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आजम खां को तत्काल राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट में इसी सप्ताह सुनवाई संभव

by on | 2026-11-02 16:50:21

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आजम खां को तत्काल राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट में इसी सप्ताह सुनवाई संभव

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से तत्काल सुनवाई की राहत नहीं मिली है। सोमवार को शीर्ष अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली उनकी याचिका को तुरंत सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने संकेत दिया कि मामले की सुनवाई इसी सप्ताह हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने आजम खां के वकील निजाम पाशा की दलीलों पर ध्यान दिया। वकील ने याचिका पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया था, लेकिन पीठ ने इसे तुरंत सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया।

हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि याचिका पर इसी सप्ताह सुनवाई होने की संभावना है। अब मामले में अदालत के अगले कदम पर नजर रहेगी।

14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए आजम खां

रविवार को गाजियाबाद की विशेष अदालत ने आजम खां को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। 78 वर्षीय सपा नेता को जौहर ट्रस्ट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अदालत के सामने पेश किया गया था।

उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत लाया गया। इस दौरान परिसर के बाहर उनके कई समर्थक भी मौजूद थे।

31 अक्टूबर को ईडी ने किया था गिरफ्तार

प्रवर्तन निदेशालय ने 31 अक्टूबर को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आजम खां को गिरफ्तार किया था। यह कार्रवाई उस समय हुई, जब वह और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम कथित दो पैन कार्ड रखने के मामले में रामपुर जेल से जमानत पर रिहा हुए थे।

ईडी ने आजम खां और अन्य लोगों के खिलाफ उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज 58 प्राथमिकी के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है।

1,170 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क

ईडी ने 28 अक्टूबर को बताया था कि उसने धनशोधन निवारण कानून के तहत रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की जमीन और इमारतों को कुर्क किया है। एजेंसी के मुताबिक, इन संपत्तियों का मौजूदा बाजार मूल्य करीब 1,170 करोड़ रुपये है।

सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप

ईडी का आरोप है कि सार्वजनिक कार्यों के लिए आवंटित सरकारी धन का इस्तेमाल निजी विश्वविद्यालय के निर्माण में किया गया। एजेंसी के अनुसार, आजम खां ने उत्तर प्रदेश के शहरी विकास मंत्री और उत्तर प्रदेश जल निगम में अपने पदों तथा प्रभाव का कथित तौर पर इस्तेमाल करके अनियमितताओं को अंजाम दिया।

हालांकि, ये आरोप हैं और मामले में अंतिम न्यायिक निष्कर्ष के रूप में इन्हें नहीं देखा जाना चाहिए।

विश्वविद्यालय की इमारतों को गिराने का भी मामला

जुलाई में रामपुर विकास प्राधिकरण ने विश्वविद्यालय परिसर की 38 इमारतों को गिराने का आदेश दिया था। विश्वविद्यालय की ओर से इस आदेश के खिलाफ अपील दायर की गई थी। इसके बाद अगस्त में ईडी ने मामले के सिलसिले में छापेमारी की और आजम खां से पूछताछ भी की थी।

बेबाक24 टेक

आजम खां की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में संभावित सुनवाई उनके लिए महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम है। फिलहाल अदालत ने तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की है, लेकिन इसी सप्ताह सुनवाई की संभावना जताई है। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी के आरोपों और आजम खां को मिलने वाली संभावित न्यायिक राहत पर आगे की कार्यवाही निर्णायक होगी।



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