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यूपी में सरकारी नौकरी के नियम सख्त, हिंसक संगठनों से जुड़े अभ्यर्थी हो सकते हैं अपात्र

by on | 2026-10-29 13:57:44

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यूपी में सरकारी नौकरी के नियम सख्त, हिंसक संगठनों से जुड़े अभ्यर्थी हो सकते हैं अपात्र

लखनऊ | बेबाक24 न्यूज़

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सरकारी नौकरियों के लिए चरित्र सत्यापन के नियमों में बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत हिंसक तरीकों से व्यवस्था बदलने का घोषित उद्देश्य रखने वाले संगठनों से जुड़े अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी के लिए अपात्र माना जा सकता है। हालांकि, केवल राजनीतिक विचारधारा या किसी व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के आधार पर उसे स्वतः अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा।

यह नीति प्रदेश के विभिन्न विभागों, निगमों, परिषदों और स्थानीय निकायों में सीधी भर्ती के तहत चयनित अभ्यर्थियों पर लागू होगी। प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक एम. देवराज की ओर से उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में शासनादेश जारी किया गया है।

केवल प्राथमिकी से नहीं रद्द होगी पात्रता

नई नीति में स्पष्ट किया गया है कि किसी अभ्यर्थी के खिलाफ केवल प्राथमिकी दर्ज होने या जांच लंबित रहने से उसे स्वतः सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य नहीं माना जाएगा।

इसी तरह, जिन मामलों में अभ्यर्थी अंतिम रूप से बरी हो चुका है, जिनका निपटारा समझौते के जरिए हुआ है या जो किशोर न्याय कानून के दायरे में आते हैं, उनमें भी स्वतः अयोग्यता लागू नहीं होगी।

हालांकि, हत्या, डकैती, दुष्कर्म, महिला की गरिमा भंग करने, भ्रष्टाचार, आतंकवादी गतिविधियों, प्रश्नपत्र लीक और नकल कराने वाले गिरोहों से जुड़े मामलों में संलिप्तता सामने आने पर अभ्यर्थी की पात्रता प्रभावित हो सकती है।

सत्यापन लंबित होने पर भी मिल सकेगा नियुक्ति पत्र

नई व्यवस्था के अनुसार, चरित्र सत्यापन की रिपोर्ट लंबित होने के कारण नियुक्ति पत्र जारी करने की प्रक्रिया रोकना अनिवार्य नहीं होगा। अभ्यर्थी से स्व-घोषणा पत्र और निर्धारित प्रपत्र लेकर औपबंधिक नियुक्ति पत्र जारी किया जा सकेगा।

हालांकि, यदि अभ्यर्थी ने गलत जानकारी दी है या सत्यापन में वह अपात्र पाया जाता है, तो उसकी नियुक्ति तत्काल रद्द की जा सकती है। इसके अलावा, संबंधित अभ्यर्थी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।

पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों का नए सिरे से चरित्र सत्यापन नहीं कराया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर उनके पिछले विभाग से जरूरी जानकारी ली जा सकती है।

30 दिन में देनी होगी सत्यापन रिपोर्ट

नई व्यवस्था में जिला पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआईयू) को सत्यापन के लिए रिपोर्ट मिलने के 30 दिन के भीतर नियुक्ति प्राधिकारी को अपनी रिपोर्ट देनी होगी।

यदि निर्धारित समय में रिपोर्ट नहीं मिलती है, तो गृह विभाग इसकी निगरानी करेगा। इसका उद्देश्य सत्यापन की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाना है।

अभ्यर्थी को अपना पक्ष रखने का मिलेगा मौका

सत्यापन के दौरान पुलिस या स्थानीय अभिसूचना इकाई अभ्यर्थी के घर जाकर पूछताछ नहीं करेगी। उसकी भौतिक उपस्थिति भी अनिवार्य नहीं होगी।

यदि सत्यापन रिपोर्ट प्रतिकूल आती है, तो जिलाधिकारी अपनी संस्तुति भेजने से पहले अभ्यर्थी को ऑनलाइन या व्यक्तिगत रूप से अपना पक्ष रखने का अवसर देंगे। इससे अभ्यर्थी को अपने खिलाफ सामने आई जानकारी पर सफाई देने का मौका मिलेगा।

बेबाक24 टेक

उत्तर प्रदेश सरकार के नए नियमों में चरित्र सत्यापन की समयसीमा, अभ्यर्थियों के पक्ष रखने के अधिकार और आपराधिक मामलों में पात्रता के मानकों को स्पष्ट किया गया है। केवल प्राथमिकी दर्ज होने से अभ्यर्थी स्वतः अयोग्य नहीं होगा, लेकिन गंभीर अपराधों में संलिप्तता या हिंसक तरीकों से व्यवस्था बदलने का घोषित उद्देश्य रखने वाले संगठनों से जुड़ाव नौकरी की पात्रता को प्रभावित कर सकता है।



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