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मद्रास हाईकोर्ट का फैसला: आगम मंदिरों में प्रवेश के लिए श्रद्धा और परंपरा जरूरी

by on | 2026-10-28 13:32:54

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मद्रास हाईकोर्ट का फैसला: आगम मंदिरों में प्रवेश के लिए श्रद्धा और परंपरा जरूरी

चेन्नई | बेबाक24 न्यूज़

मद्रास हाईकोर्ट ने आगम शास्त्रों के अनुसार संचालित हिंदू मंदिरों में प्रवेश को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि जो गैर-हिंदू मंदिर की परंपराओं का पालन करने या देवता के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का संकल्प लेने से इनकार करते हैं, उन्हें ऐसे मंदिरों में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह फैसला केवल आगम मंदिरों पर लागू होता है।

न्यायमूर्ति जीआर स्वामीनाथन और न्यायमूर्ति पी. मुरुगन की खंडपीठ ने यह निर्णय के. थंगम वेंकटेश की जनहित याचिका पर सुनाया। याचिका में तमिलनाडु के मंदिर प्रवेश संबंधी नियमों को सख्ती से लागू करने और उल्लंघन के मामलों में जवाबदेही तय करने की मांग की गई थी।

आगम मंदिरों में क्या हैं नियम?

आगम मंदिर वे हिंदू मंदिर हैं, जिनका निर्माण, धार्मिक प्रतिष्ठापन और संचालन आगम शास्त्रों में निर्धारित परंपराओं के अनुसार किया जाता है। इन शास्त्रों में पूजा-पद्धति और मंदिर से जुड़ी विभिन्न धार्मिक प्रक्रियाओं का उल्लेख है।

अदालत ने कहा कि ऐसे मंदिरों की धार्मिक परंपराओं और रीति-रिवाजों का सम्मान किया जाना चाहिए। पीठ के अनुसार, मंदिर में प्रवेश करने वाले व्यक्ति से हिंदू धर्म अपनाने की मांग करना और देवता के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का आग्रह करना अलग-अलग बातें हैं।

मुख्यमंत्री विजय के उदाहरण का उल्लेख

सुनवाई के दौरान पीठ ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय का उदाहरण दिया। अदालत के अनुसार, ईसाई धर्म को मानने वाले विजय ने मदुरै के मीनाक्षी अम्मन मंदिर में प्रवेश से पहले वहां निर्धारित शपथ-पत्र पर हस्ताक्षर किए थे और उसके बाद पूजा-अर्चना की थी।

न्यायाधीशों ने कहा कि इस प्रक्रिया में उनसे हिंदू धर्म अपनाने के लिए नहीं कहा गया, बल्कि देवता के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने की अपेक्षा की गई। अदालत ने इसे समावेशी दृष्टिकोण के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।

राजनीतिक दिखावे पर अदालत की टिप्पणी

पीठ ने उन मामलों पर भी टिप्पणी की, जिनमें कुछ गैर-हिंदू राजनेताओं पर राजनीतिक लाभ के लिए मंदिरों में जाने और धार्मिक प्रतीकों का प्रदर्शन करने के आरोप लगे हैं। अदालत ने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए किया गया दिखावा मंदिरों की परंपराओं पर हावी नहीं होना चाहिए।

सुनवाई के दौरान टीवीके विधायक बदरुद्दीन मुस्तफा से जुड़ी एक घटना का भी उल्लेख किया गया। आरोप था कि उन्होंने कुंभाभिषेकम समारोह के दौरान सुविधाओं का निरीक्षण करने के बहाने मंदिर के गोपुरम पर चढ़ाई की थी। अदालत ने इस घटना की आलोचना करते हुए धार्मिक स्थलों से जुड़े नियमों के पालन पर जोर दिया।

नियमों के सख्त पालन का निर्देश

अदालत ने अधिकारियों से मंदिरों में प्रवेश और धार्मिक परंपराओं से जुड़े नियमों को सख्ती से लागू करने को कहा। पीठ के अनुसार, स्थापित रीति-रिवाजों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए और राजनीतिक हितों के कारण उनसे समझौता नहीं होना चाहिए।

बेबाक24 टेक

मद्रास हाईकोर्ट के फैसले में आगम मंदिरों की धार्मिक परंपराओं और प्रवेश संबंधी नियमों के पालन पर जोर दिया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका निर्णय सभी मंदिरों पर सामान्य रूप से लागू नहीं होता, बल्कि आगम परंपरा के अनुसार संचालित मंदिरों तक सीमित है। फैसले का दायरा समझने के लिए इसके आधिकारिक आदेश और संबंधित मंदिर के लागू नियम महत्वपूर्ण हैं।



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