ब्रेकिंग न्यूज़
यूपी को पहली शयनयान वंदे भारत की सौगात, बनारस से दिल्ली का सफर होगा आसान
राजनीति राजनीति

एसआरएफटीआई में मशाल मार्च के बाद पहुंची पुलिस, प्रशासन और छात्र संघ आमने-सामने

by on | 2026-10-28 13:32:45

Share: Facebook | Twitter | WhatsApp | LinkedIn Visits: 3021


एसआरएफटीआई में मशाल मार्च के बाद पहुंची पुलिस, प्रशासन और छात्र संघ आमने-सामने

एसआरएफटीआई में मशाल मार्च के बाद पहुंची पुलिस, प्रशासन और छात्र संघ आमने-सामने

कोलकाता | बेबाक24 न्यूज़

कोलकाता स्थित सत्यजीत रे फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (एसआरएफटीआई) में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद तनाव बढ़ गया है। परिसर में सुरक्षा बढ़ाने की मांग को लेकर छात्रों ने मशाल मार्च निकाला। इसके बाद मंगलवार देर रात पुलिस संस्थान परिसर में दाखिल हुई। पुलिस की तैनाती को लेकर संस्थान प्रशासन और छात्र संघ के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं।

यह विवाद 27 सितंबर और 4 अक्तूबर को परिसर में हुई झड़पों के बाद से जारी है। इन घटनाओं के विरोध में छात्र धरने पर बैठे हैं और 28 सितंबर से संस्थान में कक्षाएं बंद हैं।

प्रशासन ने मशाल मार्च पर उठाए सवाल

संस्थान के अधिकारियों के अनुसार, करीब 50 छात्रों ने बिना पूर्व सूचना या अनुमति के मशाल मार्च निकाला। छात्र परिसर के विभिन्न हिस्सों से गुजरे, जिनमें अतिथि गृह के पास का आवासीय क्षेत्र भी शामिल था।

संस्थान के एक अधिकारी ने आरोप लगाया कि मशालें लेकर नारे लगाने वाले छात्रों के कारण करीब एक घंटे तक डर और बेचैनी का माहौल बना रहा। प्रशासन ने इस प्रदर्शन को शांतिपूर्ण विरोध मानने से इनकार किया और कहा कि छात्रों को कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए।

छात्र संघ ने पुलिस की तैनाती पर जताई आपत्ति

छात्र संघ का दावा है कि रात करीब 11:30 बजे 10 से 15 पुलिसकर्मी परिसर में दाखिल हुए और अतिथि गृह की ओर गए, जहां कुलपति रहते हैं। संघ के अनुसार, छात्रों का मार्च शाम करीब 6:30 बजे ही समाप्त हो गया था।

छात्र प्रतिनिधियों ने सवाल उठाया कि प्रदर्शन समाप्त होने के कई घंटे बाद पुलिस को परिसर में क्यों तैनात किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चार छात्र प्रतिनिधियों ने कुलपति से मुलाकात कर पुलिस की तैनाती पर चर्चा करने और लिखित स्पष्टीकरण मांगने की कोशिश की, लेकिन कुलपति ने बातचीत से इनकार कर दिया।

छात्र संघ ने यह दावा भी किया कि परिसर में तैनात ज्यादातर पुलिसकर्मियों ने पहचान चिह्न नहीं लगाए थे। संघ ने इस पर पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल उठाए हैं।

कुलपति के डरने के दावे पर भी विवाद

छात्र संघ ने कुलपति के इस दावे पर सवाल उठाया कि मशाल मार्च से उन्हें डर लगा था। संघ का कहना है कि मार्च के दौरान अतिथि गृह के आसपास के इलाके को खाली रखा गया था। उसने अपने दावे के समर्थन में वीडियो और तस्वीरें उपलब्ध कराने की पेशकश भी की है।

हालांकि, प्रशासन और छात्र संघ के इन परस्पर विरोधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

27 सितंबर और 4 अक्तूबर की झड़पों के बाद बढ़ा तनाव

27 सितंबर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े एक संगठन के साथ टकराव के बाद संस्थान में विरोध शुरू हुआ था। इसके बाद 4 अक्तूबर को तनाव फिर बढ़ गया, जब बंगीय हिंदू जागरण मंच के सदस्य संस्थान के मुख्य द्वार की ओर बढ़े। इस दौरान कथित तौर पर बोतलें और ईंटें फेंकी गईं।

छात्र 12 अक्तूबर से कुलपति कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। 16 अक्तूबर को प्रशासन ने छात्रों से छात्रावास खाली करने को कहा था, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया।

बेबाक24 टेक

एसआरएफटीआई में विवाद का केंद्र छात्रों के विरोध प्रदर्शन, परिसर की सुरक्षा और पुलिस की तैनाती है। प्रशासन ने मशाल मार्च के तरीके पर आपत्ति जताई है, जबकि छात्र संघ ने पुलिस की देर रात हुई तैनाती और कुलपति के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं। घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर के लिए दोनों पक्षों के दावों की निष्पक्ष जांच और आधिकारिक स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण होंगे।



Search
Recent News
Top Trending
Most Popular

Leave a Comment