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ब्राजील चुनाव: लूला की जीत पर विवाद, बोल्सोनारो ने मांगे नतीजे रद्द करने

by on | 2026-10-26 12:32:28

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ब्राजील चुनाव: लूला की जीत पर विवाद, बोल्सोनारो ने मांगे नतीजे रद्द करने

ब्रासीलिया | बेबाक24 न्यूज़

ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने अपने प्रतिद्वंद्वी फ्लावियो बोल्सोनारो को हराकर जीत हासिल की है। हालांकि, हार के बाद बोल्सोनारो ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए नतीजे रद्द करने की मांग की है। उनके इस कदम से देश में राजनीतिक तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, मतगणना पूरी होने के बाद लूला को 51.8% वोट मिले। उन्होंने बोल्सोनारो को करीब 44 लाख मतों से पीछे छोड़ दिया। नतीजों के बाद लूला के समर्थकों ने साओ पाउलो और रियो डी जनेरियो समेत कई शहरों में जश्न मनाया।

लोकतंत्र की रक्षा को बताया जीत का आधार

जीत के बाद लूला ने कहा कि उनकी पार्टी लोगों को यह समझाने में सफल रही कि ब्राजील में लोकतंत्र की रक्षा के लिए मतदान जरूरी है। उन्होंने डिजिटल मंचों के जरिए विदेशी हस्तक्षेप के प्रयासों को भी अपनी जीत के संदर्भ में उठाया।

लूला ने कहा कि ब्राजील अपने फैसले खुद लेने में सक्षम है। उन्होंने शासन व्यवस्था में बदलाव करने और निर्णय प्रक्रिया में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने की बात भी कही।

बोल्सोनारो ने मतदान प्रक्रिया पर उठाए सवाल

हार स्वीकार करने के बजाय बोल्सोनारो ने मतदान का समय बढ़ाने के फैसले पर सवाल उठाए और चुनावी नतीजे रद्द करने की मांग की। हालांकि, मतदान का समय बढ़ाने की मांग दोनों उम्मीदवारों की ओर से की गई थी।

लूला समर्थकों ने कुछ शहरों में मतदान केंद्रों तक पहुंचने के लिए बसों की कमी की शिकायत की थी। वहीं, बोल्सोनारो समर्थक क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण मतदान में परेशानी आई थी।

मतदान का समय बढ़ने से पैदा हुआ भ्रम

मतदान समाप्त होने से कुछ मिनट पहले ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश क्रिस्टियानो जैनिन ने मतदान का समय 2 घंटे बढ़ाने का आदेश दिया। इस फैसले के बाद कुछ मतदान केंद्रों पर असमंजस की स्थिति पैदा हुई। कुछ स्थानों पर मतदान मशीनें बंद हो चुकी थीं, जबकि अन्य केंद्रों पर प्रक्रिया को लेकर भ्रम बना रहा।

इसके कारण मतगणना में भी देरी हुई। बोल्सोनारो के सहयोगियों ने फैसले पर सवाल उठाते हुए न्यायाधीश के पुराने राजनीतिक संबंधों का उल्लेख किया।

महंगाई, रोजगार और अपराध रहे प्रमुख मुद्दे

चुनाव प्रचार में महंगाई, रोजगार और अपराध जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। बोल्सोनारो ने अपराध पर सख्ती और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें घटाने का वादा किया था। दूसरी ओर, लूला ने सामाजिक कल्याण योजनाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा को अपने अभियान का अहम हिस्सा बनाया।

पहले दौर में पीछे रहने के बाद लूला ने अपने प्रचार अभियान में बदलाव किया और युवाओं समेत विभिन्न वर्गों के मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश की।

विवादों से भरा रहा दोनों नेताओं का राजनीतिक सफर

लूला भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़े मामलों में जेल जा चुके हैं। बाद में उनकी सजा रद्द कर दी गई। न्यायिक प्रक्रिया पर उठे सवालों के बाद सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने उनकी राजनीतिक वापसी का रास्ता साफ किया।

लूला ने मजदूर संगठन से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की और वर्कर्स पार्टी की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह 2002 और 2006 में राष्ट्रपति चुने गए थे। अब उनकी वापसी को उनके लंबे राजनीतिक सफर का अहम पड़ाव माना जा रहा है।

लैटिन अमेरिका की राजनीति पर पड़ सकता है असर

ब्राजील क्षेत्र की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। ऐसे में वहां सत्ता परिवर्तन का प्रभाव आर्थिक नीतियों और अमेरिका समेत अन्य देशों के साथ संबंधों पर पड़ सकता है। लूला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के आलोचक रहे हैं और उनकी सरकार से स्वतंत्र विदेश नीति अपनाने की अपेक्षा की जा रही है।

बेबाक24 टेक

ब्राजील के चुनाव में लूला की जीत के बाद बोल्सोनारो की ओर से नतीजे रद्द करने की मांग ने राजनीतिक विवाद को बढ़ा दिया है। मतदान प्रक्रिया पर उठे सवालों और चुनावी परिणामों को लेकर जारी टकराव के बीच देश की राजनीतिक स्थिरता पर नजर रहेगी।



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