ब्रेकिंग न्यूज़
यूपी को पहली शयनयान वंदे भारत की सौगात, बनारस से दिल्ली का सफर होगा आसान
ताजा खबर ताजा खबर

वायुसेना प्रमुख की चेतावनी: कोई लक्ष्य पहुंच से बाहर नहीं

by on | 2026-10-25 12:01:23

Share: Facebook | Twitter | WhatsApp | LinkedIn Visits: 3202


वायुसेना प्रमुख की चेतावनी: कोई लक्ष्य पहुंच से बाहर नहीं

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर ने वायुसेना की सटीक हमला करने की क्षमता और रणनीतिक ताकत को प्रदर्शित किया। उनके मुताबिक, अभियान के दौरान पश्चिमी मोर्चे पर 1200 किलोमीटर की चौड़ाई और 200 किलोमीटर की गहराई तक सटीक हमले किए गए। उन्होंने कहा कि वायुसेना की पहुंच से बाहर कोई लक्ष्य नहीं है।

एपी सिंह ने जोर दिया कि इस अभियान में मिली सफलता के बाद भी वायुसेना को अपनी तैयारियों में ढिलाई नहीं बरतनी चाहिए। भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए सैन्य क्षमताओं को लगातार मजबूत करना जरूरी है।

थिएटराइजेशन पर वायुसेना का रुख स्पष्ट

वायुसेना प्रमुख ने कहा कि थिएटराइजेशन का उद्देश्य लड़ाकू विमानों को अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में स्थायी रूप से बांटना नहीं है। समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए साक्षात्कार में उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय वायुसेना तीनों सेनाओं के बीच संयुक्त संचालन और एकीकरण की प्रक्रिया के लिए प्रतिबद्ध है।

थिएटराइजेशन के तहत थल सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर जोर दिया जाता है, ताकि जरूरत के समय तीनों सेनाएं एकीकृत ढांचे में मिलकर काम कर सकें।

भविष्य के युद्धों में बढ़ेगा आपसी तालमेल

एपी सिंह के अनुसार, भविष्य के युद्ध एक साथ कई क्षेत्रों में लड़े जा सकते हैं। ऐसे में थल सेना, नौसेना और वायुसेना को पहले से अधिक समन्वय के साथ काम करना होगा।

उन्होंने कहा कि सबसे अहम सवाल यह है कि एकीकृत सैन्य ढांचे में वायु शक्ति का अधिकतम प्रभावी इस्तेमाल कैसे किया जाए। इसके लिए जरूरी है कि जहां आवश्यकता हो, वहां नियंत्रण केंद्रीय स्तर पर रहे और जहां उचित हो, वहां कार्रवाई की जिम्मेदारी विकेंद्रीकृत की जाए।

दूसरे देशों के मॉडल की नकल से बचने पर जोर

वायुसेना प्रमुख ने कहा कि भारत को भविष्य के युद्धक्षेत्र के स्वरूप को लेकर पूरी तरह निश्चित धारणाएं बनाने से बचना चाहिए। सैन्य ढांचे की योजना बनाते समय यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि आने वाले युद्धों की प्रकृति पहले से पूरी तरह समझी जा सकती है।

उन्होंने जोर दिया कि भारत के सैन्य ढांचे का आकलन देश की अपनी सुरक्षा जरूरतों के आधार पर होना चाहिए, न कि दूसरे देशों के मॉडल की नकल करके।

बेबाक24 टेक

वायुसेना प्रमुख के बयान में 2 प्रमुख बातें सामने आई हैं। पहली, ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों के आधार पर वायुसेना की क्षमताओं को लगातार मजबूत बनाए रखना। दूसरी, थिएटराइजेशन के तहत तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना, ताकि वायु शक्ति का प्रभावी इस्तेमाल हो सके और सैन्य निर्णय देश की वास्तविक सुरक्षा जरूरतों के अनुरूप लिए जाएं।



Search
Recent News
Top Trending
Most Popular

Leave a Comment