक्रम के प्रस्तोता कुणाल विजयकर ने भी बाद में कहा था कि पूरी बातचीत में से रणबीर की एक पंक्ति को अलग करके प्रसारित किया गया था।

बेबाक24 टेक

'रामायण' से जुड़े विवादों को एक नजर से देखना सही नहीं होगा। कुछ आपत्तियां फिल्म के संगीत, वेशभूषा और दृश्य प्रभावों को लेकर हैं, जबकि कुछ कलाकारों के पुराने बयानों और उनकी पिछली भूमिकाओं से जुड़ी हैं। इसके अलावा फिल्म के अधिकारों का मामला कारोबारी समझौते और अदालत की कार्यवाही से संबंधित है। पाइरेसी रोकने का आदेश भी निर्माताओं की कानूनी सुरक्षा के लिए था, न कि फिल्म के खिलाफ कोई फैसला।

इन सभी मामलों में कुछ प्रतिक्रियाएं व्यक्तिगत राय और आरोपों पर आधारित हैं। इसलिए दर्शकों के लिए जरूरी है कि वे तथ्य, कानूनी विवाद और व्यक्तिगत आलोचना के बीच अंतर समझें।



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