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इस्राइल चुनाव: नेतन्याहू के सामने 7 अक्टूबर की सुरक्षा चूक बनी चुनौती

by on | 2026-10-26 12:24:59

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इस्राइल चुनाव: नेतन्याहू के सामने 7 अक्टूबर की सुरक्षा चूक बनी चुनौती

तेल अवीव | बेबाक24 न्यूज़

इस्राइल में 27 अक्टूबर को होने वाले संसदीय चुनाव से पहले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की राजनीतिक चुनौतियां बढ़ती दिखाई दे रही हैं। चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में उन्होंने ईरान से पैदा होने वाले खतरे और अपनी सुरक्षा नीतियों पर जोर दिया है, लेकिन 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले से पहले हुई सुरक्षा चूक को लेकर जनता की नाराजगी अब भी बड़ा मुद्दा बनी हुई है।

तेल अवीव समेत कई इलाकों में हजारों प्रदर्शनकारियों ने नेतन्याहू सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। यह चुनाव हमास के हमले और उसके बाद गाजा तथा ईरान में हुए युद्धों के बाद पहला राष्ट्रीय चुनाव है। ऐसे में इसके नतीजे नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

सुरक्षा चूक की जवाबदेही पर सवाल

चुनाव में 7 अक्टूबर 2023 के हमले से जुड़ी खुफिया और सुरक्षा विफलताओं की जवाबदेही प्रमुख मुद्दा बन गई है। बंधकों के परिजनों और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि नेतन्याहू स्वतंत्र जांच से बच रहे हैं।

तेल अवीव के होस्टेज स्क्वायर पर जुटे प्रदर्शनकारियों ने सरकार के प्रति नाराजगी जताई। इस दौरान विपक्षी नेता और याशर पार्टी के प्रमुख गादी आइजनकोट को भी समर्थन मिला। वह नेतन्याहू के प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों में शामिल हैं।

ईरान के खतरे को चुनावी मुद्दा बना रहे नेतन्याहू

नेतन्याहू ने रविवार को कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार इस्राइल पर परमाणु बम गिरने की तस्वीर साझा की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान परमाणु हथियार हासिल कर लेता है, तो इस्राइल के सामने गंभीर अस्तित्वगत खतरा पैदा हो सकता है।

नेतन्याहू ने ईरान से जुड़े खतरे को अन्य राजनीतिक मुद्दों से अधिक महत्वपूर्ण बताया। दूसरी ओर, विपक्षी नेता यायर गोलान ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मतदाताओं के बीच डर का माहौल बना रहे हैं।

सैन्य कार्रवाई के जरिए मतदाताओं को साधने की कोशिश

नेतन्याहू गाजा, लेबनान और ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तथा अपनी सुरक्षा नीति को चुनाव प्रचार का प्रमुख हिस्सा बना रहे हैं। उनका प्रयास दक्षिणपंथी मतदाताओं को एकजुट कर संसद में बहुमत हासिल करना है। इस्राइली संसद नेसेट में बहुमत के लिए 61 सीटों की जरूरत होती है।

हालांकि, सैन्य कार्रवाई पर जोर देने के बावजूद 7 अक्टूबर के हमले से पहले हुई सुरक्षा चूक और उसके बाद सरकार की भूमिका को लेकर उठ रहे सवाल उनके सामने चुनौती बने हुए हैं।

चुनाव प्रचार में एआई और डीपफेक का इस्तेमाल

रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव प्रचार में सोशल मीडिया बॉट्स, डीपफेक वीडियो और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार सामग्री का इस्तेमाल बढ़ा है। आरोप है कि ईरान से जुड़े ऑनलाइन बॉट्स का उपयोग नेतन्याहू की पार्टी के समर्थन में प्रचार के लिए किया गया।

दोनों राजनीतिक खेमों की ओर से एआई से तैयार वीडियो इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आई है। कुछ वीडियो में नेतन्याहू को हमास के हमले से पहले की कथित सुरक्षा विफलताओं को लेकर सवालों का सामना करते दिखाया गया है।

बेबाक24 टेक

इस्राइल के चुनाव में राष्ट्रीय सुरक्षा, 7 अक्टूबर 2023 की खुफिया चूक और सरकार की जवाबदेही प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। नेतन्याहू ईरान से खतरे और सैन्य कार्रवाई पर जोर दे रहे हैं, जबकि प्रदर्शनकारी सुरक्षा विफलताओं की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं। मतदाताओं का फैसला तय करेगा कि इन मुद्दों का सत्ता की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।



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