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राज्य उत्तर प्रदेश

मेरठ की दोनों एमएलसी सीटों पर भाजपा की जीत, शिक्षक संगठनों को झटका

by on | 2026-10-28 13:40:06

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मेरठ की दोनों एमएलसी सीटों पर भाजपा की जीत, शिक्षक संगठनों को झटका

मेरठ | बेबाक24 न्यूज़

उत्तर प्रदेश के मेरठ-सहारनपुर खंड की शिक्षक और स्नातक विधान परिषद सीटों पर भाजपा ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की है। वर्ष 2020 के बाद 2026 के चुनाव में भी दोनों सीटें भाजपा के खाते में जाने से शिक्षक संगठनों का लंबे समय से चला आ रहा राजनीतिक प्रभाव और कमजोर हुआ है। हालांकि, इस जीत का आगामी विधानसभा चुनाव पर कितना असर पड़ेगा, यह आगे की राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

शर्मा और पुंडीर का दबदबा टूटा

मेरठ-सहारनपुर खंड की शिक्षक सीट पर माध्यमिक शिक्षक संघ के शर्मा गुट का लंबे समय तक प्रभाव रहा। संगठन के संस्थापक दिवंगत ओमप्रकाश शर्मा ने इस सीट का 50 वर्षों तक प्रतिनिधित्व किया और 8 बार जीत हासिल की थी।

स्नातक सीट पर भी शर्मा गुट के हेम सिंह पुंडीर 4 बार विजयी रहे थे। बलबीर सिंह दबथुआ भी इस सीट से जीत चुके थे।

वर्ष 2020 के चुनाव में भाजपा के श्रीचंद शर्मा ने ओमप्रकाश शर्मा को और भाजपा के दिनेश गोयल ने हेम सिंह पुंडीर को हराकर इस वर्चस्व को चुनौती दी थी। 2026 के चुनाव में भी भाजपा दोनों सीटें जीतने में सफल रही।

शिक्षक संगठनों में एकजुटता नहीं बन सकी

चुनाव से पहले शिक्षक संगठनों के शर्मा और ठकुराई गुट के बीच गठबंधन की कोशिश हुई थी। हालांकि, शर्मा गुट के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष डॉ. प्रमोद मिश्रा के भाजपा में शामिल होने के बाद यह प्रयास आगे नहीं बढ़ सका। दोनों गुट अलग-अलग चुनाव मैदान में उतरे।

दोनों संगठनों के पदाधिकारियों ने चुनाव के दौरान मतदाता सूची में अनियमितताओं के आरोप भी लगाए थे। परिणाम आने के बाद शिक्षक संगठनों के सामने अपने राजनीतिक प्रभाव को फिर से मजबूत करने की चुनौती खड़ी हो गई है।

सपा ने मतदाता सूची पर उठाए सवाल

समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष कर्मवीर सिंह गुमी ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने शिक्षक और स्नातक दोनों सीटों पर पार्टी समर्थकों के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं होने दिए। उन्होंने दावा किया कि इसके बावजूद पार्टी पिछले चुनाव की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करते हुए दूसरे स्थान पर पहुंची।

वहीं, माध्यमिक शिक्षक संघ के ठकुराई गुट के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. उमेश चंद त्यागी ने मतदाता सूची तैयार करने से लेकर मतदान तक अनियमितताओं के आरोप लगाए। उनका दावा है कि इस संबंध में मंडलायुक्त, उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और केंद्रीय चुनाव आयोग से शिकायत की गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।

त्यागी ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ गैर-शिक्षकों से मतदान कराया गया। ये आरोप संबंधित पक्षों के दावे हैं; उपलब्ध सामग्री में इनकी स्वतंत्र पुष्टि का विवरण नहीं दिया गया है।

भाजपा को क्या राजनीतिक लाभ मिल सकता है?

मेरठ-सहारनपुर खंड की दोनों सीटों पर लगातार दूसरी जीत भाजपा के लिए संगठनात्मक उपलब्धि है। इससे शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के बीच पार्टी की मौजूदगी का संकेत मिलता है। दूसरी ओर, शिक्षक संगठनों के कमजोर प्रदर्शन और विपक्ष की ओर से लगाए गए चुनावी अनियमितताओं के आरोप इस चुनाव के अन्य महत्वपूर्ण पहलू हैं।

हालांकि, विधान परिषद की इन सीटों के नतीजों के आधार पर 2027 के विधानसभा चुनाव का परिणाम तय मानना उचित नहीं होगा। विधानसभा चुनाव में मतदाताओं का दायरा, स्थानीय मुद्दे और राजनीतिक समीकरण अलग हो सकते हैं।

बेबाक24 टेक

मेरठ-सहारनपुर खंड की शिक्षक और स्नातक सीटों पर भाजपा की लगातार दूसरी जीत ने पुराने शिक्षक संगठनों के प्रभाव में आई कमी को फिर सामने रखा है। वहीं, मतदाता सूची और मतदान प्रक्रिया को लेकर सपा तथा शिक्षक संगठनों के आरोपों पर आधिकारिक जांच या निष्कर्ष की जानकारी सामने आने पर ही उनकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।



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